चोरी

 क्या चोरी अपराध है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 378 से 382 तक

यदि कोई व्यक्ति बेईमानी से किसी दूसरे व्यक्ति का सामान उसके कब्जे से ले लेता है तो उसे चोरी कहते हैं। यह काम जिसका सामान है उसकी इच्छा और आज्ञा के बिना किया जाता है परंतु बल का प्रयोग नहीं किया जाता है। सड़क पर पड़ी हुई वस्तु को ले लेना चोरी के अपराध के अंतर्गत नहीं आता। क्योंकि सड़क पर पड़ी वस्तु का कोई मालिक नहीं होता। सड़क पर गिरी वस्तु पाने पर उस व्यक्ति का नैतिक और विधिक कर्तव्य है कि वह उस वस्तु को निकट के पुलिस स्टेशन में जमा कर दें, जिससे उस वस्तु को उस व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास हो सके, जिसकी वह वस्तु है।

उदाहरण

1. एक व्यक्ति किसी के घर जाता है। वहां पर रखी है घड़ी पर उसकी नियत खराब हो जाती है। वह उस घड़ी को ले लेता है। उस व्यक्ति ने घड़ी की चोरी का अपराध किया है।

2. मोहन महेश से उसकी पुस्तक मांगता है| महेश मना कर देता है। मोहन फिर भी उस पुस्तक को बिना अनुमति के उठा ले जाता है। मोहन ने महेश की पुस्तक चुराने का अपराध किया।

दंड का प्रावधान

चोरी के अपराध की गंभीरता के अनुसार 10 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना हो सकता है।

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