चोट पहुंचाना

क्या चोट पहुंचाना अपराध है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 319 से 335 तक

साधारण जीवन में रोज ही मारपीट की घटनाएं होती रहती हैं। किसी को चोट पहुंचाना एक अपराध है। चोट पहुंचाने का अर्थ है किसी को शारीरिक कष्ट देना जैसे किसी को पीटना,  थप्पड़ मारना, बाल पकड़कर खींचना, डंडे से मारना, धारदार हथियार से मारना या पिस्तौल से चोट पहुंचाना आदि।

चोट मामूली हो सकती है और गंभीर भी, हड्डी टूट जाना, आंख फूट जाना, अपंग हो जाना आदि गंभीर चोट के अंतर्गत आते हैं। चोट की गंभीरता के आधार पर ही अपराधी को सजा दी जाती है।

लोग समझते हैं पुलिस को यह अधिकार है कि वह किसी को भी मारपीट सकती है जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यदि पुलिस वाला भी किसी को चोट पहुंचाता है या मारता पीटता है तो वह चोट पहुंचाने का अपराधी बनता है।

उदाहरण

1. मालिक ने नौकर से कहा कि बाजार से सब्जी ले आ| नौकर ने मना कर दिया। मालिक ने क्रोध में आकर नौकर को थप्पड़ मार दिया| मालिक ने नौकर को चोट पहुंचाने का अपराध किया।

2. कुछ लड़कों ने एक लड़की के चेहरे पर तेजाब फेंक कर उसका चेहरा खराब कर दिया| उन लड़कों ने उस लड़की को गंभीर चोट पहुंचाने का अपराध किया।

दंड का प्रावधान्

चोट पहुंचाने का दर्द 1 वर्ष के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक तथा जुर्माना हो सकता है। यह दंड शारीरिक चोट की गंभीरता के अनुसार होता है जिसमें अपराध की धाराएं बदल जाती हैं।

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