घरेलु हिंसा की सुनवाई कहा और कैसे होती है ?

 प्रश्न - संरक्षण अधिकारी कौन होता है? 

संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है जो एक शासकीय अधिकारी या किसी स्वैच्छिक संस्थान का सदस्य भी हो सकता है।

 प्रश्न - संरक्षण अधिकारी के क्या कर्तव्य होते हैं? 

घरेलू हिंसा की शिकायत प्राप्त होने पर संरक्षण अधिकारी द्वारा तीन चरणों में कार्यवाही की जाती है।

• प्रथम चरण- घरेलू हिंसा की रिपोर्ट तैयार करना।

• द्वितीय चरण - रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को सौंपना।

• तीसरा चरण - रिपोर्ट की नगर पुलिस स्टेशन और सेवा प्रदाता को भेजना।

पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए  

प्रश्न - संरक्षण अधिकारी क्या-क्या कार्य करता है? 

* राहत पाने के लिए पीड़ित का आवेदन तैयार करना।

* पीड़ित को कानूनी मदद दिलवाना।

* पीड़ित की शिकायत बिना किसी खर्चे के दर्ज करना।

* यदि पीड़ित किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लेना चाहती है तो उसकी मदद करना।

* पीड़ित की डॉक्टरी जांच करना।

* जांच कराने के बाद रिपोर्ट पुलिस स्टेशन और क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मजिस्ट्रेट को भेजना।

" पीड़ित और बच्चे को यातायात सुविधा उपलब्ध कराना।

* सेक्शन 20 के अंतर्गत आर्थिक सुविधा उपलब्ध कराना।

* निम्नलिखित सुविधाओं की सूची तैयार करना।

• कानूनी मदद

• सलाह

• शरण

• डॉक्टरी जांच

प्रश्न - क्या संरक्षण अधिकारी पीड़ित को उसकी संपत्ति, वस्तु, जेवर और धन आदि उपलब्ध कराने में भी मदद करता है? 

उत्तर - पूरी मदद करता है:

• यदि संरक्षण अधिकारी को लिखित आदेश प्राप्त होता है तो पीड़ित को अंतरिम सहायता दिलवाने के लिए उसके घर की जांच कर सकता है।

• पूरी जांच के पश्चात पीड़ित को उसके तोहफे जेवर बच्चों की सुपुर्दगी दिलवाने में मदद कर सकता है।

• पुलिस की मदद से घरेलू हिंसा में प्रयोग किए गए हथियार को जप्त कर सकता है।

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