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संविधान के अनुच्छेद 19 में मूल अधिकार | Fundamental Right of Freedom in Article 19 of Constitution

प्रश्न- निम्नांकित पर संक्षिप्त टिप्पणियां लिखिए- 1. सम्मेलन का अधिकार 2. संगम या संग बनाने का अधिकार 3. संचरण (भ्रमण) का अधिकार 4. निवास करने और बस जाने का अधिकार 5. व्यापार या कारोबार करने का अधिकार Write short notes to the following- 1. right to assemble 2. Right to Forum Association or Union 3. right to move 4. right to reside and settle 5. Right to carry on any trade of business.
उत्तर (1) सम्मेलन का अधिकार- संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(ख) के अंतर्गत भारत के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्वक निरयुध सम्मेलन करने का मूल अधिकार प्रदान किया गया है। इसके अधीन प्रत्येक नागरिक सभा एवं सम्मेलन आयोजित करने तथा जुलूस आदि निकालने के लिए स्वतंत्र है। वस्तुतः यह अधिकार भी वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार से मिलता-जुलता है। लेकिन यहां यह उल्लेखनीय है कि सम्मेलन की स्वतंत्रता का अधिकार भी अबाध अर्थात निरपेक्षत नहीं है विधि पूर्ण सम्मेलन के लिए दो बातें आवश्यक है क. यह शांतिपूर्वक होना चाहिए। यानी पीसफुली ख. निरायुद्ध होना चाहिए।  यानी विदाउट आर्म्स संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के अंतर्गत स…

अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 20 के संरक्षण

प्रश्न- अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 20 के अंतर्गत प्रदत संरक्षण की विवेचना कीजिये? उत्तर- संविधान के अनुच्छेद 20 के अंतर्गत अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में अभियुक्त को मुख्य रूप से तीन संरक्षण प्रदान किए गए हैं- 1. कार्योत्तर विधियों से संरक्षण 2. दोहरे दंड से संरक्षण 3. स्व- अभिशंसन से संरक्षण
1. कार्योत्तर विधियों से संरक्षण- संविधान के अनुच्छेद 20 में यह कहा गया है कि कोई व्यक्ति अपराध के लिए तब तक सिद्ध दोष नहीं ठहराया जाएगा जब तक कि उसने ऐसा कुछ करने के समय जो अपराध के रूप में आरोपित है किसी प्रकृत विधि का अतिक्रमण नहीं किया है या उससे अधिक शास्ति का भागी नहीं होगा जो उस अपराध के लिए किए जाने के समय प्रवृत्त विधि के अधीन अधिरोपित की जा सकती थी। अभिप्राय यह हुआ कि किसी भी व्यक्ति को केवल ऐसे कार्य के लिए दंडित किया जा सकता है जो उसे किए जाने के समय प्रवृत्त  किसी विधि के अधीन दंडनीय अपराध हो। यदि कार्य के लिए किए जाने के समय वह किसी विधि के अधीन दंडनीय अपराध नहीं है तो बाद में कोई विधि बनाकर उसे दंडनीय नहीं बनाया जा सकता है। इसका सीधा…

प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता | protection of life and personal liberty in Article 21 of Constitution

प्रश्न - संविधान के अंतर्गत प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता की संरक्षण की विवेचना कीजिए क्या इसमें जीविका का अधिकार भी शामिल है? Discuss the protection of the life and personal liberty under the constitution? does it include the right to livelihood also?                                  अथवा भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए किए गए उपबंधों की विवेचना कीजिए? क्या इस स्वतंत्रता के संरक्षण में जीविकोपार्जन का अधिकार भी सम्मिलित है? अपने उत्तर में निर्णित वादों की सहायता से स्पष्ट कीजिए? discuss the protection of the life and personal liberty as contained in article 21 of the Constitution of India? does it include the right to livelihood also? explain with the the help of decided cases?                                 अथवा स्वच्छ सुनवाई आज अनुच्छेद 21 का प्रमाणिक चिन्ह है। स्वच्छ सुनवाई से संबंधित निर्णित वादों का उल्लेख कीजिए? Fair trial is the hall mark of article 21  refer decided cases dealing with fair trial?                            …

जीविकोपार्जन का अधिकार | Right to Livelihood

जीविकोपार्जन का  अधिकार- यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या जीविकोपार्जन का  अधिकार (right to livelihood) अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार में सम्मिलित हैं? यद्यपि अनुच्छेद 21 में इसका स्पष्ट एवं अभिव्यक्त रूप से उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन शीर्षस्थ न्यायालय के न्यायिक निर्णयों में अब यह माना जाने लगा है कि जीविकोपार्जन का अधिकार अनुच्छेद 21 में सम्मिलित है। कंजूमर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया (ए आई आर 1995 एससीआर 1995 एस सी 922) के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा आजीविका के बेहतर साधन उपलब्ध कराने को अनुच्छेद 21 का एक अंग माना गया है सौदान सिंह बनाम नगर निगम नई दिल्ली (ए आई आर 1989 एससी 1988) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने आजीविका उपार्जन के अधिकार को यद्यपि स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मूल अधिकार नहीं माना है लेकिन अनुच्छेद 19 (1) (छ) के अंतर्गत इसे मूल अधिकार मानते हुए यह अवश्य कहा गया है कि यदि फुटपाथोंह एवं सड़कों पर आवागमन में व्यवधान पैदा किए बिना तथा शांति एवं व्यवस्था बनाए रखते हुए यदि कोई व्यक्ति अपनी आजीविका कमाता …

भारत का संविधान निरंकुश बंदीकरण एवं निरोध के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है

प्रश्न- "भारत का संविधान निरंकुश बंदीकरण एवं निरोध के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है।" विवेचना कीजिए। ( "the constitution of India provide protection against arbitrary arrest and detention."discuss. )
उत्तर- संविधान के अनुच्छेद 22 में व्यक्तियों की गिरफ्तारी एवं निरोध के संरक्षण के बारे में प्रावधान किया गया है। अनुच्छेद 22 दो प्रकार के संरक्षण प्रदान करता है- 1. सामान्य गिरफ्तारी के बारे में संरक्षण, तथा 2. निवारक निरोध विधियों के अधीन निरोध से संरक्षण
(1) सामान्य गिरफ्तारी के बारे में संरक्षण- अनुच्छेद 22(1) व (2) में सामान्य गिरफ्तारी के बारे में संरक्षण की व्यवस्था की गई है इसके अनुसार- " किसी भी व्यक्ति को जो गिरफ्तार किया गया है ऐसी गिरफ्तारी के कारणों से यथा शीघ्र अवगत कराए बिना अभिरक्षा में निरुद्ध नहीं रखा जाएगा तथा अपनी रुचि के विधि व्यवसायी से परामर्श करने और प्रतिरक्षा कराने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जायेगा; प्रत्येक व्यक्ति को, जो गिरफ्तार किया गया है और अभिरक्षा में निरुद्ध रखा गया है, गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा के …

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। Explain the various characteristics of the Constitution of India? भारत का संविधान एक पवित्र दस्तावेज है इसमें विश्व के प्रमुख संविधान ओं की विशेषताएं समाहित हैं यह संविधान निर्मात्री सभा के 2 वर्ष 11 माह 18 दिन के सतत प्रयत्न, अध्ययन विचार, विमर्श चिंतन एवं परिश्रम का निचोड़ है इसे 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारत पर लागू किया गया। भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्नांकित हैं- 1. विशालतम संविधान- सामान्यतया संविधान का आकार अत्यंत छोटा होता है संविधान में मोटी मोटी बातों का उल्लेख कर दिया जाता है और अन्य बातें  अर्थान्वयन के लिए छोड़ दी जाती हैं लेकिन भारत का संविधान इसका अपवाद है भारत के संविधान का आकार ने तो अत्यधिक छोटा रखा गया है और ना ही अत्यधिक बड़ा हमने सभी आवश्यक बातें समाहित करते हुए संतुलित आकार का रखा है। संविधान के मूल प्रारूप में 22 भाग 395 अनुच्छेद तथा 9 अनुसूचियां थी कालांतर में संशोधनों के साथ साथ इनमें अभिवृद्धि होती गई। सर आई जेनिंग्स के शब्दों में भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा और सबसे विस्तृत संविधान है आल…

समान कार्य के लिए समान वेतन की अवधारणा | Concept of equal pay for equal work

प्रश्न - समान कार्य के लिए समान वेतन की अवधारणा को समझाइए? Explain the concept of equal pay for equal work उत्तर-- संविधान के अनुच्छेद 39 घ में यह प्रावधान किया गया है कि पुरुषों एवं स्त्रियों का समान कार्य के लिए समान वेतन हो अभिप्राय हुआ कि समान कार्य के लिए पुरुष एवं स्त्रियों के वेतन में भिन्नता अर्थात भेदभाव नहीं होना चाहिए। उत्तराखंड महिला कल्याण परिषद बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश (ए. आई. आर. 1992 एस. सी. 1965) के मामले में ऐसे विभेद को असंवैधानिक माना गया है समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग के लिए आवश्यक है कि सेवा करने वाला व्यक्ति अपेक्षित योग्यता धारण करता है( स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड बनाम दिव्य इंदु भट्टाचार्य ए. आई. आर. 2011 एस. सी. 897)