दूसरे की संपत्ति हड़पना

क्या दूसरे की संपत्ति हड़पना अपराध है ?

भारतीय दंड संहिता की धारा 403,405 से 409 तक

संपत्ति बेईमानी से हड़पना एक अपराध है। यदि किसी को अपनी संपत्ति कुछ समय तक रखने के लिए या उसकी रखवाली करने के लिए दी जाए परंतु वह व्यक्ति उस संपत्ति को बेच देता है या अपने लिए इस्तेमाल करने लगता है तो यह संपत्ति हड़पना कहलाता है।

उदाहरण

1. मोहन सोहन की किताब पढ़ने के लिए उधार लेता है परंतु मोहन की नियत खराब हो जाती है और वह उस पुस्तक को बेच देता है। मोहन ने सोहन की संपत्ति हड़पने का अपराध किया है।

2. मुकेश अपना घर दिनेश को रखवाली तथा देखरेख करने के लिए देता है। मुकेश बेईमानी से उस घर को अपने नाम कर लेता है और दिनेश को लौटाने से इंकार कर देता है मुकेश दिनेश की संपत्ति हड़पने का अपराध करता है।

दंड का प्रावधान

इस अपराध का दंड 7 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है।

अपराध यदि लोक सेवक बनकर व्यापारी या एजेंट द्वारा किया जाता है तो आजीवन कारावास तक भी हो सकता है।

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