मोटर दुर्घटना मुआवजा लेने की पूरी कार्रवाई

 मोटर दुर्घटना मुआवजा लेने की पूरी कार्रवाई कैसे होती है? 

मोटर दुर्घटना की रिपोर्ट थाने में करनी चाहिए। रिपोर्ट घायल व्यक्ति स्वयं या उसका कोई साथी लिखवा सकता है। रिपोर्ट में दुर्घटना का समय, स्थान, वाहन का नंबर, दुर्घटना का कारण आदि लिखने चाहिए। चोट के बारे में शीघ्रता शीघ्र डॉक्टर की जांच करवानी चाहिए। संपत्ति हानि का विवरण भी देना चाहिए। गवाहों के नाम भी लिखवाने चाहिए। यदि बहुत घायल हुए हो तो प्रत्येक को अलग रिपोर्ट लिखवाने की आवश्यकता नहीं है परंतु यह देख लेना चाहिए कि रिपोर्ट में पूरी बात आ गई है या नहीं ज्यादा घायल होने पर रिपोर्ट अस्पताल में पहुंचने के बाद भी लिखवाई जा सकती है। डॉग की परीक्षा की नौकरी प्राप्त कर लेनी चाहिए और इलाज के कागज सावधानी से रख देनी चाहिए ताकि मुआवजा लेते वक्त हनी साबित करने में सुविधा रहे।

मृत्यु होने की दशा में शव का पोस्टमार्टम पुलिस करती है  लेकिन दुर्घटना में लंबी चोटों के कारण मृत्यु कुछ दिन बाद होती है तो भी शक परीक्षा की आवश्यकता होती है क्योंकि यह मृत्यु भी दुर्घटना में घायल होने के कारण ही मानी जाती है। पुलिस को की गई रिपोर्ट होगी मोटर दुर्घटना अध्यर्थना न्यायाधिकरण हजार्ने के लिए स्वीकार कर सकती है।

धारा 173 के अधीन अपील

दावा अधिकरण के निर्णय से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति निर्णय की तारीख के 90 दिन के भीतर उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। उचित कारण बताए जाने पर उच्च न्यायालय 90 दिन की अवधि के बाद भी अपील की सुनवाई कर सकता है अगर मुहावरे की  रकम 10,000  रुपए से कम हो तो अपील नहीं की जा सकती है और अगर मुआवजा की रकम ज्यादा हो तो अपील करने से पहले 25000 रुपए या मुआवजे का 50% रकम उच्च न्यायालय में जमा करवाना पड़ता है।


न्यायालय द्वारा दिलाई गई मुआवजे की रकम प्राप्त करने की विधि क्या है?

पिया रकम निर्णय के 30 दिन के अंदर देनी होती है अधिकरण द्वारा दिलाई गई रकम की वसूली के लिए एक प्रमाण पत्र जिला कलेक्टर के नाम भी प्राप्त किया जा सकता है। जिला कलेक्टर इस रकम को मालगुजारी के बकाया रकम की तरह कुर्की गिरफ्तारी आदि से वसूल करवा सकता है। अन्यथा मोटर दुर्घटना अजंता न्यायाधिकरण खुद भी इजरायल के जरिए मुआवजे की रकम उत्तर वादियों से वसूल कर सकता है।

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