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Showing posts from September, 2021

A K Roy vs Union of India - Leading Case Summary

 A K Roy vs Union of India - Supreme Court of India - Leading Case Summary :  The case of A.K. Roy vs Union of India [AIR 1982 SC 710] is popularly known as the NSA case or National Security Act Case. In this case Supreme Court by 4:1 majority upheld the constitutional validity of the National Security Act, 1947 and the ordinance which preceded the Act. The Supreme Court held that NSA act was neither vague or arbitrary in its provisions providing for detention of persons on certain grounds, as acting in a manner prejudicial to the 'defence of india', 'security of the India', and to 'relations with foreign power'. While upholding the validity of the NSA and Ordinance preceding it, the Court issued a number of directions with a view to safeguarding the interests of detenues detained under the NSA. The court in this case directed: 1) That immediately after detention his kith and kin must be informed in writing about his detention and his place of detention. 2) the

AIIMS Students Union vs AIIMS Case

 AIIMS Students Union vs AIIMS Case Summary AIR 2001 SC 3262 In the case of AIIMS Student Union vs AIIMS Supreme Court of India speaking about the importance of Fundamental Duties enshrined in Article 51A while striking down the institutional reservation of 33% in AIIMS coupled with 50% reservation discipline wise as violative of Article 14 of the Constitution of India. Supreme Court said that they are equally important like Fundamental Rights. Though Fundamental Duties are not made enforceable like Fundamental Rights but it cannot be  overlooked as duties in Part IV A is prefixed by the same word 'Fundamental' which was prefixed by the founding fathers of the Constitution to 'right' in Part III.

Mithu vs State of Punjab

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 Mithu vs State of Punjab is a leading case  on Indian Penal Code section 303. In Mithu vs State of Punjab AIR 1983 SC 473, Supreme Court struck down the section 303 of Indian Penal Code as unconstitutional on the ground that the classification between persons who commit murder whilst under the sentence of the imprisonment and those who commit murder whils they were not under the sentence of life imprisonment fothe purspose of making the sentence of  death mandatory in the case of the former class and optional in the latter class under a sentence of life imprisonment in jail commit murder he must be awarded sentence of  death. But under section 302 if a person commits murder he may be awarded either the sentence of death or the sentence of life imprisonment. The discretion as to which sentence is to be awarded is to be exercised by the courts which will determine the matter on the  nature of offences committed by an accused. This judicial discretion is not available to a life convi

खाने पीने की चीजों में मिलावट करना

क्या खाने पीने की चीजों में मिलावट करना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 272 व 273 के तहत खाने पीने के पदार्थ में बेचने के उद्देश्य से यदि कोई जानबूझकर मिलावट करता है जिससे वह पदार्थ जन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाए तो यह एक अपराध है। कुछ लोग पैसा कमाने के लिए इस हद तक भी गिर जाती हैं कि खाने पीने की चीजों में दूषित पदार्थ मिलाकर बेचते हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ऐसा पदार्थ को खाने या पीने के बाद लोग बीमार पड़ सकते हैं। मिलावट की गई वस्तु स्वास्थ्य के लिए अवश्य हानिकारक होनी चाहिए अन्यथा अपराध के अंतर्गत नहीं आएगा। दूध में पानी मिलाना कोई अपराध नहीं है क्योंकि इससे किसी बीमारी का खतरा नहीं होता। उदाहरण जुनेद पैसा कमाने के उद्देश्य से कीटाणु युक्त ताड़ी बेचता है जुनेद दूषित पेय बेचने का अपराधी है। दंड का प्रावधान मिलावटी या दूषित खाने पीने की चीजों को बेचने का दंड 6 महीने तक का कारोबार या ₹1000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

मिलावट की दवा बेचना

क्या मिलावट की दवा बेचना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 274, 275 व  276  दवा में मिलावट करना जिससे उस दवा का असर कम हो जाए या वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाए एक अपराध है। मिलावट करने वाला यह जानता है कि यह मिलावटी दवा किसी बीमार व्यक्ति को ही दी जाएगी या बेची जाएगी। कुछ लोग पैसा कमाने के उद्देश्य से नकली दवाएं बेचते हैं। यह एक अमानवीय अपराध है। क्योंकि एक बीमार व्यक्ति किसी दवा को असली समझकर खाता है परंतु उसको फायदा नहीं होता बल्कि उसका जीवन और कष्ट में हो जाता है। यहां तक कि उसकी जान भी जा सकती है। एक दवा के स्थान पर दूसरी दवा देना यदि जानबूझकर किसी विशेष दवा के स्थान पर कोई अन्य दवा यह कहकर बेची जाए या दी जाए कि यह वही विशेष दवा है तो इस प्रकार एक दवा के नाम पर दूसरी दवा बेचने वाला या दवा देने वाला व्यक्ति एक अपराधी है। उदाहरण 1. मोहम्मद बुखार की एक दवा को पीसकर उसमें चौक का पाउडर मिलाता है और उसकी टेबलेट बनाकर असली दवा की तरह पैकिंग करता है। उन मिलावटी दवाओं को वह एक अस्पताल में भेजता है मोहम्मद ने मिलावटी दवा बनाने और बेचने का अपराध किया। 2. डॉक्टर ने महेश को एक विशेष दवा

जल स्रोत या तालाब को दूषित करना

 क्या जल स्रोत या तालाब को दूषित करना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 277 के तहत जब कोई व्यक्ति किसी जल स्रोत या तालाब को जानबूझकर दूषित करता है जिसके कारण उस जलस्रोत या जलाशय की उपयोगिता कम हो जाती है तो वह जल स्रोत या तालाब को दूषित करने का अपराध करता है। उदाहरण एक व्यक्ति एक कारखाना चलाता है जिसका कचरा वो निकट के तालाब में फेंक देता है। वह व्यक्ति तालाब को दूषित करने का अपराध करता है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 3 महीने का कारावास या पांच सौ  रुपए तक का जुर्माना या दोनों है।

वातावरण को दूषित करना

 क्या वातावरण को दूषित करना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 278 के तहत यदि कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है जिससे वातावरण की हवा दूषित हो जाती है और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाती है तब वह व्यक्ति हवा को दूषित करने का अपराध करता है। स्वच्छ वातावरण होना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। हम सब का यह नैतिक कर्तव्य भी है कि वातावरण स्वच्छ रखें। उदाहरण 1. फरदीन अपने मैदान में हड्डियां एकत्रित करता है। यह हड्डियां कर जाती है और चारों तरफ बदबू फैल आती है जिससे आसपास के लोगों का जीवन मुश्किल हो जाता है। फरदीन वातावरण दूषित करने का अपराधी है। 2. पंकज कुछ बताएं बनाता है जिससे बदबू फैल जाती है। पंकज हवा को दूषित करने का अपराधी। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड ₹500 तक का जुर्माना है।

जालसाजी

  क्या जालसाजी अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 463 से 477-ए अपराधिक नियत से जाली कागज सर्टिफिकेट या दस्तावेज तैयार करना या असली दस्तावेज को परिवर्तित करना जालसाजी का अपराध है। यह कार्य किसी अन्य को नुकसान या स्वयं लाभ लेने के उद्देश्य से किया जाता है। उदाहरण 1. कॉलेज में प्रवेश करने के लिए एक व्यक्ति कई सर्टिफिकेट पर खुद ही प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर करता है। उसने जाली दस्तावेज बनाने का अपराध किया है। 2. एक व्यक्ति ऑफिसर में पैसा वसूलने के लिए जाली बिल बना कर जमा करता है। उसने जाली दस्तावेज या सर्टिफिकेट बनाने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान जालसाजी का दंड अपराध की गंभीरता को देखते हुए आजीवन कारावास तक तथा जुर्माना हो सकता है।

धोखा देना

क्या धोखा देना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 415 से 420 तक यदि कोई झूठ बोलकर किसी को धोखा देता है तो यह एक अपराध है। इस अपराध को अधिकतर लोग चार सौ बीसी के नाम से जानते हैं। बेईमानी से झूठ बोलकर या भ्रमित करके किसी से कुछ लाभ ले लेना या उसे नुकसान पहुंचाना धोखा देने का अपराध कहलाता है। यह अपराध छल कपट तथा बेईमानी से किया जाता है। झूठ बोलकर या गलत तथ्यों के द्वारा भ्रमित करके या बहुरूपिया बनकर यानी अपना झूठा या गलत परिचय देकर अपराधी किसी को कुछ करने के लिए प्रेरित करता है। उदाहरण 1 . एक व्यक्ति अपने कोई धनी व्यक्ति का पुत्र बताकर एक दुकानदार से उधार समान ले लेता है। उस व्यक्ति ने दुकानदार से चार सौ बीसी की यानी उसे धोखा देने का प्रयास किया। 2. एक व्यक्ति कांच के कुछ टुकड़ों को पूरा बता कर दूसरे व्यक्ति को बेच देता है उस व्यक्ति ने धोखा देने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान धोखा देने की अपराध का दंड 3 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना या दोनों हो सकता है। यदि बेईमानी व धोखे से किसी को उसकी संपत्ति से वंचित किया गया हो तो इस अपराध का दंड 7 वर्ष का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है।

दूसरे की संपत्ति हड़पना

क्या दूसरे की संपत्ति हड़पना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 403,405 से 409 तक संपत्ति बेईमानी से हड़पना एक अपराध है। यदि किसी को अपनी संपत्ति कुछ समय तक रखने के लिए या उसकी रखवाली करने के लिए दी जाए परंतु वह व्यक्ति उस संपत्ति को बेच देता है या अपने लिए इस्तेमाल करने लगता है तो यह संपत्ति हड़पना कहलाता है। उदाहरण 1. मोहन सोहन की किताब पढ़ने के लिए उधार लेता है परंतु मोहन की नियत खराब हो जाती है और वह उस पुस्तक को बेच देता है। मोहन ने सोहन की संपत्ति हड़पने का अपराध किया है। 2. मुकेश अपना घर दिनेश को रखवाली तथा देखरेख करने के लिए देता है। मुकेश बेईमानी से उस घर को अपने नाम कर लेता है और दिनेश को लौटाने से इंकार कर देता है मुकेश दिनेश की संपत्ति हड़पने का अपराध करता है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 7 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है। अपराध यदि लोक सेवक बनकर व्यापारी या एजेंट द्वारा किया जाता है तो आजीवन कारावास तक भी हो सकता है।

नुकसान पहुंचाना

  क्या नुकसान पहुंचाना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 225 से 240 तक जानबूझकर किसी व्यक्ति को या जनता को नुकसान पहुंचाने की नियत से किसी संपत्ति को नष्ट करना या परिवर्तित करना एक अपराध है। इस अपराध को शरारत भी कह सकते हैं। अपराध का अपराधी स्वयं लाभ लेने की नियत से नहीं बल्कि दूसरे को नुकसान पहुंचाने की नियत से अपराध करता है। संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मतलब है कि उस संपत्ति से किसी को वंचित करना, संपत्ति को नष्ट करना या उसके रूप को बदलना जिससे उस संपत्ति को क्षति पहुंचे और उसकी उपयोगिता या मूल्य कम हो जाए, जैसे दूसरों के पालतू जानवर को जहर दे देना, सिंचाई के पानी की दिशा बदल देना, सड़क या पुल आदि को नुकसान पहुंचाना, जिससे उन पर लोगों की यात्रा असुरक्षित हो जाए। उदाहरण 1. एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की कीमती अंगूठी उठाकर नदी में फेंक देता है। उस व्यक्ति ने नुकसान पहुंचाने का अपराध किया है। 2. एक व्यक्ति बहुत सारी गाय- भैंसे दूसरे व्यक्ति के खेत में छोड़ देता है। जिससे गाय भैंस ही उसकी सारी फसल खा जाए या नष्ट कर दें। उस व्यक्ति ने नुकसान पहुंचाने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान नुक

सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर दुर्व्यवहार करना

क्या सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर दुर्व्यवहार करना अपराध है  भारतीय दंड संहिता की धारा 510 के तहत शराब पीकर सड़क पर या किसी अन्य स्थान पर जो उसका नहीं है कुछ ऐसा व्यवहार करना जिसे दूसरा व्यक्ति नाराज हो जाए एक अपराध है। उदाहरण जुनेद शराब पीकर दूसरे व्यक्तियों को गाली देना प्रारंभ कर देता है जिससे आसपास के लोग बहुत क्रोधित हो जाते हैं। जुनेद ने सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर गलत व्यवहार करने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 24 घंटे तक का कारावास या ₹10 तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

सार्वजनिक स्थान पर झगड़ा करना

 सार्वजनिक स्थान पर झगड़ा करना भारतीय दंड संहिता की धारा 159 व 160 के तहत सार्वजनिक स्थान पर झगड़ा करने से समाज की शांति भंग होती है| इसीलिए जब कोई झगड़ा दो या दो से अधिक लोगों में किसी सार्वजनिक स्थान पर होता है तो वह हंगामा करने का अपराध कहलाता है। सार्वजनिक स्थान का मतलब हर वह जगह है जहां जनता जा सकती है जैसे रेलवे स्टेशन,  पिक्चर हॉल, पार्क, बाजार, बस स्टेशन इत्यादि। उदाहरण 1. कमल और राकेश में गाड़ी पार्क करने के सवाल पर झगड़ा हो जाता है। झगड़ा गाली गलौज से शुरू होकर मारपीट तक पहुंच जाता है। चारों तरफ भीड़ एकत्रित हो जाती है। कमल और राकेश दोनों सार्वजनिक स्थान पर झगड़ा करने के अपराधी हैं। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 1 महीने का कारावास या ₹100 का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

किसी को एक स्थान पर बंद कर देना

  क्या  किसी को एक स्थान पर बंद कर देना  अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 340 342 से 348 यदि किसी व्यक्ति को जबरदस्ती एक स्थान पर बंद कर दिया जाए जिससे वह उस स्थान से बाहर ना जा सके तो यह एक गंभीर अपराध है। या फिर किसी को एक कमरे में बंद करके बाहर से ताला लगा दिया जाए जिससे वह व्यक्ति कहीं जा नहीं सकता। किसी को एक अस्थान पर अधिक दिनों के लिए बंद कर दिया जाना या संपत्ति छीनने की नियत से या कोई और अपराध करने की नियत से बंद कर देना इस अपराध की गंभीरता की ओर बढ़ावा देता है। उदाहरण 1. एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पकड़ कर एक घर में बंद कर देता है जिससे वह व्यक्ति उस घर के अलावा कहीं भी नहीं जा पाता। यह किसी को गलत तरीके से बंद कर देने का अपराध है। 2. एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के घर के बाहर बंदूक लेकर खड़ा हो जाता है और उसे धमकाता है कि यदि वह घर के बाहर आएगा या आने का प्रयास करेगा तो वह उसे गोली मार देगा| यह भी गलत तरीके से किसी को एक स्थान पर बंद करने का अपराध है। दंड का प्रावधान अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस अपराध का दंड 3 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है।

किसी के घर में घुसना

क्या किसी के घर में घुसना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 141 से 162 अपराधिक नियत से किसी के घर में या जमीन में जबरदस्ती घुसना एक अपराध है। आपराधिक नियत से घर में घुसने का अर्थ है कि घर में मालिक को तंग करने, अपमानित करने या शारीरिक कष्ट पहुंचाने के उद्देश्य से घर में घुसना। घर में घुसने के लिए यदि घर की दीवार में छेद किया जाए या तोड़ा जाए या किसी और तरीके से घर को नुकसान पहुंचाया जाए तो यह अपराध और भी गंभीर हो जाता है| जैसे ताला तोड़कर दरबान को डरा कर धमकाकर घर में प्रवेश करना आदि। उदाहरण 1. एक चोर किसी के घर में चोरी करने के उद्देश्य से घुसता है। उसने अपराध करने के उद्देश्य से घर में घुसने का अपराध किया। 2. एक व्यक्ति किसी के घर में उस घर के मालिक को मारने के उद्देश्य से दरवाजा तोड़कर घुसता है। उस व्यक्ति ने अपराध करने के उद्देश्य से घर में घुसने का अपराध किया। दंड का प्रावधान अपराध का दंड घर में घुसने के आपराधिक उद्देश्य की गंभीरता के अनुसार आजीवन कारावास तक तथा जुर्माना हो सकता है।

रास्ता रोकना

क्या रास्ता रोकना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 339 व 341 के तहत यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को आने जाने से रोकता है तो वो रास्ता रोकने का अपराध करता है| आने-जाने का अर्थ उन लोगों से है जहां आने जाने का उसे अधिकार है। जहां जाने का अधिकार है वहां जाने से यदि कोई रोकता है तो वह आने जाने से रोकने का अपराध करता है। जैसे अपनी भूमि पर आना जाना, सार्वजनिक स्थल पर आना-जाना इत्यादि। दूसरों की भूमि पर या दूसरे के व्यक्तिगत रास्ते पर जाने का किसी को अधिकार नहीं है।  उदाहरण 1. राजू भाई खूंखार कुत्ता लेकर सार्वजनिक स्थान पर खड़ा हो जाता है और वह सुनील से कहता है कि यदि वह उस सार्वजनिक स्थान पर आएगा तो वह उसे खूंखार कुत्ते से कटवा देगा। राजू सुनील का रास्ता रोकने का अपराध करता है। 2. मोहम्मद के घर जाने का रास्ता शोएब के घर के सामने से होकर जाता है शोएब 20 वर्षों से अधिक समय से उस रास्ते से आता जाता है। एक दिन मोहम्मद उसे उस रास्ते से आने जाने से  रोकता है। मोहम्मद शोएब को आने जाने से रोकने का अपराध करता है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड के 1 महीने तक का कारावास तथा ₹500 तक का जुर्माना हो

अपराध है

क्या धमकी देना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 503 व 506 के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति या उस व्यक्ति के किसी प्रिय संबंधी कि शरीर, संपत्ति या इज्जत को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उसे डराता है या उससे कुछ काम करा लेता है तो वह धमकी देने का अपराध करता है। कुछ काम कर लेने का अर्थ है कि किसी को धमकी देकर ऐसा काम कराना जिसे करने के लिए वह बाध्य या मजबूर नहीं है, या धमकी देकर उसे कुछ काम करने से रोकना जिसे करने का उसे अधिकार है। यह बात उदाहरण से और स्पष्ट हो जाएगी। उदाहरण 1.सरकारी नोटिस लेकर एक स्पेक्टर राजू के घर गया।ओके राजू को नोटिस पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा। राजू ने नोटिस फेंक दिया और इंस्पेक्टर से कहा कि वह चुपचाप चला गया नहीं तो वह मार कर उसके हाथ पैर तोड़ देगा। राजू ने सेक्टर को धमकाने का प्राप्त किया। 2. राजू तथा सतीश का खेत के बंटवारे को लेकर झगड़ा चल रहा था। सतीश न्यायालय में बंटवारे का मुकदमा करना चाहता था। राजू ने कहा कि यदि वह मुकदमा करेगा तो वह सतीश का घर जला देगा। राजू ने पति की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का  अपराध किया। दंड का प्रावधान धमकी की गंभी

बल प्रयोग करना

 क्या बल प्रयोग करना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 350, 352 से 358 तक आपराधिक बल प्रयोग करने का अर्थ है कि कोई भी ऐसा कार्य किया जाना जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को डर, नुकसान या कष्ट हो। इस प्रकार के अपराध हर रोज हर जगह होते रहते हैं। बहुत से लोग तो जानते भी नहीं है कि इस प्रकार के कार्य अपराध होते हैं।  उदहारण 1. एक व्यक्ति नदी के किनारे एक बंधी  नाव पर बैठा है। दूसरा व्यक्ति जानबूझकर उस नाव की रस्सी खोल देता है, जैसे नाव नदी के बहाव से बहने लगती है। यहां पर नाव खोलने वाले व्यक्ति ने नाव पर बैठे हुए व्यक्ति पर आपराधिक बल प्रयोग करने का अपराध किया। 2. एक व्यक्ति घोड़े पर बैठा हुआ है दूसरा व्यक्ति शरारतन घोड़े को कसकर मारता है, जैसे घोड़ा तेजी से भागने लगता है। घोड़े पर बैठा व्यक्ति डर और साहम जाता है। 3. एक व्यक्ति शरारत में अपने कुत्ते को दूसरे व्यक्ति पर झपटने के लिए भड़काता है। वह व्यक्ति अपराधिक बल प्रयोग करने का अपराधी है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड अपराध की गंभीरता के अनुसार 3 महीने तक का कारावास या ₹500 जुर्माना या दोनों हो सकता है। यदि आपराधिक बल का प्रयोग किसी गंभीर अ

हमला करना

क्या हमला करना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 351 से 358 जरूरी नहीं है कि जब तक किसी को मारा पीटा ना जाए अपराध नहीं होता है। हाव भाव से ही किसी को डराना भी अपराध है। जैसे किसी की तरफ मुक्का घुमाते हुए चढ़ना, जिससे ऐसा लगे कि बस अब वह मारने वाला है, हमला करने का अपराध है। इस अपराध में यह जरूरी नहीं है कि किसी को नुकसान पहुंचाया ही जाए। धमकी मात्र ही इस अपराध के लिए पर्याप्त है, जैसे भरी हुई बंदूक किसी पर तानना। उदाहरण 1. एक व्यक्ति डंडा उठाते हुए दूसरे व्यक्ति से कहता है कि मैं अभी तुम्हें पीट दूंगा और  वह डंडा इस प्रकार तांनता है कि लगता है जैसे अभी मार देगा। इस प्रकार डंडा तानन भी हमला करने का अपराध है। 2. एक व्यक्ति बड़ा सा पत्थर उठाकर दूसरे व्यक्ति की तरफ दौड़ता है। लगता है जैसे अभी फेंक कर मार देगा। वह व्यक्ति हमला करने का अपराध करता है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 3 महीने तक का कारावास या ₹500 जुर्माना या दोनों हो सकता है। यदि गंभीर अपराध करने के लिए हमला किया जाता है तो दंड भी गंभीर होता है, जो 2 साल तक का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकता है।

Union of India vs Naveen Jindal

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 Landmark Case on Right to Freedom of Speech and Expression with respect to Right to hoist National Flag. Union of India vs Naveen Jindal(2004) 2 SCC 476. In this case Supreme Court held that right to unfurl the National Flag with dignity is a Fundamental Right of the citizen within the meaning of Article 19(1)(a) of the Indian Constitution. Right to Hoist or Unfurl the National Flag being an expression and manifestation of his allegiance and feelings and sentiments of pride for the nation. Bust the same is not an absolute right but subject to the reasonable restrictions within the ambit of Article 19(2) of Indian Constitution. The Emblems and Names (Prevention of Improper Use ) Act, 1950 and the Prevention of Insults to National Honour Act 1971 regulate the use of the National Flag. List of 100+  Landmark Cases  of Supreme Court India  

एसिड फेंक कर चोट पहुंचाना

क्या एसिड फेंक कर चोट पहुंचाना अपराध है भारतीय दंड संहिता की धारा 326- ए, 326- बी  के तहत  समाज में आजकल एसिड फेंक कर चोट पहुंचाने की घटनाएं बहुत होने लगी हैं। एसिड शरीर के जिस हिस्से पर पड़ता है वह हिस्सा जल जाता है और पूरी तरह से या आंशिक रूप से खराब हो जाता है या अपंग हो जाता है। अतः जो भी किसी के ऊपर एसिड फेंक कर चोट पहुंचाता है वह एसिड द्वारा गंभीर चोट पहुंचाने का अपराध करता है। एसिड फेंकना या फेंकने का प्रयास करना ही अपने आप में एक अपराध है चाहे एसिड उस पर पड़े या ना पड़े जिस पर फेंका गया है। उदाहरण 1. लता के सुंदरता पर मोहित होकर इकबाल उससे विवाह करना चाहता है परंतु लता उसका यह प्रस्ताव ठुकरा देती है। इकबाल गुस्से में आकर लता की सुंदरता बिगाड़ने के लिए उसके चेहरे पर एसिड फेंक देता है। जिससे लता का चेहरा पूरी तरह से झुलस जाता है। इकबाल एसिड द्वारा गंभीर चोट पहुंचाने का अपराधी है। 2. बबीता की सुंदरता बिगाड़ने के इरादे से मोहम्मद ने उस पर एसिड फेंका लेकिन बबीता बाल-बाल बच गई। मोहम्मद ने एसिड फेंकने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान एसिड से चोट पहुंचाने का दंड कम से कम 10 वर्ष से आज

चोट पहुंचाना

क्या चोट पहुंचाना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 319 से 335 तक साधारण जीवन में रोज ही मारपीट की घटनाएं होती रहती हैं। किसी को चोट पहुंचाना एक अपराध है। चोट पहुंचाने का अर्थ है किसी को शारीरिक कष्ट देना जैसे किसी को पीटना,  थप्पड़ मारना, बाल पकड़कर खींचना, डंडे से मारना, धारदार हथियार से मारना या पिस्तौल से चोट पहुंचाना आदि। चोट मामूली हो सकती है और गंभीर भी, हड्डी टूट जाना, आंख फूट जाना, अपंग हो जाना आदि गंभीर चोट के अंतर्गत आते हैं। चोट की गंभीरता के आधार पर ही अपराधी को सजा दी जाती है। लोग समझते हैं पुलिस को यह अधिकार है कि वह किसी को भी मारपीट सकती है जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यदि पुलिस वाला भी किसी को चोट पहुंचाता है या मारता पीटता है तो वह चोट पहुंचाने का अपराधी बनता है। उदाहरण 1. मालिक ने नौकर से कहा कि बाजार से सब्जी ले आ| नौकर ने मना कर दिया। मालिक ने क्रोध में आकर नौकर को थप्पड़ मार दिया| मालिक ने नौकर को चोट पहुंचाने का अपराध किया। 2. कुछ लड़कों ने एक लड़की के चेहरे पर तेजाब फेंक कर उसका चेहरा खराब कर दिया| उन लड़कों ने उस लड़की को गंभीर चोट पहुंचाने का अपराध किया। दंड क

दंगा फसाद तथा झगड़ा करना

क्या दंगा फसाद तथा झगड़ा करना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 141,143 से 148 तक, 153- ए जब 5 या 5 से अधिक लोग दंगा फसाद करने के उद्देश्य से इकट्ठे होते हैं तो यह अपराध होता है। इससे समाज में अशांति फैलती है। अपराध उस समय और भी गंभीर हो जाता है जब यह लोग खतरनाक हथियार रखते हैं। और तोड़फोड़ ,आगजनी ,मारपीट, लूटपाट तथा हत्या कर देते हैं। दंगा संप्रदायिक भी हो सकता है। किन्हीं दो गुटों में भी हो सकता है। सरकार तथा न्यायालय के किसी आदेश को लागू करने में बाधा डालना भी इस अपराध के अंतर्गत आता है। उदाहरण 1.सुरेंद्र अपने 5 साथियों के साथ एकत्रित होकर एक सार्वजनिक रास्ता रोककर खड़ा हो जाता है और लोगों को आने जाने नहीं देता। जो लोग आने जाने का प्रयास करते हैं उन्हें मारपीट कर भगा देता है| सुरेंद्र तथा उसके साथियों ने दंगा फसाद करने का अपराध किया है। 2. 5 लोग एक धार्मिक स्थान पर जाकर उस स्थान का अपमान करते हैं। उस धर्म के अनुयाई उत्तेजित हो जाते हैं तथा वे दूसरे धर्मों के लोगों पर आक्रमण कर देते हैं| वे पांचों लोग दंगा कराने के अपराधी है। दंड का प्रावधान अपराध की गंभीरता को देखते हुए अपराधी को

चोरी,डकैती या लूट से प्राप्त संपत्ति को रखना

क्या चोरी,डकैती या लूट से प्राप्त संपत्ति को रखना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 411 व  412 के तहत यदि कोई व्यक्ति चोरी डकैती तथा लूट से प्राप्त संपत्ति को जानबूझकर बुरी नियत से रखता है तो वह अपराध करता है। चोरी करने वाला व्यक्ति चोरी करने के बाद तुरंत चोरी का सामान बेचना चाहेगा या हटाना चाहेगा जिससे कमाल उसके पास ना मिले। अतः वह सामान सस्ते दाम पर बेच देता है। जो भी उस सामान को लेता है यह जानते हुए कि यह चोरी का माल है वह यह अपराध करता है। इसीलिए सामान लेने से पहले यह अवश्य जान लेना चाहिए कि वह सामान कहीं चोरी, डकैती व लूट का तो नहीं है। उदाहरण अकबर चोरी की घड़ी बीरबल को कम दामों में बेच देता है। बीरबल यह जानते हुए कि वह गाड़ी चोरी की है उसे खरीद लेता है। बीरबल ने चोरी का सामान खरीदने का अपराध किया। दंड का प्रावधान चोरी से प्राप्त संपत्ति रखने का दंड 3 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकता है। यदि रखी गई संपत्ति डकैती से प्राप्त की गई है तो दंड आजीवन कारावास तथा जुर्माना हो सकता है। यदि कोई लगातार चोरी की चीजें लेता है या रखता है यानी उसकी आदत या शौक है तो उसका भी द

डकैती

क्या डकैती अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 391,395 व 396 के तहत जब 5 या 5 से अधिक लोग किसी को सम्मिलित रूप से लूटते हैं तो वह डकैती कहलाती है। डकैती भी लूटने का अपराध है। अंतर सिर्फ इतना होता है कि यह अपराध 5 या 5 से अधिक लोग मिलकर करते हैं। उदाहरण 5 लोग लाठी डंडा और बंदूक लेकर एक व्यापारी से उसका सारा धन  व गहना लूट लेते हैं। उन पांचों लोगों ने डकैती का अपराध किया है। दंड का प्रावधान डकैती का दंड आजीवन कारावास तथा जुर्माना हो सकता है परंतु यदि डकैती के दौरान हत्या की गई है तो मृत्युदंड भी हो सकता है।

लूट

क्या  लूट अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 390 व 392 के तहत डरा धमका कर किसी से उसकी संपत्ति ले लेना लूट कहलाता है। डराने धमकाने का अर्थ है हत्या या चोट के लिए  भयभीत कर देना, जिसे डर कर कोई अपनी संपत्ति न चाहते हुए भी दे देता है। उदाहरण 1.सोनू ने एक सेठ से पिस्तौल दिखाकर कहा यदि उसने धरना दिया तो वह उसे जान से मार देगा। सेठ ने डर कर अपना धन सोनू को दे दिया। सोनू ने लूट का अपराध किया है। 2. एक व्यक्ति चाकू निकालकर एक बच्चे के गले पर लगा देता है और उस बच्चे के पिता से कहता है कि वह अपना सारा धन उसे दे दे नहीं तो वह उसके बच्चे को मार डालेगा। उस व्यक्ति में लूटने का अपराध किया। दंड का प्रावधान लूटने की अपराध की गंभीरता के अनुसार 14 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना हो सकता है।

चोरी

  क्या चोरी अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 378 से 382 तक यदि कोई व्यक्ति बेईमानी से किसी दूसरे व्यक्ति का सामान उसके कब्जे से ले लेता है तो उसे चोरी कहते हैं। यह काम जिसका सामान है उसकी इच्छा और आज्ञा के बिना किया जाता है परंतु बल का प्रयोग नहीं किया जाता है। सड़क पर पड़ी हुई वस्तु को ले लेना चोरी के अपराध के अंतर्गत नहीं आता। क्योंकि सड़क पर पड़ी वस्तु का कोई मालिक नहीं होता। सड़क पर गिरी वस्तु पाने पर उस व्यक्ति का नैतिक और विधिक कर्तव्य है कि वह उस वस्तु को निकट के पुलिस स्टेशन में जमा कर दें, जिससे उस वस्तु को उस व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास हो सके, जिसकी वह वस्तु है। उदाहरण 1. एक व्यक्ति किसी के घर जाता है। वहां पर रखी है घड़ी पर उसकी नियत खराब हो जाती है। वह उस घड़ी को ले लेता है। उस व्यक्ति ने घड़ी की चोरी का अपराध किया है। 2. मोहन महेश से उसकी पुस्तक मांगता है| महेश मना कर देता है। मोहन फिर भी उस पुस्तक को बिना अनुमति के उठा ले जाता है। मोहन ने महेश की पुस्तक चुराने का अपराध किया। दंड का प्रावधान चोरी के अपराध की गंभीरता के अनुसार 10 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना हो सकता

आत्महत्या करना

क्या आत्महत्या करना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 309 व  306 के तहत आत्महत्या का प्रयास करना एक अपराध है। जीवन ईश्वर की देन है। किसी को यह जीवन समाप्त करने का अधिकार नहीं है। चाहे वह अपना ही जीवन क्यों ना हो। संविधान द्वारा दिए गए प्राण व स्वतंत्रता के अधिकार में अपना जीवन समाप्त करने का अधिकार सम्मिलित नहीं है। आत्महत्या का प्रयास करने वाला यदि मर जाता है तो उसे कौन सजा दे सकता है, परंतु यदि वह बच जाता है तो वह आत्महत्या के प्रयास का दोषी होगा और उसे दंड मिलेगा। उदाहरण मुकेश अपने जीवन से तंग आकर मरने की दवा खा लेता है। उचित समय पर चिकित्सा के कारण वह बच जाता है। मुकेश आत्महत्या के प्रयास का अपराधी है। दंड का प्रावधान आत्महत्या के प्रयास का दंड 1 साल तक का कारावास और जुर्माना हो सकता है। परंतु यदि कोई व्यक्ति किसी को आत्महत्या करने के लिए  उकसाता है जिससे वह व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है तो  उकसाने वाले व्यक्ति को 10 साल तक का कारावास या जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है।

हत्या करना

 क्या हत्या करना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 300,302 व 307 भारतीय दंड संहिता की धारा 300,302 व 307 के तहत हत्या करना बहुत गंभीर अपराध है। जानबूझकर कोई भी ऐसा कार्य करना जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए जैसे जहर देना, गोली मारना, चाकू मारना, सांप से कटाना, पहाड़ी से धक्का दे देना आदि, हत्या का अपराध चलाता है। हत्या करने के उद्देश्य से यदि आक्रमण किया जाता है परंतु वह व्यक्ति जिस पर आक्रमण हुआ है बच जाता है तो आप मन करने वाला हत्या के प्रयास के अपराध का दोषी होगा। उदाहरण 1. इकबाल का झगड़ा शोएब से हो जाता है। इकबाल बंदूक निकाल कर शोएब को मार देता है। शोएब की मृत्यु हो जाती है| इकबाल शोएब के हत्या का आरोपी है। 2. सतीश जानता है कि अमर को बुरी खबर सुनने से दिल का दौरा पड़ जाता है। वह जानबूझकर अमर को जान से मारने की नियत से बुरी खबर सुना देता है जिससे अमर को दिल का दौरा पड़ता है उसकी मृत्यु हो जाती है। सतीश अमर की हत्या का अपराधी है। दंड का प्रावधान हत्या करने पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास दिया जा सकता है। हत्या के प्रयास का दंड 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना भी हो सकता है।

अपराध करने का षड्यंत्र करना

क्या अपराध करने का षड्यंत्र करना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 120- ए व 120 - बी भारतीय दंड संहिता की धारा 120- ए व 120 - बी  के तहत अपराध करने की योजना बनाना भी एक अपराध है। जब दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी अपराध को करने की योजना बनाते हैं या अपराध करने के साधन जुटा ते हैं तो उनका यह कार्य अपराध की श्रेणी में आ जाता है। वह कार्य जिसको करने की योजना बनाई जाती है वह या तो अवैध हो या यदि अवैध नहीं है तो उसे अवैध साधनों द्वारा करने या कराने पर सहमति होती है। अवैध कार्य करने की योजना बनाते समय वहां जितने लोग उपस्थित होते हैं सब इस अपराध के दोषी होते हैं हो सकता है की अपराध की योजना बनाते समय साथ में संलग्न व्यक्ति अपराध करने की नियत ना रखता हो फिर भी वह अपराधी की श्रेणी में आ जाता है। यह महत्वपूर्ण है कि अपराधिक षड्यंत्र के लिए कम से कम 2 लोगों का होना आवश्यक है। उदाहरण 1.आदिल और जीशान अकरम के घर बैठकर चोरी करने की योजना बनाते हैं। आदिल ,जीशान तथा अकरम तीनों आपराधिक षडयंत्र करने के दोषी होते हैं। 2. तेज और मायकल एक बम बनाने के आशा से विस्फोटक पदार्थ एकत्रित करते हैं। वे दोनों अपरा

अपराध के लिए उकसाना

क्या अपराध के लिए उकसाना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 107 के तहत अपराध करने के लिए दूसरे को दुर्भावना से उकसाना एक अपराध है। जिस व्यक्ति को अपराध करने के लिए उकसाया गया वह अपराध करें या ना करें दोनों परिस्थितियों में जिस व्यक्ति ने उकसाया वह उकसाने का अपराधी है। हालांकि उकसाने वाला स्वयं अपराध नहीं करता परंतु कानून अपराध करने के लिए उकसाने वाले व्यक्ति को उतना ही दोषी मानता है जितना अपराध करने वाले को। उदाहरण 1. जुनेद ने अकरम को उकसाया कि वह विनोद की हत्या कर दे। अकरम हत्या नहीं करता है। फिर भी जुनेद ने अकरम को विनोद की हत्या करने के लिए उकसाने का अपराध किया है। 2. राजू ने अजय को उकसाया कि वह शीला की हत्या कर दे। अजय शीला की हत्या कर देता है। राजू ने अजय को शीला की हत्या करने के लिए उकसाने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान दंड उस अपराध के अनुसार दिया जाएगा जिसे करने के लिए उठाया गया या जिसे किया गया।

राजद्रोह या बगावत

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क्या राजद्रोह या बगावत अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के तहत जब कोई व्यक्ति किसी भी तरीके से भारत सरकार के खिलाफ लोगों में घृणा पैदा करता है, या लोगों को भड़काता है या ऐसा करने का प्रयास करता है तो वह राजद्रोह का अपराधी कहलाता है। लोगों मैं राज्य के प्रति घृणा पैदा करने के लिए लिखित प्रचार, भाषण देकर या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल राजद्रोह या बगावत के अंतर्गत आता है। उदाहरण शाहरुख लोगों को अपने भाषण द्वारा तथा अपील छपवा कर भारत सरकार से बगावत करने के लिए उकसाताहै। शाहरुख राज विद्रोह का अपराधी। दंड का प्रावधान राजद्रोह के अपराधी को आजीवन कारावास तथा जुर्माना हो सकता है। Kanoon Ki Jankari Series | भारतीय कानून की जानकारी

राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ना

  क्या राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ना अपराध है भारतीय दंड संहिता की धारा 121 व 122  भारतीय दंड संहिता की धारा 121 व 122 के तहत राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ना या करने का प्रयास या ऐसे ही उद्देश्य से लोगों को प्रेरित करना और हथियारों को एकत्रित करना राज्य के विरुद्ध अपराध होता है। उदाहरण कुछ लोग पड़ोसी राज्य के बहकावे में आकर राज्य की कानून व्यवस्था को मानने से इंकार कर देते हैं। वे अपनी सेना बनाकर राज्य की पुलिस तथा सेना पर आक्रमण करते हैं। उस  सेना का हर सदस्य राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का अपराधी है। दंड का प्रावधान एक अपराध के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास दिया जा सकत है।

केवल नागरिकों के अधिकार

प्रश्न० अनुछेद 19 में निहित अधिकार किसके लिए है?  उ० केवल देश के नागरिकों के लिए। प्रश्न० क्या कंपनी या कारपोरेशन को यह अधिकार प्राप्त है ?  उ०  नहीं। प्रश्न० क्या कंपनी के शेयर फोल्डर को यह अधिकार प्राप्त है?  उ० हाँ। वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता?  19(1) के एवं 19(2)  प्रश्न० क्या यह अधिकार अपरिहार्य है?  उ० हाँ।  प्रश्न० क्या यह अधिकार संपूर्ण है?  उ० नहीं अनुच्छेद 19 (2)उचित प्रतिबंध लगाता है। प्रश्न० किस आधार पर प्रतिबंध लगाए जा सकते ?  उ० * राज्य की सुरक्षा। * भारत की प्रभु सत्ता एवं अखंडता  * विदेशी राज्यों के साथ मित्रता के संबंध * लोक व्यवस्था    * नैतिकता  * भ्रष्टाचार * मानहानि

अनुछेद 19 क्या से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल

 प्रश्न० अनुच्छेद 19 में कौन-कौन से स्वतंत्र निहित है?  उ० अनुच्छेद 19 के अंतर्गत निहित स्वतंत्रता का अधिकार निम्नलिखित 6 भागों में विभाजित है। 1) वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। 2) संघ की स्वतंत्रता। 3) सीमित एवं यूनियन बनाने की स्वतंत्रता। 4) भारत भर में आजादी से भ्रमण करने की स्वतंत्रता। 5) भारत के किसी भी भाग में रहने व बसने की स्वतंत्रता। 6) किसी भी व्यवसाय को करने की स्वतंत्रता।  प्रश्न ० क्या यह संपूर्ण स्वतंत्रता है?  उ०  नहीं यह स्वतंत्र दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता तथा राज्य के द्वारा प्रबंध प्रतिबंध है कोई भी देश आज के दौर में संपूर्ण अधिकार व्यक्ति नहीं दे सकता। प्रश्न० क्या राज्य को शक्ति प्राप्त है कि वह समाज के हित के लिए उचित प्रतिबंध लगा सकसक?  उ० जी हां या प्रतिबंध आरा 19(2) से19(5) मैं निहित है। प्रश्न० किस तरह के प्रतिबंध राज्य लगा सकता है?  उ० केवल उचित प्रतिबंध यह प्रतिबंध निरकुश नहीं होने चाहिए । इनका प्रयोग केवल धारा 19 (2)से (6)19 में निहित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए होना चाहिए। प्रश्न० धारा 19(1) के अंतर्गत दिए गए अधिकार पर प्रबंधित कौन लगा सकता है?  उ० इस पर

Sri Srinivasa Theatre vs Government of Tamil Nadu - Leading Case

Sri Srinivasa Theatre vs Government of Tamil Nadu Leading Case Law on Article 14 of Indian Constitution In Sri Srinivasa Theatre vs Government of Tamil Nadu which is an important judgment of Supreme Court of India delivered in 1992 in respect of Article 14 of Indian Constitution. Justice Jeevan Reddy in this case held that the two expressions 'equality before law' and 'equal protection of law' do not mean the same thing and suggest a more fundamental difference. Justice Reddy observed that the word 'law'  in the expression 'equality before law'  meant law in the general sense whereas the same word in the expression 'equal protection of law'  denoted specific laws. He further observed that 'equality before the law' is a dynamic concept having facets: one facet denoting the absence of any privileged class or person who was above the law and the other denoting the obligation of the state to bring about a more equal society as envisaged in th

जहरीले पदार्थ, ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटक पदार्थ के साथ लापरवाही करना

  क्या जहरीले पदार्थ, ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटक पदार्थ के साथ लापरवाही करना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 284,385 व 286   भारतीय दंड संहिता की धारा 284,385 व 286 के तहत यदि कोई व्यक्ति जहरीले पदार्थ, विस्फोटक पदार्थ या ज्वलनशील पदार्थ के साथ लापरवाही करता है जिसके कारण आसपास के लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाता है या पड़ सकता है तो यह एक अपराध है। ज्वलनशील पदार्थ तथा विस्फोटक पदार्थ में यदि गलती से आग लग जाए तो जान-माल का काफी नुकसान हो सकता है। जो कोई जहरीला पदार्थ,  विस्फोटक पदार्थ या ज्वलनशील पदार्थ रखता है उसका कर्तव्य है कि वह पूरी सावधानी के साथ उसे रखें जिससे किसी प्रकार का खतरा न उत्पन्न हो। मुकेश अपने घर में गन पाउडर( लाइसेंस के बाद) जो एक ज्वेलरी पदार्थ है, बहुत अधिक मात्रा में रखता है। इस पदार्थ को सुरक्षित तरीके से ना रखने के कारण उसमें आग लग जाती है, जिससे उसका घर तथा आसपास के घर जल जाते हैं। मुकेश ने ज्वलनशील पदार्थ रखने में सावधानी नहीं बरती, इसलिए वह अपराधी है। 2 कमल अपने घर में एक कीटनाशक पाउडर लेकर आता है और बिना सावधानी के रखता है। एक बच्चा उस पाउडर को चीनी क

सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालना

 क्या सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 186 तथा 353 के तहत सरकारी कर्मचारी या लोक सेवा के सरकारी काम में जानबूझकर बाधा डालना अपराध होता है। सरकारी कर्मचारी या लोक सेवा के सरकारी काम में जानबूझकर बाधा डालने के लिए यदि बल का प्रयोग किया जाता है या हमला किया जाता है  तो यह और गंभीर अपराध को जाता है। उदाहरण 1 एक अपराधी को पुलिस पकड़ने आई| अपराधी के कुछ हितैषियों ने पुलिस को ऐसा नहीं करने दिया। वे सारे हितैषी जिन्होंने  पुलिस को अपना काम नहीं करने दिया, सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालने के अपराधी हैं। 2 एक व्यापारी के ऑफिस में इनकम टैक्स के कुछ अधिकारी जांच करने के लिए आए। उस व्यापारी के कर्मचारियों ने उन अधिकारियों को अपना काम नहीं करने दिया और जबरदस्ती वहां से लौटा दिया। उस व्यापारी के कर्मचारियों ने इनकम टैक्स अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने अपराध किया। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 3 महीने तक का कारावास, 500 रुपए जुर्माना या दोनों को सकता है। यदि सरकारी कर्मचारी पर बल का प्रयोग किया जाता है या हमला किया जाता है तो अपराध का दंड 2 वर्ष

झूठी गवाही देना

क्या  झूठी गवाही देना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 191 से 195 के तहत झूठी गवाही देना तथा सबूत के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेज या तत्वों को परिवर्तित करना या नष्ट करना एक अपराध है। झूठी गवाही एक निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से फसाने के उद्देश्य से दी जाती है एक अपराधी को निर्दोष सिद्ध करने के लिए दी जाती है। यह गवाही किसी न्यायालय में या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया के दौरान दी जाती हैं। झूठी गवाही देने वाले को पता होता है कि वह झूठ बोल रहा है। उदाहरण दीपक न्यायालय में शपथ लेकर यह गवाही देता  है  कि कमल ने सुरेश को एक हजार रुपए दिए हैं, जबकि उसे पता है कि यह सत्य नहीं है। दीपक ने झूठी गवाही देने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 10 साल तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है। यदि किसी निर्दोष व्यक्ति ने झूठी गवाही या झूठे दस्तावेज के कारण मृत्युदंड दिया गया हो और फांसी हो चुकी हो तब इस अपराध का दंड भी मृत्युदंड होगा।

अपराधी को छिपाना या शरण देना

क्या अपराधी को छिपाना या शरण देना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 212 व 216 के तहत यदि किसी व्यक्ति ने कोई अपराध किया हो तो यह जानते हुए कि वह अपराधी है उसको अपने घर में छिपाना या शरण देना एक अपराध है। सरकारी कैद से भागे हुए अपराधी को जानबूझकर छिपाना या शरण देना भी इस अपराध के अंतर्गत आता है। उदाहरण आदिल ने अकरम की हत्या कर दी। इकबाल ने आदिल को अपने घर में रुकने की जगह दे दी। इकबाल यह जानता है कि आदिल ने अकरम की हत्या की है। इकबाल ने आदिल को अपने घर में छुपाने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान छिपाए गए अपराधी के अपराध की गंभीरता के अनुसार दंड होता है। यदि 5 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है। यदि कोई ऐसे अपराधी को जानबूझकर  शरण देता है या छुपाता है जो सरकारी कैद से भागा है तो यह अपराध और अधिक गंभीर हो जाता है। और भागे हुए अपराधी के अपराध की गंभीरता के अनुसार 7 वर्ष तक का कठोर कारावास तथा जुर्माना हो सकता है। यदि छुपाया गया अपराधी लुटेरा या डकैत है तो दंड 7 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है।

अफवाह फैलाना

 क्या अफवाह फैलाना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 505 के तहत अफवाह फैलाने का अर्थ है झूठी खबर फैलाना| यदि अफवाह किसी वर्ग या समुदाय विशेष के लोगों को भड़काने या डराने के उद्देश्य से फैलाई जाती है ताकि वे लोग गुस्से में कोई अपराध करें या सेना में विद्रोह फैलाने के उद्देश्य से अफवाह फैलाई जाती है, तो यह अफवाह फैलाने का अपराध है, परंतु यदि अफवाह फैलाने वाला व्यक्ति अपने कथन को सच मानकर कहता है, या उसके पास उस कथन को सच मानने का उचित कारण है तो यह अपराध नहीं होगा| उदाहरण इम्तियाज ने एक विशेष समुदाय को जानबूझकर गलत खबर दी कि पास के गांव में  उस समुदाय के धार्मिक स्थल को दूसरे समुदाय के लोगों ने क्षति पहुंचाई है| यह सुनकर उस विशेष समुदाय के लोग गुस्सा हो गए और गुस्से में आकर दूसरे समुदाय के लोगों को मारना पीटना शुरू कर दिया| इम्तियाज ने अफवाह फैलाने का अपराध किया| दंड का प्रावधान अफवाह फैलाने का दंड 3 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों को सकता है| धर्मस्थल के संबंध में अफवाह फैलाने का दंड 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना हो सकता है|

अनुछेद 18 क्या से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल

प्रश्न० अनुछेद 18 क्या है?  उ० यह अनुछेद निम्नलिखित प्रतिबंध लागू करता है। (1) सैनिक अथवा शैक्षिक उपाधियों के अलावा राज्य नागरिकों को कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा। (2) नागरिक विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा। (3) राष्ट्रपति की सहमति के बिना वेदर नागरिक जो राज्य के किसी लाभ या ट्रस्ट के पद पर आसीन है किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा। (4) गैर नागरिक राज्य के अंतर्गत किसी लाभ पद पर है राष्ट्रपति की अनुमति बिना किसी विदेशी राज्य के कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेंगे। प्रश्न० उपाधि क्या है?   उ० उपाधि वह चीज है जो किसी व्यक्ति के नाम के साथ उसे सम्मान देने के लिए लगाई जाती है। प्रश्न० संविधान के उपाधि क्यों समाप्त की?  उ०  उपाधियां चुकी लोगों के आवश्यक अंतर पैदा करती है यह सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय के अनुरूप नहीं है इसीलिए इन्हें समाप्त कर दिया गया। प्रश्न० उपाधि कौन नहीं दे सकता?  उ० राज्य। प्रश्न० क्या भारत रत्न या पद विभूषण को उपाधि के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है?  उ० नहीं यह शैक्षिक उत्कर्षता के लिए होता है । इसे एवार्ड के द्वारा राज्य नागरिकों के विभि

आस-पास रहने वालों के लिए असुविधा उत्पन्न करना

क्या आस-पास रहने वालों के लिए असुविधा उत्पन्न करना अपराध है? भारतीय दंड संहिता की धारा 268 के तहत यदि कोई ऐसा काम करता है जो आसपास रहने वाले व्यक्तियों को कष्ट या क्षति पहुंचाता हो, या कोई अवैध कार्य करता है जिससे आसपास रहने वाले लोगों में रोष या नाराजगी पैदा होती हो जैसे हवा या प्रकाश दूषित करना, जहरीली गैस फलाना, रात दिन जोर-जोर से रेडियो बजाना, जुए का अड्डा चलाना इत्यादि, तो वह कार्य इस अपराध के अंतर्गत आता है। उदाहरण 1 कमल ने एक सार्वजनिक मार्ग पर छोटा सा बगीचा लगा लिया जिससे लोगों को आने-जाने की असुविधा होने लगी। कमल ने असुविधा उत्पन्न करने का अपराध किया। 2 मोहन ने सार्वजनिक स्थल पर एक जुआ घर बनाया, जिसमें पैसा देकर कोई भी व्यक्ति जा सकता था और जुआ खेल सकता था| मोहन ने वातावरण दूषित कर दूसरों के लिए असुविधा उत्पन्न करने का अपराध किया। 3 इकबाल लाउडस्पीकर लगाकर रात में गाना बजाना करता है। आसपास के लोग सो के कारण रात भर सो नहीं सके| इकबाल ने और सुविधा उत्पन्न करने का अपराध किया। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 200 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

नशीला पदार्थ, ड्रग सेवन करना, रखना, खरीदना- बेचना

 नशीला पदार्थ, ड्रग सेवन करना, रखना, खरीदना- बेचना नारकोटिक ड्रग और साइकॉट्रॉपिक पदार्थ अधिनियम की धारा 15,16,17,18,व 27 अफीम, चरस , कोकीन, एल.एस.डी., हशीश, मरीजुआना आदि नशीले पदार्थों को खाना, रखना तथा बेचना एक गंभीर अपराध है। इस प्रकार के नशीले पदार्थ खाने वाला इसका आदी हो जाता है और उसके लिए इसके बगैर रहना मुश्किल हो जाता है। नशा करने वाले का शरीर कमजोर हो जाता है और वह मृत्यु की तरफ बहुत तेजी से बढ़ने लगता है। यदि कोई बगैर लाइसेंस के रस का उत्पादन करता है, रखता है, खरीदता बेचता है या कहीं ले जाता है तो वह इस अपराध के अंतर्गत दंडित किया जाएगा। उदाहरण इब्राहिम तथा मनोज चरस पीते हुए पकड़े गए। वह दोनों ड्रग सेवन का अपराध करते हैं। दंड का प्रावधान ड्रग सेवन के अपराध का दंड 1 वर्ष तक का कठोर कारावास या 20 हजार तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। ड्रग रखने, खरीदने- बेचने  या ले जाने के अपराध की गंभीरता नशीले पदार्थ की मात्रा के अनुसार तय की जाती है। एक  दंड कम से कम 10 वर्ष तथा अधिक से अधिक 20 वर्ष का कठोर कारावास और एक लाख से दो लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

हथियार रखना

क्या  हथियार रखना अपराध है? आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 4,7 व 25  आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 4,7 व 25 के तहत खतरनाक हथियार रखना वर्जित है। पिस्तौल ,गोला-बारूद, चाकू, तलवार, कटार, भाला ,कृपाण, खुखरी तथा अन्य धारदार हथियार जिसके ब्लड की लंबाई 9 इंच से अधिक हो और चौड़ाई 2 इंच से अधिक हो, बिना किसी सरकारी अनुमति के रखना एक गंभीर अपराध है। इस प्रकार के हथियार जिला अधिकारी की अनुमति से ही रखे जा सकते हैं| या अनुमति पत्र लाइसेंस कहलाता है। इन हथियारों को रखना धारण करना बनाना बेचना या इन हथियारों की मरम्मत तथा जांच करना इस अपराध के अंतर्गत आता है और दंडनीय किए हैं। घरेलू इस्तेमाल का चाकू इन हथियारों में नहीं आता। खेती के उपकरण वैज्ञानिक तथा औद्योगिक उद्देश्य के लिए उपकरण भी इस अपराध की परिधि में नहीं आते हैं। उदाहरण 1- अशरफ बिना लाइसेंस एक पिस्तौल रखता है। अशरफ ने गैरकानूनी पिस्तौल रखने का अपराध किया। 2-  अशरफ की जेब में चाकू पाया गया, जिसके ब्लड की लंबाई 9.5 इंच, चौड़ाई 2.5 इंच पाई गई। अशरफ ने गैरकानूनी हथियार रखने का अपराध किया। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड कम से कम 5 वर्ष और अधिक से अधिक 10

अनुछेद 17 से जुड़े 15 महत्वपूर्ण सवाल

  अस्पृश्यता उन्मूलन (अनुछेद 17)  प्रश्न० यह अनुछेद 17 क्या कहलाता है?  उ० यह अस्पृश्यता को समाप्त करता है। प्रश्न० क्या संविधान में अस्पृश्यता की व्याख्या की गई है?  उ० नहीं। प्रश्न ०संसद ने अस्पृश्यता उन्मूलन से संबंधित सबसे पहले कौन सा कानून बनाया?  उ०  अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम 1995। प्रश्न० इस कानून में कब संशोधन किया?   उ० 1976 मैं । प्रश्न० नए कानून का क्या नाम है?  उ० असैनिक अधिकारियों की सुरक्षा अधिनियम 1955। प्रश्न० क्या अस्पृश्यता के आधार पर भेदभाव करना अपराध है?  उ० हाँ । प्रश्न० किसको अस्पृश्यता से संबंधित अपराध कहा जाता है?  उ०  किसी व्यक्ति को अस्पताल, शैक्षणिक स्थान, डिस्पेंसरी आदि में आने से रोक लगा दी जाए। किसी सार्वजनिक पूजा स्थल पर पूजा करने पर पाबंदी लगा दी जाए। किसी भी सार्वजनिक स्थल जैसे दुकान, होटल, पानी का नल, टैंक, सड़क, शमशान, खेलने का मैदान आदि के इस्तेमाल पर रोक लगा देना। प्रश्न० 1976 के कानून में अपराध क्या है?  उ०  किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति का छुआछूत के आधार पर अपमान करना। छुआछूत को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देना। छुआछूत को धार्मिक ऐतिहास

अशोक कुमार बनाम बिहार राज्य में उच्चतम न्यायालय ने क्या समाप्त किया

 केवल उच्चतम न्यायालय को विवाद सुलझाने की शक्ति प्रश्न० सरकार के किमी लेयर को आरक्षण में शामिल नहीं करने पर कहा शिकायत की जा सकती है?  उ०  उच्चतम न्यायालय। प्रश्न० अशोक कुमार बनाम बिहार राज्य में उच्चतम न्यायालय ने क्या समाप्त किया?  उ० उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश एवं बिहार सरकारों द्वारा आर्थिक मापदंड द्वारा पिछले वर्ग की किसी  लेयर को रोजगार आरक्षण से दूर रखने के तरीकों को खारिज कर दिया| न्यायालय ने कहा यह तरीका अनुच्छेद 14 तथा 16(4) का उल्लंघन करता है और मंडल आयोग के केस में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून का भी उल्लंघन करते हैं। प्रश्न ०उच्चतम न्यायालय ने मंडल आयोग में lAS,lPS के बच्चों से संबंधित क्या निर्णय लिया है?  उ०  यदि कोई पिछड़े वर्ग का व्यक्ति lAS, IPS बन जाता है तो वह अपने बच्चों को लिए आरक्षण नहीं ले सकता।

Bijoe Emmanuel vs State of Kerala - Landmark Case

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Bijoe Emmanuel vs State of Kerala - Landmark Case / Leading Case popularly known as National Anthem Case decided by Supreme Court of India in 1986. Landmark  Judgment of Bijoe Emmanuel vs State of Kerala Case Summary (1986 Supreme Court Decision): In this case three children belonging to Jehovah's witnesses were expelled from the school for refusing to sing the National Anthem during school prayer. The circular issued by the Director of Instructions, Kerala had made it obligatory for students in the schools to sing the National Anthem. The Children in this case stood up respectfully when the National Anthem was being sung at their school but they did not join in singing the National Anthem. They refused to sing the National Anthem as according to them it was against their religious faith which does not  permit them to join in any rituals except  if be in their prayer to Jehovah, their God. Expulsion of children from the school was being challenged in  Kerala High Court which uphe

सुप्रीम कोर्ट के 100 ऐतिहासिक फैसले | 100 Landmark Cases of Supreme Court in Hindi

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 ऐतिहासिक निर्णय -  सुप्रीम कोर्ट के 100 ऐतिहासिक फैसले जिन्हें जो सभी भारतीयों को पता होना चाहिए   यदि आप भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णयों की तलाश कर रहे हैं तो आप सही जगह पर आये हैं।  यह पृष्ठ समय के साथ बढ़ता जाएगा क्योंकि मैं भारत के ऐतिहासिक निर्णयों को शामिल करूंगा जिन्होंने अरबों से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। यहां दिए गए मामलों की सूची और नाम किसी विशेष क्रम में नहीं हैं और आकस्मिक तरीके से सूचीबद्ध किए गए हैं। मैं विशेष निर्णय के उद्धरण और महत्व के साथ मील का पत्थर या प्रमुख मामलों का नाम सूचीबद्ध करूंगा। 100 landmark judgements of Supreme Court of India भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 100 ऐतिहासिक मामलों की सूची : केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (केशवानंद भारती केस) - सुप्रीम कोर्ट के 13 जजों की बेंच का फैसला जिसने बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन या एसेंशियल फीचर थ्योरी कोप्रतिपादित किया। इस मामले में गोलक नाथ केस को खारिज कर दिया गया और बेंच ने बहुमत से कहा कि संसद भारतीय संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है लेकिन यह बुनियादी ढांचे को नष

जाली स्टांप बनाना, बेचना

 जाली स्टांप  बनाना, बेचना भारतीय दंड संहिता की धारा 255 से 263- ए  सरकार द्वारा विभिन्न मूल्यों में स्टांप पर जाते हैं। जिनका प्रयोग बहुत से सरकारी कार्यों में होता है। इंस्टॉल को बेचने से जो पैसा एकत्रित होता है वह राजकीय कोष में जाता है। यदि कोई इन सरकारी राजस्व स्टांपों की नकल करके उसी तरह का स्टांप छपता है या छापने में सहयोग करता है या असली स्टांप में कोई परिवर्तन करता है, एक अत्यंत गंभीर अपराध करता है। इस अपराध से सरकारी राजकोष को नुकसान पहुंचता है। जाली डांस टेंपो से संबंधित अपराध में जाली स्टांप छापना, रखना, बेचना, जाली स्टांप छापने के लिए उपकरण या सामग्री रखना तथा असली स्टांप में परिवर्तन करना, एक बार प्रयोग किए जा चुके स्टांप का दोबारा प्रयोग करना इत्यादि आता है। यह सब दंडनीय अपराध है। उदाहरण जुनेद जाली सरकारी स्टांस्टांपों को  छाप कर भेजता है। लोग उन्हें असली सरकारी स्टांप समझकर खरीदते हैं। जुनेद जाली सरकारी स्टांप बनाने का तथा बेचने का अपराध करता है। दंड का प्रावधान जाली स्टांप बनाने के अपराध का दर्द आजीवन कारावास, 10 वर्ष तक का कारावास, तथा जुर्माना भी हो सकता है। नकली डाक

जाली रुपए छापना तथा रखना

क्या जाली रुपए छापना तथा रखना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता धारा 489- ए, 489- बी, 489- सी   के तहत जाली नोट या रुपया छापना तथा रखना एक अपराध है। सरकार स्वयं रुपए छपती है, जिसमें विशेष पहचान होती है, जिससे कोई और उसकी नकल नहीं कर सकता। सरकार द्वारा छापे गए रुपए  ही असली होते हैं। जाली रुपए छापना एक बहुत गंभीर अपराध है। इस अपराध से देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। जाली रुपए छापने और जाली रुपए रखना अलग-अलग अपराध है। कोई व्यक्ति जाली रुपए छपता नहीं है, लेकिन जाली रुपए रखता है या चलाता है। वह यह जानते हुए कि वह रुपया जारी है उन्हें चलाने के उद्देश्य से रखता है या जाली रुपए चलाता है, वह व्यक्ति जाली रुपए रखने का अपराध करता है। उदाहरण 1 जुनैद जाली नोट छापने की मशीन बनाता है  100 रुपए के जाली नोट छाप कर बाजार में चलाता है। जुनेद जाली नोट छापने का अपराधी है। 2 चुनर जाली रुपए लेकर बाजार में सामान खरीदने जाता है। जुनैद ने जाली  रुपए चलाने का अपराध किया। दंड का प्रावधान जाली रुपए छापने की अपराध का दंड आजीवन कारावास तथा जुर्माना हो सकता है। जाली रुपए रखने या चलाने का दंड 10 वर्ष पक्का काराव

लापरवाही से गाड़ी चलाना

 लापरवाही से गाड़ी चलाना भारतीय दंड संहिता की धारा 279 के तहत यदि कोई लापरवाही से सार्वजनिक रास्ते पर गाड़ी चलाता है, जिससे दूसरे लोगों के जानमाल को खतरा हो सकता है या किसी की शारीरिक क्षति होती है या मृत्यु हो जाती है तो वह व्यक्ति लापरवाही से गाड़ी चलाने का अपराधी है, परंतु यदि गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति जानबूझकर किसी पर गाड़ी चढ़ा देता है जिससे उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो यह अपराध मृत्यु का अपराध हो जाता है। उदाहरण मुकेश अपने दोस्त से बात करते हुए गाड़ी चला रहा था। बातों बातों में और सावधानी हो गई। उसकी कार पटरी पर सोए हुए 3 लोगों के ऊपर चढ़ गई। महेश लापरवाही से गाड़ी चलाने का अपराधी है। दंड का प्रावधान इस अपराध का दंड 6 महीने तक का कारावास या ₹1000 तक का जुर्माना या दोनों को सकता है। परंतु यदि गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति जानबूझकर किसी पर गाड़ी चढ़ा देता है जिससे उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो अपराध की सजा आजीवन कारावास या मृत्यु दंड होगी।

यातायात नियमों के विरुद्ध अपराध

  यातायात नियमों के विरुद्ध अपराध मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 102,177,181,184 व 196  ट्रैफिक नियमों का पालन न  करना लाल बत्ती पर गाड़ी न रोकना, गति सीमा से अधिक तेज चलाना, सीट बेल्ट न लगाना, लाइसेंस साथ लेकर न चलना, यानी लाइसेंस होते हुए भी न दिखा सकना तथा गाड़ी चलाते समय गाना बजाना अपराध  है। दंड का प्रावधान पहली बार नियम तोड़ने पर ₹100 का जुर्माना,  दूसरी बार ऐसा होने पर ₹300 का जुर्माना हो सकता है। गति सीमा से अधिक तेज चलाने पर ₹1000 का जुर्माना होगा। खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाना इस प्रकार गाड़ी चलाना जिससे दुर्घटना होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है या दुर्घटना हो जाती है, खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाने का  अपराध है। दंड का प्रावधान पहली बार यह अपराध करने पर 6 महीने तक का कारावास या ₹1000 का जुर्माना या दोनों हो सकता है। दूसरी बार या अधिक बार या अपराध करने पर 2 साल तक का कारावास या ₹2000 जुर्माना या दोनों हो सकता है।

अपराध करने का प्रयास करना

  क्या अपराध करने का प्रयास करना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता धारा 511 के तहत अपराध करने का प्रयास भी एक अपराध है। अपराध करने के प्रयास से अर्थ है कि अपराध करने के उद्देश्य से उस अपराध को करने की दिशा में कोई कार्य करना। यह धारा सिर्फ  उन अपराधों के प्रयास पर लागू होती है जो भारतीय दंड संहिता द्वारा दंडनीय है और जिनका जन्म से मृत्यु दंड या सिर्फ जुर्माना नहीं है। जानिए जिन अपराधों के लिए सिर्फ मृत्यु दर या फिर जुर्माना होता है। उन अपराधों के प्रयास पर या धारा नहीं लागू होती। उदाहरण जुनेद गहनों की चोरी करने के उद्देश्य से एक बक्सा तोड़ता है। चोरी करने से पहले ही वह पकड़ा जाता है। क्योंकि उसने बक्सा तोड़ा यानी चोरी करने की दिशा में कुछ कार्य किया, इसलिए जुने चोरी के प्रयास का  अपराधी है। अकरम ने दिनेश की जेब से पैसा चुराने की नियत से हाथ डाला। दिनेश की जेब में उसे कुछ नहीं मिला परंतु अकरम ने चोरी करने के उद्देश्य से दिनेश की जेब में हाथ डाला यानी चोरी करने की दिशा में कुछ कार्य किया इसलिए गब्बर चोरी के प्रयास का  अपराधी है। दंड का प्रावधान यदि किसी अपराध के प्रयास का दंड भारतीय दंड संहित

बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना

क्या बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना अपराध है ? बिना ड्राइविंग लाइसेंस के मोटरसाइकिल, स्कूटर, मोपेड ,कार, ट्रक, बस आदि चलाना अपराध है। सरकार ने गाड़ी चलाने के लिए उम्र भी तय की है। 16 साल से कम  व्यक्ति को कोई गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं है। 16 वर्ष की आयु हो जाने के बाद बिना गियर की गाड़ी ड्राइविंग लाइसेंस लेने के बाद चलाने की आज्ञा है। गियर वाली गाड़ी चलाने का लाइसेंस 18 वर्ष पूरा होने पर दिया जाता है। यह लाइसेंस आर.टी.ओ. द्वारा दिया जाता है। दंड का प्रावधान बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने की अपराध का दंड 3 महीने का कारावास या ₹500 जुर्माना या दोनों हो सकता है।

गाड़ी चलाते समय मोबाइल से बात करना

 क्या गाड़ी चलाते समय मोबाइल से बात करना अपराध है ? गाड़ी चलाते समय ध्यान सिर्फ गाड़ी चलाने पर होना चाहिए अन्यथा दुर्घटना हो सकती है। इसीलिए गाड़ी चलाते समय मोबाइल से बात करना मना है और यदि कोई ऐसा करता है तो उसे दंडित किया जाएगा। दंड का प्रावधान गाड़ी चलाते समय यदि कोई व्यक्ति मोबाइल से बात करता पाया जाता है तो उसका दंड 1 हजार तक का जुर्माना हो सकता है।

कंप्यूटर हैक करना

 क्या कंप्यूटर हैक करना अपराध है  आई.टी.एक्ट 2000 की धारा 66 आई.टी.एक्ट 2000 की धारा 66 के तहत यदि कोई गलत नियत से किसी के कंप्यूटर सिस्टम से या कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़ करके उसके अंदर रखी जानकारियां वह आंकड़े आदि चुराता है। वायरस द्वारा प्रोग्राम तथा आंकड़ों को नष्ट करता है नुकसान पहुंचाता है या परिवर्तित करता है तो वह कंप्यूटर हैक करने का अपराधी होता है। उदाहरण इकबाल ने मोहन के कंप्यूटर से गुप्त जानकारियां चुरा कर मोहन के प्रतिद्वंदी को बेच दी इकबाल ने कंप्यूटर हैक करने का अपराध किया है। 2 मोहन के व्यापार को नुकसान पहुंचाने के लिए इकबाल ने उसके कंप्यूटर सिस्टम को एक वायरस द्वारा खराब कर दिया, जिससे मोहन का बहुत नुकसान हो सकता है एकबाल ने मोहन का कंप्यूटर हैक करने का अपराध किया है। दंड का प्रावधान 3 वर्ष तक का कारावास या  5 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों।

अश्लील किताबें बेचना तथा अश्लीलता का प्रदर्शन करना

  क्या अश्लील किताबें बेचना तथा अश्लीलता का प्रदर्शन करना अपराध है ?  भारतीय दंड संहिता की धारा 292, 293 व  294  भारतीय दंड संहिता की धारा 292, 293 व  294 के तहत अश्लीलता का प्रदर्शन एक अपराध है।अश्लील किताबें,पोस्टर, चित्र या किसी अन्य माध्यम से गंदी तथा अभद्र सामग्री बेचना,खरीदना,बांटना,प्रदर्शित करना या ऐसा करने का प्रयास करना एक अपराध है। सार्वजनिक स्थान पर यदि कोई अश्लील कार्य करता है जैसे- गंदे गाने गाना ,सेक्स करना,गंदे इशारे करना तो वह इस अपराध के अंतर्गत आता है। उदाहरण 1 अहमद एक लड़की को देखकर सिटी बजाता है तथा अश्लील इशारे करता है। अहमद अश्लीलता के प्रदर्शन का अपराधी है। 2 एक व्यक्ति अपने सारे कपड़े उतार कर नग्न अवस्था में सड़क पर घूमता है। वह व्यक्ति अश्लीलता के प्रदर्शन का अपराधी है। दंड का प्रावधान इसका दंड छे महीने तक का कारावास जुर्माना या दोनों हो सकता है। यदि अश्लील किताबें 20 वर्ष से कम आयु के लोगों को बेची जाती है या प्रदर्शित की जाती है तो 3 वर्ष तक का कारावास या 2000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। यदि अपराधी यह अपराध दोबारा करता है तो उसे 7 वर्ष की सजा तथ

Chiranjit Lal Chaudhary vs Union of India - Leading Case on Right to Equality & Reasonable Classification

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Chiranjit Lal Chowudhury vs Union of India -  Leading Case on Right to Equality & Reasonable Classification Chiranjit Lal Chaudhary v. Union of India, Case Citation: AIR 1951 SC 41 In this case due to mismanagement in Sholapur Spinning and Weaving Company Limited the management threatened to shut down the mill. At that time, Government of India passed the legislation named Sholapur Spinning  and Weaving Co. (Emergency Provision) Act, 1950, empowering the government of India to take over the control and management of the company and its properties by appointing their own directors. This act was challenged by the shareholder of the company, Chiranjit Singh Chaudhary, on the ground that a single company and its shareholder was being denied equality before the law, because the Act treated him differently vis a vis other companies and their shareholders in India. It was pointed out that the law in the case had selected one particular company and its shareholders and had taken away f

Fundamental Rights vs DPSP Landmark Judgments of Supreme Court of India

In Indian Constitution part 3 is about Fundamental Rights which are justiciable in the Supreme Court as well as in High Courts on the other side part 4 of the Constitution is about directive principles of state policy which are fundamental for the governance of the country, with the ideals which state has to achieve in future.  In last more than 7 decades, court has faced many times, the conflict between fundamental rights vs DPSP. As parliament legislates to achieve the goal of Directive Principle and to do so sometime fundamental rights are violated. Which results in challenge in Supreme Court as fundamental rights when violated, one can approach the constitutional courts. Various judgments on this issue have been delivered by the Supreme Court of India. In initial days of our republic, Supreme Court of India while adjudicating gave primacy to Fundamental rights. Specially in initial few decades right to property was one most contentious issue between legislature and constitutional c

संविधान(77 वं संशोधन) अधिनियम 1995

प्रश्न ०सरकार ने यह संशोधन क्यों किया?  उ०  यह संशोधन सरकार ने मंडल कमीशन के निर्णय से उत्पन्न कुछ बाधाओं को दूर हटाने के लिए किया है। उच्चतम न्यायालय ने नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण नहीं दिया है। इस संशोधन ने अनुच्छेद 16 में नई धारा(4_क) को जोड़ा जो कहती है इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को कोई ऐसी विधि बनाने से निवारित नहीं करेगी  जो नौकरियों में किसी अनुसूचित/ जाति जनजाति वर्ग या वर्ग या वर्गों को प्रोन्नति देती हो। इसका मतलब है कि अनुसूचित जाति/ जनजाति को सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति मिलती रहेगी (1) सरकार( राज एवं केंद्र) एक अस्थाई कानूनी ढांचा बनाएगी जो आरक्षण से संबंधित शिकायत सुनेगा | जैसे गलत वर्ग का आरक्षण सूची में शामिल होना या सही वर्ग का शामिल नहीं होना । (2) सरकार के ऊपर इसकी सलाह साधारण्त : मान्य होगी (3) 4 महीने के भीतर सरकार तरीका तय करेगी जिसके द्वारा पिछड़े वर्ग मैं सामाजिक तौर से उचित लोगों को आरक्षण के पोश्र से हटाया जाए। (4) जिन राज्यों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण पहले से मौजूद हैं वह कायम रहेगा ।