झूठी गवाही देना

क्या  झूठी गवाही देना अपराध है ?

भारतीय दंड संहिता की धारा 191 से 195 के तहत झूठी गवाही देना तथा सबूत के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेज या तत्वों को परिवर्तित करना या नष्ट करना एक अपराध है। झूठी गवाही एक निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से फसाने के उद्देश्य से दी जाती है एक अपराधी को निर्दोष सिद्ध करने के लिए दी जाती है। यह गवाही किसी न्यायालय में या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया के दौरान दी जाती हैं। झूठी गवाही देने वाले को पता होता है कि वह झूठ बोल रहा है।

उदाहरण

दीपक न्यायालय में शपथ लेकर यह गवाही देता  है  कि कमल ने सुरेश को एक हजार रुपए दिए हैं, जबकि उसे पता है कि यह सत्य नहीं है। दीपक ने झूठी गवाही देने का अपराध किया है।

दंड का प्रावधान

इस अपराध का दंड 10 साल तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है।

यदि किसी निर्दोष व्यक्ति ने झूठी गवाही या झूठे दस्तावेज के कारण मृत्युदंड दिया गया हो और फांसी हो चुकी हो तब इस अपराध का दंड भी मृत्युदंड होगा।

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