Section 84 The Army Act, 1950

 

Section 84 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 84 The Army Act, 1950  :Punishment of officers, junior commissioned officers and warrant officers by area commanders and others. An officer having power not less than an area commander or an equivalent commander or an officer  to convene a general court- martial or such other officer as is, with the consent of the Central Government, specified by 1[ the Chief of the Army Staff]

1. Subs. by Act 19 of 1955, s. 2 and Sch., for" the Commander- in- Chief". 2 Omitted by Act 37 of 1992, s. 4. 3 Omitted by s. 5, ibid. 4 Subs. by s. 5, ibid. may, in the prescribed manner, proceed against an officer below the rank of lieutenant- colonel, a junior commissioned officer or a warrant officer, who is charged with an offence under this Act, and award one or more of the following punishments, that is to say,- (a) forfeiture of seniority, or in the case of any of them whose promotion depends upon length of service, forfeiture of service for the purpose of promotion for a period not exceeding twelve months,but subject to the right of the accused previous to the award to elect to be tried by a court- martial;

(b) severe reprimand or reprimand;

(c) stoppage of pay and allowances until any proved loss or damage occasioned by the offence of which he is convicted is made good.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 84 of The Army Act, 1950  :

Union Of India & Anr vs Purushottam on 5 January, 2015

Chief Of The Army Staff And Others vs Major Dharam Pal Kukrety on 21 March, 1985

Major Suresh Chand Mehra vs Defence Secretary (U.O.I.) And on 13 November, 1990

Chief Of Army Staff And Ors vs Major S.P. Chadha on 21 December, 1990

Chandra Kumar Chopra vs Union Of India & Ors on 11 May, 2012



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 84 का विवरण :  - एरिया कमाण्डरों और अन्यों द्वारा आफिसरों, कनिष्ठ आयुक्त आफिसरों और वारण्ट आफिसरों का दण्डित किया जाना - ऐसा आफिसर, जो एरिया कमाण्डर या समतुल्य कमाण्डर से कम शक्ति नहीं रखता या ऐसा आफिसर, जो जनरल सेनान्यायालय संयोजित करने के लिए सशक्त हो या ऐसा अन्य आफिसर, जिसे '[थल सेनाध्यक्ष] केन्द्रीय सरकार की सम्मति से विनिर्दिष्ट करे लेफ्टीनेन्ट कर्नल, कनिष्ठ आयुक्त आफिसर या वारण्ट आफिसर के रैंक से नीचे के किसी ऐसे आफिसर के विरुद्ध जिस पर इस अधिनियम के अधीन अपराध का आरोप है, विहित रीति से कार्यवाही कर सकेगा और निम्नलिखित दण्डों में से एक या अधिक दण्ड अधिनिर्णीत कर सकेगा, अर्थात् :

(क) ज्येष्ठता का समपहरण, या उनमें से किसी ऐसे की दशा में जिसकी प्रोन्नति सेवाकाल की लम्बाई पर निर्भर है बारह मास से अनधिक की कालावधि के सेवाकाल का इसलिए समपहरण कि वह प्रोन्नति के प्रयोजन के लिए न गिना जाए, किन्तु यह बात दण्ड अधिनिर्णीत किए जाने के पूर्व अभियुक्त के यह निर्वाचन करने के अधिकार के अध्यधीन होगी कि उसका विचारण सेना-न्यायालय द्वारा किया जाए,

(ख) तीव्र-धिग्दण्ड या धिग्दण्ड,

(ग) वेतन और भत्तों का तब तक के लिए रोक दिया जाना जब तक उस साबित हुई हानि या नुकसान की प्रतिपूर्ति न हो जाए जो उस अपराध के कारण हुआ है जिसका वह सिद्धदोष ठहराया गया है।



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