Section 139 The Army Act, 1950

 

Section 139 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 139 The Army Act, 1950  :Conviction of offence not charged.

(1) A person charged before a court- martial with desertion may be found guilty of attempting to desert or of being absent without leave.

(2) A person charged before a court- martial with attempting to desert may be found guilty of being absent without leave.

(3) A person charged before a court- martial with using criminal force may be found guilty of assault.

(4) A person charged before a court- martial with using threatening language may be found guilty of using insubordinate language.

(5) A person charged before a court- martial with any one of the offences specified in clauses (a), (b), (c) and (d) of section 52 may be found guilty of any other of these offences with which he might have been charged.

(6) A person charged before a court- martial with an offence punishable under section 69 may be found guilty of any other offence of which he might have been found guilty if the provisions of the 1 Code of Criminal Procedure, 1973 ] (2 of 1974 .) were applicable.

(7) A person charged before a court- martial with any offence under this Act, may, on failure of proof of an offence having been committed in circumstances involving a more severe punishment, be found guilty of the same offence as having been committed in circumstances involving a less severe punishment.

(8) A person charged before a court- martial with any offence under this Act may be found guilty of having attempted or abetted



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 139 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 139 का विवरण :  - ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्धि जिसका आरोप न लगाया गया हो - (1) वह व्यक्ति, जिस पर अभित्यजन का आरोप सेना-न्यायालय के समक्ष लगाया गया है, अभित्यजन करने का प्रयत्न करने या छुट्टी बिना अनुपस्थित होने का दोषी ठहराया जा सकेगा।

(2) वह व्यक्ति, जिस पर अभित्यजन करने का प्रयत्न करने का आरोप सेना-न्यायालय के समक्ष लगाया गया है, छुट्टी बिना अनुपस्थिति होने का दोषी ठहराया जा सकेगा।

(3) वह व्यक्ति, जिस पर यह आरोप कि उसने आपराधिक बल का प्रयोग किया है, सेना-न्यायालय के समक्ष लगाया गया है, हमले का दोषी ठहराया जा सकेगा।

(4) वह व्यक्ति, जिस पर धमकी भरी भाषा का प्रयोग करने का आरोप सेना-न्यायालय के समक्ष लगाया गया है, अनधीनता द्योतक भाषा का प्रयोग करने का दोषी ठहराया जा सकेगा।

(5) वह व्यक्ति, जिस पर धारा 52 के खण्ड (क), (ख), (ग) और (घ) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से किसी एक का आरोप सेनान्यायालय के समक्ष लगाया गया है, इन अपराधों में से किसी ऐसे अन्य अपराध का दोषी ठहराया जा सकेगा, जिसका उस पर आरोप लगाया जा सकता था।

(6) वह व्यक्ति, जिस पर धारा 69 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का आरोप सेना-न्यायालय के समक्ष लगाया गया है किसी ऐसे अन्य अपराध का दोषी ठहराया जा सकेगा, जिसका दोषी वह तब ठहराया जा सकता था, जब दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध लागू होते।

(7) वह व्यक्ति, जिस पर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप सेना-न्यायालय के समक्ष लगाया गया है, अपराध के ऐसी परिस्थितियों में किए जाने का, जिनमें अधिक कठोर दण्ड अन्तर्वलित है, सबूत न होने पर उसी अपराध के ऐसी परिस्थितियों में, जिनमें कम कठोर दण्ड अन्तर्वलित है, किए जाने का दोषी ठहराया जा सकेगा।

(8) वह व्यक्ति, जिस पर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप सेना-न्यायालय के समक्ष लगाया गया है, उस अपराध के प्रयत्न का या दुष्प्रेरण का दोषी ठहराया जा सकेगा, यद्यपि, प्रयत्न या दुष्प्रेरण का आरोप पृथक्त: न लगाया गया हो।



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