Section 151 The Army Act, 1950


Section 151 The Army Act, 1950 in Hindi and English 

Section 151 The Army Act, 1950  :Order for disposal of property regarding which offence is committed.

(1) After the conclusion of a trial before any court- martial, the Court or the officer confirming the finding or sentence of such court- martial, or any authority superior to such officer, or, in the case of a court- martial whose finding or sentence does not require confirmation, the officer commanding the army, army corps, division or brigade within which the trial was held, may make such order as it or he thinks fit for the disposal by destruction, confiscation, delivery to any person claiming to be entitled to possession thereof, or otherwise, of any property or document produced before the Court or in its custody, or regarding which any offence appears to have been committed or which has been used for the commission of any offence.

(2) Where any order has been made under sub- section (1) in res- pect of property regarding which an offence appears to have been committed, a copy of such order signed and certified by the authority making the same may, whether the trial was held within India or not, be sent to a magistrate within whose jurisdiction such property for the time being is situated, and such magistrate shall thereupon cause the order to be carried into effect as if it were an order passed by him under the provisions of the 2 Code of Criminal Procedure, 1973 ] (2 of 1974 ), or any corresponding law in force in 1 the State of Jammu and Kashmir].

(3) In this section the term" property" includes, in the case of property regarding which an offence appears to have been committed, not only such property as has been originally in the possession or under the control of any person, but also any property into or for which the same may have been converted or exchanged, and anything acquired by such conversion or exchange whether immediately or otherwise.

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 151 of The Army Act, 1950  :

Watson And Anr. vs Lloyd on 25 September, 1901

Madras High Court 

Norbert Edwin Nugent vs Marjory Julia Nugent on 9 October, 1936

Allahabad High Court 

Kering Rupchand And Co. vs G.B. Murray on 11 October, 1918

Bombay High Court 

Kering Rupchand And Co. vs G.B. Murray on 11 October, 1918

Bombay High Court 

Wallis And Co. vs Bailey on 10 April, 1891

Calcutta High Court 

Calcutta Trades Association vs Ryland on 17 September, 1896

Calcutta High Court 

Samrendra Beura vs U.O.I. & Ors on 20 May, 2013

Supreme Court of India 

Colonel Lecky vs Bank Of Upper India, Ltd. on 22 March, 1911

Allahabad High Court 

Shere Ali And Anr. vs C.L. Prendergast And Anr. on 5 March, 1886

Calcutta High Court 

Wallis And Ors. vs Taylor on 3 April, 1886

Calcutta High Court 

सेना अधिनियम, 1950 की धारा 151 का विवरण :  - जिस सम्पत्ति के बारे में अपराध किया गया है उसके व्ययन के लिए आदेश - (1) किसी सेना-न्यायालय के समक्ष विचारण की समाप्ति के पश्चात् वह सेना-न्यायालय या उस सेना-न्यायालय के निष्कर्ष या दण्डादेश को जो पुष्ट करे वह आफिसर, या ऐसे आफिसर से वरिष्ठ कोई प्राधिकारी या ऐसे सेना-न्यायालय की दशा में, जिसके निष्कर्ष या दण्डादेश की पुष्टि अपेक्षित नहीं है उस सेना, सेना-कोर, डिवीजन या ब्रिगेड का, जिसमें विचारण किया गया था, समादेशन करने वाला आफिसर उस सम्पत्ति या दस्तावेज के, जो उस न्यायालय के समक्ष पेश की गई है या उसकी अभिरक्षा में है या जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या जो कोई अपराध करने के लिए उपयोग में लाई गई है नाश द्वारा, समपहरण द्वारा, किसी ऐसे व्यक्ति को परिदान द्वारा जो उसके कब्जे का हकदार होने का दावा करता है अन्यथा व्ययनित करने का ऐसा आदेश कर सकेगा जैसे वह ठीक समझे।

(2) जहां कि उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश ऐसी सम्पत्ति के बारे में किया गया हो, जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, वहां वह आदेश करने वाले प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित और प्रमाणित उस आदेश की प्रतिलिपि चाहे विचारण भारत के अन्दर हुआ हो या न हुआ हो, ऐसे मजिस्ट्रेट को भेजी का सकेगी, जिसकी अधिकारिता में वह सम्पत्ति तत्समय स्थित हो और तदुपरि

वह मजिस्ट्रेट उस आदेश को ऐसे कार्यान्वित कराएगा मानो वह दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के या जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त तत्समान किसी विधि के अधीन उसके द्वारा पारित आदेश हो।

(3) इस धारा में “सम्पत्ति” शब्द के अन्तर्गत उस सम्पत्ति की दशा जिसके बारे में अपराध किया गया प्रतीत होता है, न केवल वही सम्पत्ति आती है जो मूलत: किसी व्यक्ति के कब्जे में या नियंत्रण में रही है वरन्, वह सम्पत्ति भी आती है जिसमें या जिसके बदले में उसका संपरिवर्तन या विनिमय किया गया है और वह सब कुछ आता है जो ऐसे संपरिवर्तन या विनिमय द्वारा अव्यवहित अन्यथा अर्जित किया गया है।

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