Section 144 The Army Act, 1950

 

Section 144 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 144 The Army Act, 1950  :Evidence of previous convictions and general character.

(1) When any person subject to this Act has been convicted by a court- martial of any offence, such court- martial may inquire into, and receive and record evidence of any previous convictions of such person, either by a court- martial or by a criminal court, or any previous award of punishment under any of the sections 80, 83, 84 and 85, and may further inquire into and record the general character of such person and such other matters as may be prescribed.

(2) Evidence received under this section may be either oral, or in the shape of entries in, or certified extracts from, court- martial books or other official records; and it shall not be necessary to give notice before trial to the person tried that evidence as to his previous convictions or character will be received.

(3) At a summary court- martial the officer holding the trial may, if he thinks fit, record any previous convictions against the offender, his general character, and such other matters as may be prescribed, as of his own knowledge, instead of requiring them to be proved under the foregoing provisions of this section.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 144 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 144 का विवरण :  - पूर्व दोषसिद्धियों और साधारण शील का साक्ष्य - (1) जब कि इस अधिनियम के अध्यधीन के किसी व्यक्ति को सेनान्यायालय ने किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया हो तब वह सेना-न्यायालय ऐसे व्यक्ति की किसी सेना-न्यायालय या किसी दण्डन्यायालय द्वारा की गई पूर्व दोषसिद्धियों की या धाराओं 80, 83, 84 या 85 में से किसी के अधीन किए गए किसी पूर्वदण्ड अधिनिर्णय की जांच कर सकेगा और साक्ष्य प्राप्त और अभिलिखित कर सकेगा तथा इसके अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति के साधारण शील की और ऐसी बातों की जो विहित की जाएं, जांच कर सकेगा और उन्हें अभिलिखित कर सकेगा।

(2) इस धारा के अधीन प्राप्त किया गया साक्ष्य या तो मौखिक या सेना-न्यायालय पुस्तकों में की या अन्य शासकीय अभिलेखों में की प्रविष्टियों या उनमें से प्रमाणित उद्धरणों के रूप में हो सकेगा और विचारित व्यक्ति को विचारण के पूर्व यह सूचना देना आवश्यक नहीं होगा कि उसकी पूर्व दोषसिद्धियों या शील के बारे में साक्ष्य प्राप्त किया जाएगा।

(3) यदि सम्मरी सेना-न्यायालय में विचारण करने वाला आफिसर ठीक समझे तो वह अपराधी के विरुद्ध की किन्हीं पूर्व दोषसिद्धियों को, या उसके साधारण शील को और ऐसी अन्य बातों को जो विहित की जाएं, इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों के अधीन साबित किए जाने की अपेक्षा करने के बदले में उन्हें अपने ज्ञान के रूप में अभिलिखित कर सकेगा।



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