Section 100 The Army Act, 1950

 

Section 100 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 100 The Army Act, 1950  :Period during which a person is deemed to be a prisoner of war. For the purposes of sections 98 and 99, a person shall be deemed to continue to be a prisoner of war until the conclusion of any inquiry into his conduct such as is referred to in section 96, and if he is cashiered or dismissed from the service in consequence of such conduct, until the date of such cashiering or dismissal.

1. Subs. by Act 19 of 1955, s. 2 and Sch., for" the Commander- in- Chief".



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 100 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 100 का विवरण :  - वह कालावधि जिसके दौरान कोई व्यक्ति युद्ध कैदी समझा जाता है - किसी व्यक्ति की बाबत धाराओं 98 और 99 के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि जब तक उसके आचरण की ऐसी जांच जैसी धारा 96 में निर्दिष्ट है, समाप्त नहीं हो जाती तब तक और यदि वह ऐसे आचरण के परिणामस्वरूप सकलंक पदच्युत किया जाता है या सेवा से पदच्युत किया जाता है तो ऐसे सकलंक पच्युत किया जाने की या पदच्युत किए जाने की तारीख तक युद्ध कैदी बना रहा है।



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