Section 122 The Army Act, 1950

 

Section 122 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 122 The Army Act, 1950  :Period of limitation for trial.

(1) Except as provided by sub- section (2), no trial by court- martial of any person subject to this Act for any offence shall be commenced after the expiration of a period of three years 1[ and such period shall commence,-

(a) on the date of the offence; or

(b) where the commission of the offence was not known to the person aggrieved by the offence or to the authority com- petent to initiate action, the first day on which such offence comes to the knowledge of such person or authority, whichever is earlier; or

(c) where it is not known by whom the offence was com- mitted, the first day on which the identity of the offender is known to the person aggrieved by the offence or to the authority competent to initiate action, whichever is earlier.]

(2) The provisions of sub- section (1) shall not apply to a trial for an offence of desertion or fraudulent enrolment or for any of the offences mentioned in section 37.

(3) In the computation of the period of time mentioned in sub- section (1), any time spent by such person as a prisoner of war, or in enemy territory, or in evading arrest after the commission of the offence, shall be excluded.

(4) No trial for an offence of desertion other than desertion on active service or of fraudulent enrolment shall be commenced if the person in question, not being an officer, has subsequently to the commission of the offence, served continuously in an exemplary manner for not less than three years with any portion of the regular Army.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 122 of The Army Act, 1950  :

U.O.I. & Ors vs Harjeet Singh Sandhu on 11 April, 2001

Union Of India & Ors vs V.N. Singh on 8 April, 2010

Rajvir Singh vs Secretary Min.Of Defence & Ors on 15 February, 2012

Union Of India & Anr vs V.N. Saxena on 1 April, 2008

J.S. Sekhon vs Union Of India & Ors on 10 August, 2010

Major Kadha Krishan vs Union Of India & Ors on 25 March, 1996

Delhi Special Police vs Lt. Col. S. K. Loraiya on 24 August, 1972

Union Of India & Ors vs Major General Madan Lal Yadav on 22 March, 1996

U.O.I. And Ors. vs Rajbir Singh Khanna And Anr. on 24 August, 2001

Extra Judl.Exec.Victim Families vs Union Of India & Anr on 13 July, 2016



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 122 का विवरण :  - विचारण के लिए परिसीमाकाल - (1) उपधारा (2) द्वारा यथा उपबंधित के सिवाय इस अधिनियम के अध्यधीन के किसी व्यक्ति का, किसी अपराध के लिए सेना - न्यायालय द्वारा कोई भी विचारण तीन वर्ष की कालावधि के अवसान के पश्चात् प्रारंभ नहीं किया जाएगा, और ऐसी कालावधि,

(क) अपराध की तारीख को प्रारंभ होगी; या

(ख) जहां अपराध के किए जाने की जानकारी, अपराध से व्यथित व्यक्ति को या कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को नहीं थी, वहां उस प्रथम दिन को प्रारंभ होगी जिस दिन ऐसे अपराध की जानकारी ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी को होती है, इनमें से जो भी पहले हो; या

(ग) जहां यह ज्ञात नहीं है कि अपराध किसने किया है, वहां उस प्रथम दिन को प्रारंभ होगी जिस दिन अपराधी का पता अपराध से व्यथित व्यक्ति को या कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को चलता है, इनमें से जो भी पहले हो।

(2) उपधारा (1) के उपबन्ध, अभित्यजन या कपटपूर्ण अभ्यावेदन के अपराध या धारा 37 में वर्णित अपराधों में से किसी के लिए विचारण को लागू नहीं होंगे।

(3) समय की जो कालावधि उपधारा (1) में वर्णित है उसकी गणना करने में, वह समय अपवर्जित कर दिया जाएगा, जो ऐसे व्यक्ति ने अपराध किए जाने के पश्चात् युद्ध कैदी के रूप में या शत्रु के क्षेत्र में या गिरफ्तारी से बचने में बिताया है।

(4) यदि प्रश्न गत व्यक्ति जो आफिसर नहीं है अपराध के किए जाने के पश्चात् नियमित सेना के किसी प्रभाग में अनुकरणीय रीति से सेवा निरन्तर कम से कम तीन वर्ष के लिए कर चुका है तो सक्रिय सेवा पर के अभित्यजन से भिन्न अभित्यजन के अपराध का या कपटपूर्ण अभ्यावेशन के अपराध का कोई भी विचारण प्रारम्भ नहीं किया जाएगा।



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