Section 163 The Army Act, 1950

 

Section 163 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 163 The Army Act, 1950  :Alteration of finding or sentence in certain cases.

(1) Where a finding of guilty by a court- martial, which has been confirmed, or which does not require confirmation, is found for any reason to be invalid or cannot be supported by the evidence, the authority which would have had power under section 179 to commute the punishment awarded by the sentence, if the finding had been valid, may substitute a new finding and pass a sentence for the offence specified or involved in such finding: Provided that no such substitution shall be made unless such finding could have been validly made by the court- martial on the charge and unless it appears that the court- martial must have been satisfied of the facts establishing the said offence.

(2) Where a sentence passed by a court- martial which has been confirmed, or which does not require confirmation, not being a sen- tence passed in pursuance of a new finding substituted under sub- section (1), is found for any reason to be invalid, the authority referred to in sub- section (1) may pass a valid sentence.

(3) The punishment awarded by a sentence passed under sub- section (1) or sub- section (2) shall not be higher in the scale of punishments than, or in excess of, the punishment awarded by, the sentence for which a new sentence is substituted under this section.

(4) Any finding substituted, or any sentence passed, under this section shall, for the purposes of this Act and the rules made



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 163 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 163 का विवरण :  - कतिपय मामलों में निष्कर्ष या दण्डादेश का परिवर्तित किया जाना - (1) जहां कि किसी सेना-न्यायालय द्वारा दोषी होने का ऐसा निष्कर्ष जिसकी पुष्टि हो चुकी है या जिसकी पुष्टि होनी अपेक्षित नहीं है, किसी कारण से अविधिमान्य पाया जाता है या साक्ष्य से उसका समर्थन नहीं होता है, वहां वह प्राधिकारी, जिसे, यदि निष्कर्ष विधिमान्य होता, दण्डादेश द्वारा अधिनिर्णीत दण्ड को लघुकृत करने की शक्ति धारा 179 के अधीन होती, नया निष्कर्ष प्रतिस्थापित कर सकेगा और ऐसे निष्कर्ष में विनिर्दिष्ट या अन्तर्वलित अपराध के लिए दण्डादेश पारित कर सकेगा :

परन्तु ऐसा कोई प्रतिस्थापन तब के सिवाय, जब कि सेना-न्यायालय द्वारा उस आरोप पर ऐसा निष्कर्ष विधिमान्यतया दिया जा सकता था, और तब के सिवाय, जब कि यह प्रतीत हो कि उक्त अपराध साबित करने वाले तथ्यों के बारे में सेना-न्यायालय का समाधान आवश्यक हो गया होगा, नहीं किया जाएगा।

(2) जहां कि सेना-न्यायालय द्वारा पारित दण्डादेश, जिसकी पुष्टि हो चुकी है या जिसकी पुष्टि होनी अपेक्षित नहीं है, किन्तु जो उपधारा (1) के अधीन प्रतिस्थापित नए निष्कर्ष के अनुसरण में पारित दण्डादेश नहीं है, किसी कारण से अविधिमान्य पाया जाता है, वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी विधिमान्य दण्डादेश पारित कर सकेगा।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन पारित दण्डादेश द्वारा अधिनिर्णीत दण्ड, दण्डों के मापमान में उस दण्ड से उच्चतर नहीं होगा और न उस दण्ड से अधिक होगा, जो उस दण्डादेश द्वारा अधिनिर्णीत किया गया है, जिसके लिए इस धारा के अधीन नया दण्डादेश प्रतिस्थापित किया गया है।

(4) इस धारा के अधीन प्रतिस्थापित कोई निष्कर्ष या पारित कोई दण्डादेश इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए ऐसे प्रभावी होगा, मानो वह किसी सेना-न्यायालय का, यथास्थिति, निष्कर्ष या दण्डादेश हो।



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