Section 138 The Army Act, 1950

 

Section 138 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 35 The Army Act, 1950  :Examination of a withness on commission.

(1) The prosecutors and the accused person in any case in which a commission is issued under section 137 may respectively forward any interrogatories in writing which the Court may think

relevant to the issue, and the magistrate or officer executing the commission shall examine the witness upon such interrogatories.

(2) The prosecutor and the accused person may appear before such magistrate or officer by counsel or, except in the case of an accused person in custody, in person, and may examine, cross- examine and re- examine, as the case may be, the said witness.

(3) After a commission issued under section 137 has been duly executed, it shall be returned, together with the deposition of the witness examined thereunder, to the Judge Advocate General.

(4) On receipt of a commission and deposition returned under subsection (3), the Judge Advocate General shall forward the same to the Court at whose instance the commission was issued or, if such Court has been dissolved, to any other Court convened for the trial of the accused person; and the commission, the return thereto and the deposition shall be open to inspection by the prosecutor and the accused person, and may, subject to all just exceptions, be read in evidence in the case by either the prosecutor or the accused, and shall form part of the proceedings of the Court.

(5) In every case in which a commission is issued under section 137, the trial may be adjourned for a specified time reasonably sufficient for the execution and return of the commission.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 138 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 138 का विवरण :  - साक्षी की कमीशन पर परीक्षा - (1) किसी भी ऐसे मामले में, जिसमें धारा 137 के अधीन कमीशन निकाला जाता है, अभियोजक और अभियुक्त व्यक्ति क्रमशः कोई ऐसे लिखित परिप्रश्न भेज सकेंगे जिन्हें न्यायालय विवाद्यक से सुसंगत समझे और ऐसे कमीशन का निष्पादन करने वाला मजिस्ट्रेट या आफिसर साक्षी की परीक्षा ऐसे परिप्रश्नों पर करेगा।

(2) अभियोजक और अभियुक्त व्यक्ति ऐसे मजिस्ट्रेट या आफिसर के समक्ष काउन्सेल की मार्फत या उस दशा के सिवाय, जब कि अभियुक्त व्यक्ति अभिरक्षा में है, स्वयं उपसंजात हो सकेंगे और उक्त साक्षी की, यथास्थिति, परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुनः परीक्षा कर सकेंगे।

(3) धारा 137 के अधीन निकाले गए कमीशन के सम्यक् रूप से निष्पादित किए जाने के पश्चात्, वह उस साक्षी के अभिसाक्ष्य के सहित, जिसकी उसके अधीन पीरक्षा की गई हैं, जज-एडवोकेट जनरल को लौटा दिया जाएगा।

(4) उपधारा (3) के अधीन लौटाए गए कमीशन और अभिसाक्ष्य की प्राप्ति पर जज एडवोकेट जनरल उसे उस न्यायालय को, जिसकी प्रेरणा पर वह कमीशन निकाला गया था, या यदि वह न्यायालय विघटित कर दिया गया है तो अभियुक्त व्यक्ति के विचारण के लिए संयोजित किसी अन्य न्यायालय को अग्रेषित कर देगा, और वह कमीशन, तत्सम्बन्धी विवरणी और अभिसाक्ष्य अभियोजक और अभियुक्त द्वारा निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे, और सब न्यायसंगत अपवादों के अध्यधीन रहते हुए, या तो अभियोजक द्वारा या अभियुक्त द्वारा मामले में साक्ष्य में पढ़े जा सकेंगे और न्यायालय की कार्यवाही का भाग होंगे।

(5) हर मामले में, जिसमें धारा 137 के अधीन कमीशन निकाला गया हो, विचारण ऐसे विनिर्दिष्ट समय के लिए, जो कमीशन के निष्पादन और लौटाए जाने के लिए युक्तियुक्त रूप से पर्याप्त है, स्थगित किया जा सकेगा।



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