Section 179 The Army Act, 1950

 

Section 179 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 179 The Army Act, 1950  : Pardon and remission. When any person subject to this Act has been convicted by a court- martial of any offence, the Central Government or 1 the Chief of the Army Staff] or, in the case of a sentence, which he could have confirmed or which did not, require confirmation, the officer commanding the army, army corps, division or independent brigade in which such person at the time of conviction was serving, or the prescribed officer may-

(a) either with or without conditions which the person sentenced accepts, pardon the person or remit the whole or any part of the punishment awarded; or

(b) mitigate the punishment awarded; or

(c) commute such punishment for any less punishment or punishments mentioned in this Act: Provided that a sentence of transportation shall not be commuted for a sentence of imprisonment for a term exceeding the term of transportation awarded by the court; or

(d) either with or without conditions which the person sentenced accepts, release the person on parole.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 179 of The Army Act, 1950  :

Ajmer Singh Etc. Etc vs Union Of India & Ors on 29 April, 1987

Ajmer Singh And Ors. vs Union Of India (Uoi) And Ors. on 29 April, 1987

Union Of India And Others vs Sadha Singh on 25 October, 1999

Union Of India And Others vs Sadha Singh on 25 October, 1999



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 179 का विवरण :  - क्षमा और परिहार - जब कि इस अधिनियम के अध्यधीन का कोई व्यक्ति सेना-न्यायालय द्वारा किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, तब केन्द्रीय सरकार या थल सेनाध्यक्ष अथवा ऐसे दण्डादेश की दशा में, जिसे वह पुष्ट कर सकता था या जिसकी पुष्टि अपेक्षित नहीं थी, उस सेना, सेना-कोर, डिवीजन या स्वतंत्र ब्रिगेड का, जिसमें वह व्यक्ति दोषसिद्धि के समय सेवा करता था, समादेशन करने वाला आफिसर या विहित आफिसर -

(क) या तो उन शर्तों के सहित या बिना जिन्हें दण्डादिष्ट व्यक्ति प्रतिगृहीत करता है, उस व्यक्ति को क्षमा कर सकेगा या अधिनिर्णीत सम्पूर्ण दण्ड या उसके किसी भाग का परिहार कर सकेगा, अथवा

(ख) अधिनिर्णीत दण्ड में कमी कर सकेगा, अथवा 

(ग) ऐसे दण्ड को इस अधिनियम में वर्णित किसी कम दण्ड या दण्डों में लघुकृत कर सकेगा :

परन्तु निर्वासन का दण्डादेश न्यायालय द्वारा अधिनिर्णीत निर्वासन की अवधि से अधिक की अवधि के कारावास के दण्डादेश में लघुकृत नहीं किया जाएगा, अथवा

(घ) या तो उन शर्तों के सहित या बिना, जिन्हें दण्डादिष्ट व्यक्ति प्रतिगृहीत करता है, उस व्यक्ति को पैरोल पर निर्मुक्त कर सकेगा।



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