Section 130 The Army Act, 1950


Section 130 The Army Act, 1950 in Hindi and English 

Section 130 The Army Act, 1950  :Challenges.

(1) At all trials by general, district or summary general court- martial, as soon as the court is assembled, the names of the presiding officer and members shall be read over to the accused, who shall thereupon be asked whether he objects to being tried by any officer sitting on the court.

(2) If the accused objects to any such officer, his objection, and also the reply thereto of the officer objected to, shall be heard and recorded, and the remaining officers of the court shall, in the absence of the challenged officer decide on the objection.

(3) If the objection is allowed by one- half or more of the votes of the officers entitled to vote, the objection shall be allowed, and the member objected to shall retire, and his vacancy may be filled in the prescribed manner by another officer subject to the same right of the accused to object.

(4) When no challenge is made, or when challenge has been made and disallowed, or the place of every officer successfully challenged has been filled by another officer to whom no objection is made or allowed, the court shall proceed with the trial.

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section130 of The Army Act, 1950  :

Ranjit Thakur vs Union Of India And Ors on 15 October, 1987

Lt. Col. Prithi Pal Singh Bedi Etc vs Union Of India & Others on 25 August, 1982

Union Of India vs Ranjit Thakur on 10 August, 1988

Union Of India And Ors vs Shivendra Bikaram Singh on 24 April, 2003

Justice P.D. Dinakaran vs Hon'Ble Judges Inquiry Committee on 5 July, 2011

Union Of India & Anr vs Charanjit S. Gill & Ors on 24 April, 2000

Chandra Kumar Chopra vs Union Of India & Ors on 11 May, 2012

Union Of India & Ors vs Bodupalli Gopalaswami on 12 September, 2011

Union Of India & Ors vs Major General Madan Lal Yadav on 22 March, 1996

Major General Inder Jit Kumar vs Union Of India & Ors on 20 March, 1997

सेना अधिनियम, 1950 की धारा 130 का विवरण :  - (1) जनरल, डिस्ट्रिक्ट या सम्मरी जनरल सेना-न्यायालय द्वारा सभी विचारणों में, जैसे ही न्यायालय समवेत हो वैसे ही, पीठासीन आफिसर और सदस्यों के नाम अभियुक्त को पढ़कर सुनाए जाएंगे, जिससे तब यह पूछा जाएगा कि क्या वह न्यायालयासीन किसी आफिसर द्वारा अपना विचारण किए जाने पर आक्षेप करता है।

(2) यदि अभियुक्त ऐसे किसी आफिसर के बारे में आक्षेप करता है तो उसका आक्षेप और उस पर उस आफिसर का जिसके बारे में आक्षेप किया गया हो उत्तर भी सुना और अभिलिखित किया जाएगा और न्यायालय के बाकी आफिसर आक्षेप पर उस आफिसर की अनुपस्थिति में विनिश्चय करेंगे जिसके बारे में आक्षेप किया गया है।

(3) यदि आक्षेप मतदान करने के हकदार आफिसरों के आधे या अधिक मतों से मंजूर किया जाए तो आक्षेप मंजूर किया जाएगा और वह सदस्य जिसके बारे में आक्षेप किया गया है निवृत्त हो जाएगा, और उस रिक्ति को विहित रीति से किसी अन्य आफिसर से अभियुक्त के आक्षेप करने के उसी अधिकार के अध्यधीन रहते हुए भरा जा सकेगा।

(4) जब कि कोई आक्षेप नहीं किया गया है या जब कि आक्षेप किया गया है और नामंजूर कर दिया गया है या ऐसे हर आफिसर का स्थान जिसके बारे में सफलतापूर्वक आक्षेप किया गया है किसी अन्य ऐसे आफिसर से भर दिया गया है जिसके बारे में कोई आक्षेप नहीं किया गया है या मंजूर नहीं किया गया है तब न्यायालय विचारण करने के लिए अग्रसर होगा।

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