Section 160 The Army Act, 1950

 

Section 160 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 160 The Army Act, 1950  :Revision of finding or sentence.

(1) Any finding or sentence of a court- martial which requires confirmation may be once revised by order of the confirming

authority and on such revision, the Court, if so directed by the con- firming authority, may take additional evidence.

(2) The Court, on revision, shall consist of the same officers as were present when the original decision was passed, unless any of those officers are unavoidably absent.

(3) In case of such unavoidable absence the cause thereof shall be duly certified in the proceedings, and the Court shall proceed



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 160 of The Army Act, 1950  :

Union Of India & Ors vs Capt.A.P. Bajpai on 20 February, 1998

Union Of India & Anr vs Charanjit S. Gill & Ors on 24 April, 2000

Union Of India And Others vs J.S. Brar on 9 October, 1992

Captain Harish Uppal vs Union Of India And Others on 27 November, 1972

Capt. Harish Uppal vs Union Of India (Uoi) And Ors. on 27 November, 1972

U.O.I. & Ors vs Harjeet Singh Sandhu on 11 April, 2001

Chief Of The Army Staff And Others vs Major Dharam Pal Kukrety on 21 March, 1985

S.N. Mukherjee vs Union Of India on 28 August, 1990

Union Of India & Ors vs V.N. Singh on 8 April, 2010

Sanjay Marutirao Patil vs Union Of India Ministry Of Defence on 24 January, 2020



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 160 का विवरण :  - निष्कर्ष या दण्डादेश का पुनरीक्षण - (1) सेना-न्यायालय का निष्कर्ष या दण्डादेश जिसकी पुष्टि अपेक्षित है, पुष्टिकर्ता आफिसर के आदेश से एक बार पुनरीक्षित किया जा सकेगा और ऐसे पुनरीक्षण पर न्यायालय, यदि वह पुष्टिकर्ता आफिसर द्वारा ऐसा करने के लिए निदेशित किया गया है तो अतिरिक्त साक्ष्य ले सकेगा।

(2) पुनरीक्षण पर, न्यायालय उन्हीं आफिसरों से जो उस समय उपस्थित थे जब कि मूल विनिश्चय पारित किया गया था, मिलकर गठित होगा जब तक कि उन आफिसरों में से कोई अपरिवर्जनीयत: अनुपस्थित न हो।

(3) ऐसी अपरिवर्जनीय अनुपस्थिति की दशा में, उसका हेतुक कार्यवाही में सम्यक् रूप से प्रमाणित किया जाएगा और न्यायालय पुनरीक्षण करने के लिए अग्रसर होगा, परन्तु यह तब जबकि यदि वह जनरल सेना-न्यायालय है, तो पांच आफिसरों से या यदि वह सम्मरी, जनरल या डिस्ट्रिक्ट सेना-न्यायालय है, तो तीन आफिसरों से मिलकर उस समय भी गठित हो।



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