Section 169 The Army Act, 1950

 

 Section 169 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 169 The Army Act, 1950  :Execution of sentence of imprisonment.

(1) Whenever any sentence of imprisonment is passed under this Act by a court- martial or whenever any sentence of death or transportation is commuted to imprisonment, the confirming officer or in case of a summary court- martial the officer holding the Court or such other officer as may be prescribed, shall, save as otherwise provided in sub- sections (3) and (4), direct either that the sentence shall be carried out by confinement in a military prison or that it shall be carried out by confinement in a civil prison.

(2) When a direction has been made under sub- section (1) the commanding officer of the person under sentence or such other officer as may be prescribed shall forward a warrant in the prescribed form to the officer in charge of the prison in which such person is to be confined and shall arrange for his despatch to such prison with the warrant.

(3) In the case of a sentence of imprisonment for a period not exceeding three months and passed under this Act by a court- martial, the appropriate officer under sub- section (1) may direct that the sentence shall be carried out by confinement in military custody instead of in a civil or military prison.

(4) On active service, a sentence of imprisonment may be carried out by confinement in such place as the officer commanding the forces in the field may from time to time appoint.Period of custody undergone by the officer of person to be set off against the imprisonment.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 169 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 169 का विवरण :  - कारावास के दण्डादेश का निष्पादन - (1) जब कभी कारावास का कोई दण्डादेश सेना-न्यायालय द्वारा इस अधिनियम के अधीन पारित किया जाता है या जब कभी मृत्यु या निर्वासन का कोई दण्डादेश कारावास में लघुकृत किया जाता है, तब पुष्टिकर्ता आफिसर या सम्मरी सेना-न्यायालय की दशा में, न्यायालय अधिविष्ट करने वाला आफिसर या ऐसा अन्य आफिसर, जो विहित किया जाए, उपधारा (3) और (4) में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसे छोड़कर, यह निदेश देगा कि या तो दण्डादेश सैनिक कारागार में परिरोध द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा अथवा सिविल कारागार में परिरोध द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।

(2) जब कि कोई निदेश उपधारा (1) के अधीन दिया गया है, तब दण्डादिष्ट व्यक्ति का कमान आफिसर, या ऐसा अन्य आफिसर जो, विहित किया जाए, उस कारागार के भारसाधक आफिसर को, जिसमें ऐसे व्यक्ति को परिरुद्ध किया जाना है, विहित प्ररूप में अधिपत्र भेजेगा और अधिपत्र के साथ उसे उस कारागार को भेजे जाने का प्रबन्ध करेगा।

(3) तीन मास से अनधिक की कालावधि के कारावास के और सेना-न्यायालय द्वारा इस अधिनियम के अधीन पारित दण्डादेश की दशा में, उपधारा (1) के अधीन समुचित आफिसर निदेश दे सकेगा कि दण्डादेश किसी सिविल या सैनिक कारागार के बजाय सैनिक अभिरक्षा में परिरोध करके कार्यान्वित किया जाए।

(4) सक्रिय सेवा पर की दशा में, कारावास का दण्डादेश ऐसे स्थान में परिरोध द्वारा कार्यान्वित किया जा सकेगा, जिसे फील्ड में बलों का समादेशन करने वाला आफिसर समय-समय पर नियुक्त करे।


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