Section 35 The Army Act, 1950

 

Section 35 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 35 The Army Act, 1950  :Power to make rules.

(1) The Central Government may make rules for the purpose of carrying into effect the provisions of this Act.

(2) Without prejudice to the generality of the power conferred by sub- section (1), the rules made thereunder may provide for-

(a) the removal, retirement, release or discharge from the service of persons subject to this Act;

(b) the amount and incidence of fines to be imposed under section 89; 2

(d) the assembly and procedure of courts of inquiry, the recording of summaries of evidence and the administration of oaths or affirmations by such courts;

(e) the convening and constituting of courts- martial and the appointment of prosecutors at trials by courts- martial;

(f) the adjournment, dissolution and sitting of courts- martial;

(g) the procedure to be observed in trials by courts- martial and the appearance of legal practitioners thereat;

(h) the confirmation, revision and annulment of, and petitions against, the findings and sentences of courts- martial;

(i) the carrying into effect of sentences of courts- martial;

(j) the forms of orders to be made under the provisions of this Act relating to courts- martial, transportation and im- prisonment;

(k) the constitution of authorities to decide for what persons, to what amounts and in what manner, provision should be made for dependants under section 99, and the due carrying out of such decisions;

(l) the relative rank of the officers, junior commissioned officers, warrant officers, petty officers and non- commis- sioned officers of the regular Army, Navy and Air Force when acting together;

(m) any other matter directed by this Act to be prescribed.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 35 of The Army Act, 1950  :

Union Of India vs S. K. Rao on 22 November, 1971

Lt. Genl. R.K. Anand vs Union Of India And Another on 18 December, 1991

Major G.S. Sodhi vs Union Of India (Uoi) on 30 November, 1990

Lt. Col. Prithi Pal Singh Bedi Etc vs Union Of India & Others on 25 August, 1982

R. Viswan & Others vs Union Of India & Others on 6 May, 1983

Union Of India (Uoi) vs Capt. S.K. Rao on 22 November, 1971

Union Of India & Anr vs Charanjit S. Gill & Ors on 24 April, 2000

Union Of India & Ors vs Rajpal Singh on 7 November, 2008

Chief Of The Army Staff And Others vs Major Dharam Pal Kukrety on 21 March, 1985

Veerenndra Kumar Dubey vs Chief Of Army Staff & Ors on 16 October, 2015




सेना अधिनियम, 1950 की धारा 35 का विवरण :  - (1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।

(2) उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, तद्धीन बनाए गए नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे।

(क) इस अधिनियम के अध्यधीन के व्यक्तियों का सेवा से हटाया जाना, निवृत्त किया जाना, निर्मुक्त किया जाना या उन्मोचित किया जाना,

(ख) धारा 89 के अधीन अधिरोपित किए जाने वाले जुर्मानों की रकम और उनका आपतन,

(घ) जांच अधिकरणों का समवेत होना और उनकी प्रक्रिया, ऐसे अधिकरणों द्वारा साक्ष्य के संक्षेपों का अभिलेखन और शपथ का दिलाया जाना या प्रतिज्ञान का कराया जाना,

(ङ) सेना-न्यायालयों का संयोजन और गठन और सेना-न्यायालयों द्वारा किए जाने वाले विचारणों में अभियोजकों की नियुक्ति,

(च) सेना-न्यायालयों का स्थगन, विघटन और बैठक, 

(छ) सेना-न्यायालयों द्वारा विचारणों में अनुपालनीय प्रक्रिया और उनमें विधि-व्यवसायियों की उपसंजाति, 

(ज) सेना-न्यायालयों के निष्कर्षों और दण्डादेशों की पुष्टि, पुनरीक्षण और बातिलीकरण और उनके विरुद्ध अर्जियां, 

(झ) सेना-न्यायालयों के दण्डादेशों का क्रियान्वित किया जाना,

(ञ) सेना-न्यायालयों, निर्वासन और कारावास के संबंध में इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन किए जाने वाले आदेशों के प्ररूप,

(ट) यह विनिश्चित करने के लिए प्राधिकारियों का गठन कि धारा 99 के अधीन आश्रितों के लिए उपबन्ध किन व्यक्तियों के लिए, किन रकमों तक और किस रीति से किया जाना चाहिए और ऐसे विनिश्चयों का सम्यक् क्रियान्वयन,

(ठ) नियमित सेना, नौसेना और वायु सेना के आफिसरों, कनिष्ठ आयुक्त आफिसरों, वारण्ट आफिसरों, पैटी आफिसरों और अनायुक्त आफिसरों का, जब वे एक साथ कार्य कर रहे हों, अपेक्षित रैंक,

(ड) कोई अन्य विषय जिसका विहित किया जाना इस अधिनियम द्वारा निर्दिष्ट हो। 



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