Section 69 Contract Act 1872

 

Section 69 Contract Act 1872 in Hindi and English 



Section 69 Contract Act 1872 :Reimbursement of person paying money due by another, in payment of which he is interested - A person who is interested in the payment of money which another is bound by law to pay, and who therefore pays it, is entitled to be reimbursed by the other.

Illustration

B holds land in Bengal, on a lease granted by A, the zamindar. The revenue payable by A to the Government being in arrear, his land is advertised for sale by the Government. Under the revenue law, the consequence of such sale will be the annulment of B's lease. B to prevent the sale and the consequent annulment of his own lease, pays the Government the sum due from A. A is bound to make good to B the amount so paid.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 69 of Contract Act 1872 :

Rattan Chand Hira Chand vs Askar Nawaz Jung (Dead) By L.Rs. on 12 February, 1991

Numaligarh Refinery Ltd vs Daelim Industrial Company Ltd on 6 September, 2007

Krishna Pillai Rajasekharan Nair vs Padmanabha Pillai (D) By Lrs. & Ors on 15 December, 2003

Sone Valley Portland Cement Co. vs The General, Mining Syndicate on 24 August, 1976

M/S. Orissa Cement Ltd vs Union Of India on 14 March, 1962

Mahanagar Telephone Nigam vs Tata Communication Limited on 27 February, 2019

The Aggarwal Chamber Of vs M/S Ganpat Rai Hira Lal on 11 November, 1957



भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 69 का विवरण :  -   उस व्यक्ति की प्रतिपूर्ति, जो किसी अन्य द्वारा शोध्य ऐसा धन देता है, जिसके संदाय में वह व्यक्ति हितबद्ध है -- वह व्यक्ति जो उस धन के, जिसके संदाय के लिए कोई अन्य व्यक्ति विधि द्वारा आबद्ध है, संदाय में हितबद्ध है और इसलिए उसका संदाय करता है, उस अन्य व्यक्ति से प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है।

दृष्टान्त

जमींदार 'क' के द्वारा अनुदत्त पट्टे पर 'क' बंगाल में भूमि धारण करता है। ‘क’ द्वारा सरकार को देय राजस्व के बकाया में होने के कारण उसकी भूमि सरकार द्वारा विक्रय के लिए विज्ञापित की जाती है। ऐसे विक्रय का राजस्व-विधि के अधीन परिमाण 'ख' के पट्टे का बातिल किया जाना होगा। ‘ख’ विक्रय और उसके परिणामस्वरूप अपने पट्टे के बातिल किए जाने को निवारित करने के लिए 'क' द्वारा शोध्य राशि सरकार को संदत्त करता है। 'क' इस प्रकार संदत्त रकम की ‘ख’ को प्रतिपूर्ति करने के लिए आबद्ध है।


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