Section 62 Contract Act 1872


Section 62 Contract Act 1872 in Hindi and English 

Section 62 Contract Act 1872 :Effect of novation, rescission, and alteration of contract - If the parties to a contract agree to substitute a new contract for it, or to rescind or alter it, the original contract need not be performed.


(a) A owes money to B under a contract. It is agreed between A, B and C, that B shall thenceforth accept C as his debtor, instead of A. The old debt of A to B is at an end, and a new debt from C to B has been contracted.

(b) A owes B 10,000 rupees. A enters into an agreement with B, and gives B a mortgage of his (As), estate for 5,000 rupees in place of the debt of 10,000 rupees. This is a new contract and extinguishes the old.

(c) A owes B 1,000 rupees under a contract, B owes C 1,000 rupees, B orders A to credit C with 1,000 rupees in his books, but C does not assent to the agreement. B still owes C 1,000 rupees, and no new contract has been entered into.

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 62 of Contract Act 1872 :

All India Power Engineer vs Sasan Power Ltd. & Ors. Etc on 8 December, 2016

Chrisomar Corporation vs Mjr Steels Private Limited on 14 September, 2017

Chairman, Board Of Trustees, vs M/S Arebee Star Maritime on 5 August, 2020

Citi Bank N.A vs Standard Chartered Bank & Others on 8 October, 2003

Citibank N.A vs Standard Chartered Bank on 7 July, 2004

United Bank Of India vs Ramdas Mahadeo Prashad And Ors on 4 November, 2003

The Union Of India vs Kishorilal Gupta And Bros on 21 May, 1959

M/S. Shakti Tubes Ltd vs State Of Bihar & Ors on 7 July, 2009

Indian Bank vs K. Nataraja Pillai And Anr on 22 October, 1992

Kanchan Udyog Limited vs United Spirits Limited on 19 June, 2017

भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 62 का विवरण :  -  संविदा के नवीयन, विखण्डन और परिवर्तन का प्रभाव -- यदि किसी संविदा के पक्षकार उसके बदले एक नई संविदा प्रतिस्थापित करने या उस संविदा को विखण्डित या परिवर्तित करने का करार करें तो मूल संविदा का पालन करने की आवश्यकता न होगी।


(क) 'क' एक संविदा के अधीन 'ख' को धन का देनदार है। 'क', 'ख' और 'ग' के बीच यह करार होता है कि 'ख' तत्पश्चात् 'क' के बजाय 'ग' को अपना ऋणी मानेगा। 'क' पर 'ख' के पुराने ऋण का अन्त हो गया और 'ग' पर 'ख' के एक नये ऋण की संविदा हो गई है।

(ख) 'ख' का 'क' 10,000 रुपये का देनदार है। 'ख' से 'क' ठहराव करता है और ‘ख’ को 10,000 रुपये के ऋण | के बदले 5,000 रुपये के लिए 'क' की सम्पदा बन्धक करता है। यह नई संविदा है और पुरानी को निर्वाचित कर देती है।

(ग) 'क' एक संविदा के अधीन 'ख' को 1,000 रुपये का देनदार है। 'ग' का 'ख' 1,000 रुपये का देनदार है। ‘क’ | को 'ख' आदेश देता है कि वह अपनी बहियों में 'ग' के नाम 1,000 रुपये जमा कर दे, किन्तु 'ग' इस ठहराव के लिए अनुमति नहीं देता। ‘ख’ अब भी 'ग' का 1,000 रुपये का देनदार है और कोई नई संविदा नहीं की गई है

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