Section 59 The Army Act, 1950

 

Section 59 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 59 The Army Act, 1950  :Offences relating to courts- martial. Any person subject to this Act who commits any of the

following offences, that is to say,-

(a) being duly summoned or ordered to attend as a witness before a court martial, wilfully or without

reasonable excuse, makes default in attending; or

(b) refuses to take an oath or make an affirmation legally required by a court- martial to be taken or

made; or

(c) refuses to produce or deliver any document in his power or control legally required by a courtmartial to be produced or delivered by him; or

(d) refuses when a witness to answer any question which he is by law bound to answer; or

(e) is guilty of contempt of court- martial by using insulting or threatening language, or by causing any

interruption or disturbance in the proceedings of such court; shall, on conviction by court- martial, be

liable to suffer imprison- ment for a term which may extend to three years or such less punishment as

is in this Act mentioned.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 59 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 59 का विवरण :  - सेना-न्यायालयों से सम्बद्ध अपराध - इस अधिनियम के अध्यधीन का कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्:-

(क) किसी सेना-न्यायालय के समक्ष साक्षी के तौर पर हाजिर होने के लिए सम्यक् रूप से समनित या आदिष्ट होने पर हाजिर होने में जानबूझकर या युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना व्यतिक्रम करेगा, अथवा

(ख) उस शपथ या प्रतिज्ञान को, जिसके लिए या किए जाने की अपेक्षा सेना-न्यायालय द्वारा वैध रूप से की गई हो, या करने से इन्कार करेगा, अथवा

(ग) अपनी शक्ति या नियंत्रण में की किसी दस्तावेज को, उसके द्वारा पेश या परिदत्त किए जाने की अपेक्षा सेनान्यायालय द्वारा वैध रूप से की गई हो, पेश या परिदत्त करने से इन्कार करेगा, अथवा

(घ) जब कि वह साक्षी है तब किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करेगा जिसका उत्तर देने के लिए वह विधि द्वारा आबद्ध है, अथवा

(ङ) अपमानकारी या धमकी भरी भाषा का प्रयोग करके, या सेना-न्यायालय की कार्यवाहियों में कोई विघ्न या विक्षोभ कारित करने के द्वारा सेना-न्यायालय के अवमान का दोषी होगा,

सेना-न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा।



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