Section 51 Contract Act 1872

 

Section 51 Contract Act 1872 in Hindi and English 



Section 51 Contract Act 1872 :Promisor not bound to perform, unless reciprocal promisee ready and willing to perform - When a contract consists of reciprocal promises to be simultaneously performed, no promisor need perform his promise unless the promisee is ready and willing to perform his reciprocal promise. 

Illustrations

(a) A and B contract that A shall deliver goods to B to be paid for by B on delivery. A need not deliver the goods, unless B is ready and willing to pay for the goods on delivery. 

B need not pay for the goods, unless A is ready and willing to deliver them on payment

(b) A and B contract that A shall deliver goods to B at a price to be paid by installments, the first installment to be paid on delivery. A need not deliver, unless B is ready and willing to pay the first installment on delivery.

B need not pay the first installment, unless A is ready and willing to deliver the goods on payment of the first installment.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 51 of Contract Act 1872 :

Saradamani Kandappan vs S. Rajalakshmi & Ors on 4 July, 2011

Asha John Divianathan vs Vikram Malhotra . on 26 February, 2021

The Trustees Of The Port Ofmadras vs K. P. V. Sheik Mohamed Rowther& Co. on 11 December, 1962

National Insurance Company Ltd vs Seema Malhotra And Ors on 20 February, 2001

Chatterjee Petrochem(I) Pvt.Ltd vs Haldia Petrochemicals Ltd.& Ors on 30 September, 2011

Surinder Kaur (D) Tr.Lr. vs Bahadur Singh(D) Tr.Lrs. on 11 September, 2019

Mohammed vs Pushpalatha on 21 July, 2008



भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 51 का विवरण :  -  वचनदाता पालन करने के लिए आबद्ध नहीं है जब तक कि व्यतिकारी वचनग्रहीता पालन के लिए तैयार और रजामन्द न हो -- जबकि कोई संविदा साथ-साथ पालन किए जाने वाले व्यतिकारी वचनों से गठित हो तब किसी भी वचनदाता के लिए अपने वचन का पालन करना आवश्यक नहीं है जब तक कि वचनग्रहीता अपने व्यतिकारी वचन का पालन करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।

दृष्टान्त

(क) 'क' और 'ख' संविदा करते हैं कि ‘ख’ को ‘क’ माल परिदत्त करेगा जिसके लिए संदाय माल के परिदान पर 'ख' द्वारा किया जाएगा। माल का परिदान करना क' के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि ‘ख’ परिदान पर माल के लिए संदाय करने को तैयार और रजामन्द न हो। |

माल के लिए संदाय करना 'ख' के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि संदाय पर माल को परिदत्त करने के लिए 1 'क' तैयार और रजामन्द न हो।

(ख) 'क' और 'ख' संविदा करते हैं कि 'क' किस्तों में दी जाने वाली कीमत पर ‘ख’ को माल परिदत्त करेगा और पहली किस्त परिदान पर दी जानी है। माल का परिदान करना 'क' के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि 'ख' परिदान पर पहली किस्त देने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।

पहली किस्त देना 'ख' के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि वह पहली किस्त में संदाय पर माल परिदत्त करनेके लिए तैयार और रजामन्द न हो.


 


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