Section 43 Contract Act 1872

Section 43 Contract Act 1872 in Hindi and English 



Section 43 Contract Act 1872 :Any one of joint promisors may be compelled to perform - When two or more persons make a joint promise, the promisee may, in the absence of express agreement to the contrary, compel any one or more of such joint promisors to perform the whole of the promise.

Each promisor may compel contribution - Each of two or more joint promisors may compel every other joint promisor to contribute equally with himself to the performance of the promise, unless a contrary intention appears from the contract.

Sharing of loss by default in contribution - If any one of two or more joint promisors makes default in such contribution, the remaining joint promisors must bear the loss arising from such default in equal shares.

Explanation - Nothing in this section shall prevent a surety from recovering, from his principal, payments made by the surety on behalf of the principal, or entitle the principal to recover anything from the surety on account of payment made by the principal.


Illustrations

(a) A, B and C jointly promise to pay D 3,000 rupees. D may compel either A or B or C to pay him 3,000 rupees.

(b) A, B and C jointly promise to pay D the sum of 3,000 rupees. C is compelled to pay the whole. A is insolvent, but his assets are sufficient to pay one-half of his debts. C is entitled to receive 500 rupees from A's estate, and 1,250 rupees from B.

(c) A, B and C are under a joint promise to pay D 3,000 rupees. C is unable to pay anything, and A is compelled to pay the whole. A is entitled to receive 1,500 rupees from B.

(d) A, B and C are under a joint promise to pay D 3,000 rupees. A and B being only sureties for C. C fails to pay. A and B are compelled to pay the whole sum. They are entitled to recover it from C.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 43 of Contract Act 1872 :

Anuj Jain Interim Resolution  vs Axis Bank Limited on 26 February, 2020

Kidar Lall Seal And Another vs Hari Lall Seal on 18 December, 1951

Hardev Singh vs Gurmail Singh (Dead) By Lrs on 2 February, 2007

Sri Babu Ram Alias Prasad vs Sri Indra Pal Singh (Dead) By Lrs on 13 August, 1998

Bulchand Chandiram Of Bombay vs Bank Of India Ltd., Fort, Bombay on 19 April, 1968

D.N. Dutta vs Income-Tax Investigation on 7 March, 1960

Pimpri Chinchwad Municipal vs M/S Gayatri Construction Company on 6 August, 2008

Chairman, Board Of Trustees, vs M/S Arebee Star Maritime on 7 March, 2018

Avitel Post Studioz Limited And vs Hsbc Pi Holding (Mauritius) on 19 August, 2020

Rama Shankar Singh & Anr vs Mst. Shyamlata Devi And Ors on 10 October, 1968



भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 43 का विवरण :  -  संयुक्त वचनदाताओं में से कोई भी पालन के लिए विवश किया जा सकेगा -- जबकि दो या अधिक व्यक्ति कोई संयुक्त वचन दें तब तत्प्रतिकूल अभिव्यक्त करार के अभाव में वचनग्रहीता, ऐसे संयुक्त वचनदाताओं में से किसी एक या अधिक को समग्र वचन के पालन के लिए विवश कर सकेगा। |

हर एक वचनदाता अभिदाय करने के लिए विवश कर सकेगा -- दो या अधिक संयुक्त वचनदाताओं में से हर एक अन्य संयुक्त वचनदाता को वचन के पालन में अपने समान अभिदाय करने के लिए विवश कर सकेगा, जब तक कि तत्प्रतिकूल आशय संविदा से प्रतीत न हो। |

अभिदाय में व्यतिक्रम से हुई हानि में अंश बटाना -- यदि दो या अधिक संयुक्त वचनदाताओं में से कोई एक ऐसा अभिदाय करने में व्यतिक्रम करे तो शेष संयुक्त वचनदाताओं को ऐसे व्यतिक्रम से उद्भूत हानि को समान अंशों में सहन करना होगा।

स्पष्टीकरण -- इस धारा की कोई भी बात किसी प्रतिभू द्वारा मूल ऋणी की ओर से किए गए संदायों को अपने मूल ऋणी से उस प्रतिभू को वसूल करने से निवारित नहीं करेगी और न मूल ऋणी द्वारा किए गए संदायों के कारण उसे उस प्रतिभू से कुछ भी वसूल करने का हकदार बनाएगी।


दृष्टान्त

(क) 'क', 'ख' और 'ग' 3,000 रुपये 'घ' को देने का संयुक्तत: वचन देते हैं। 'च' चाहे 'क' या 'ख' या 'ग' को विवश कर सकेगा कि वह उसे 3,000 रुपये दे।

(ख) “क', 'ख' और 'ग' 3,000 रुपये 'घ' को देने का संयुक्तत: वचन देते हैं। 'ग' पूर्ण राशि देने के लिए विवश किया जाता है। ‘क’ दिवालिया है, किन्तु उसकी आस्तियाँ उसके ऋणों के अद्भुग के चुकाने के लिए पर्याप्त हैं। | 'क' की सम्पदा से 500 रुपये और ‘ख’ से 1,250 रुपये पाने का 'ग' हकदार है।

(ग) 'घ' को 3,000 रुपये देने का संयुक्तत: वचन 'क', 'ख' और 'ग' ने दिया है। 'ग' कुछ भी देने के लिए असमर्थ है, और 'क' पूर्ण राशि देने के लिए विवश किया जाता है। 'ख' से 'क' 1,500 रुपये पाने का हकदार है।

(घ) 'घ' को 3,000 रुपये देने का संयुक्त वचन 'क', 'ख' और 'ग' ने दिया है। 'ग' के लिए 'क' और 'ख' प्रतिभू मात्र हैं। 'ग' रुपयों के संदाय में असफल रहता है। 'क' और 'ख' पूर्ण राशि देने के लिए विवश किए जाते हैं। वे उसे 'ग' से वसूल करने के हकदार हैं।


 


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