Section 32 The Army Act, 1950

 


 Section 32 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 32 The Army Act, 1950  :Priority in respect of army personnel' s litigation.

(1) On the presentation to any court by or on behalf of any person subject to this Act of a certificate

from the proper military authority of leave of absence having been granted to or applied for by him for

the purpose of prosecuting or defending any suit or other proceeding in such court, the court shall, on

the application of such person, arrange, so far as may be possible, for the hearing and final disposal of

such suit or other proceeding within the period of the leave so granted or applied for.

(2) The certificate from the proper military authority shall state the first and last day of the leave or

intended leave, and set forth a description of the case with respect to which the leave was granted or

applied for.

(3) No fee shall be payable to the court in respect of the presentation of any such certificate, or of any

application by or on behalf of any such person, for priority for the hearing of his case.

(4) Where the court is unable to arrange for the hearing and final disposal of the suit or other

proceeding within the period of such leave or intended leave as aforesaid, it shall record its reasons

for its inability to do so, and shall cause a copy thereof to be furnished to such person on his

application without any payment whatever by him in respect either of the application for such copy or

of the copy itself.

(5) If in any case a question arises as to the proper military authority qualified to grant such certificate

as aforesaid, such question shall at once be referred by the court to an officer having power not less

than a brigade or equivalent commander whose decision shall be final



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section32 of The Army Act, 1950  :

U.S.A. Cable Networks vs State Of Maharashtra on 1 March, 2011

Bombay High Court Cites 38 - Cited by 1 - Full Document



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 32 का विवरण :  - सेना के कार्मिकों के मुकदमों के बारे में पूर्विकता - (1) इस अधिनियम के अध्यधीन के किसी व्यक्ति के द्वारा या की ओर से उचित सैनिक प्राधिकारी का एक यह प्रमाणपत्र किसी न्यायालय के समक्ष उपस्थित किए जाने पर कि उस न्यायालय में वाद या अन्य कार्यवाही चलाने या उसमें प्रतिरक्षा करने के प्रयोजन के लिए अनुपस्थिति छुट्टी उसे अनुदत्त की गई है या उसके द्वारा आवेदित है, न्यायालय उस व्यक्ति के आवेदन पर, यावत् सम्भव यह इन्तजाम करेगा कि उस वाद या अन्य कार्यवाही की सुनवाई या अंतिम निपटारा ऐसी अनुदत्त या आवेदित छुट्टी की कालावधि के भीतर हो जाए।

(2) उचित सैनिक प्राधिकारी के प्रमाणपत्र में छुट्टी का या आशयित छुट्टी का प्रथम और अन्तिम दिन कथित होगा और उस मामले का वर्णन दिया गया होगा जिसके लिए छुट्टी अनुदत्त या आवेदित की गई है।

(3) ऐसे किसी प्रमाणपत्र के उपस्थापन की बाबत या उसके मामले की सुनवाई को पूर्विकता दिए जाने के लिए ऐसे किसी व्यक्ति के द्वारा या की ओर से किसी आवेदन की बाबत कोई भी फीस न्यायालय को देय न होगी।

(4) जहां कि न्यायालय यह इन्तजाम करने में असमर्थ होता है कि वाद या अन्य कार्यवाही की सुनवाई और अन्तिम निपटारा यथापूर्वोक्त छुट्टी या आशयित छुट्टी की कालावधि के भीतर हो जाएं वहां वह ऐसा न कर सकने के अपने कारणों को अभिलिखित कर देगा और उसकी एक प्रतिलिपि ऐसे व्यक्ति को उसके आवेदन पर, प्रतिलिपि के आवेदन के या स्वयं प्रतिलिपि के लिए उसके द्वारा कोई भी संदाय किए गए बिना, दिला देगा।

(5) यदि किसी मामले में यह प्रश्न उठे कि ऐसा प्रमाणपत्र अनुदत्त करने के लिए, जैसा पूर्वोक्त है, अर्हित उचित सैनिक प्राधिकारी कौन है तो वह प्रश्न न्यायालय द्वारा तत्काल ऐसे आफिसर को जो ब्रिगेड कमान्डर से अन्यून शक्ति धारण करने वाला है या समतुल्य समादेशक है निर्देशित किया जाएगा जिसका विनिश्चय अंतिम होगा।



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