Section 23 Negotiable Instruments Act, 1881

 

Section 23 Negotiable Instruments Act, 1881 in Hindi and English 



Section 23 Negotiable Instruments Act, 1881 :In calculating the date at which a promissory note or bill of exchange. made payable at stated number of months after date or after sight, or after a certain event, is at maturity, the period stated shall be held to terminate on the day of the month which corresponds with the day on which the instrument is dated, or presented for acceptance or sight, or noted for non-acceptance, or protested for non-acceptance, or the event happens, or, where the instrument is a bill of exchange, made payable a stated number of months after sight and has been accepted for honor, with the day on which it was so accepted. If the month in which the period would terminate has no corresponding day, the period shall be held to terminate on the last day of such month.

Illustrations

(a) A negotiable instrument, dated 29th January, 1878, is made payable at one month after date. The instrument is at maturity on the third day after the 28th February, 1878.

(b) A negotiable instrument, dated 30th August, 1878, is made payable three months after date. The instrument is at maturity on the 3rd December, 1878.

(c) A promissory note or bill of exchange, dated 31st August, 1878, is made payable three months after date. The instrument is at maturity on the 3rd December, 1878.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 23 of Negotiable Instruments Act, 1881 :

Sangeetaben Mahendrabhai Patel vs State Of Gujarat & Anr on 23 April, 2012

Binoy Kumar Mishra vs State Of Jharkhand And Anr on 31 March, 2017

P. Mohanraj vs M/S. Shah Brothers Ispat Pvt. Ltd. on 1 March, 2021



परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 23 का विवरण :  -  उस तारीख की गणना करने में, जिसको वह वचन-पत्र या विनिमय-पत्र, जो ऐसे रचित है कि वह तारीख या दर्शन से निश्चित मासों की संख्या या किसी निश्चित घटना के पश्चात् देय है, परिपक्व हो जाता है वह कथित कालावधि, मास के उसी दिन को, जो लिखत की तारीख का है या जिसको लिखत प्रतिग्रहण या दर्शन के लिए उपस्थापित की गई है या अप्रतिग्रहण के लिए टिप्पणित है या अप्रतिग्रहण के लिए प्रसाक्ष्यित की गई है या वह घटना होती है या जहाँ लिखत दर्शन के कथित संख्या के मास पश्चात् देय होने वाला विनिमय-पत्र है और आदरणार्थ प्रतिगृहीत किया गया है वहाँ उस तारीख वाले दिन को, जिसको वह ऐसे प्रतिगृहीत की गई थी, पर्यवसित समझी जाएगी । यदि जिस मास में वह कालावधि पर्यवसित होगी, उसमें वह तारीख वाला दिन नहीं है तो वह कालावधि ऐसे मास के अन्तिम दिन को पर्यवसित समझी जाएगी ।

दृष्टान्त

(क) 29 जनवरी, 1878 तारीख की एक परक्राम्य लिखत ऐसे रचित है कि वह उस तारीख से एक मास के पश्चात् देय है। लिखत 28 फरवरी, 1878 के पश्चात् तीसरे दिन परिपक्व हो जाती है।

(ख) 30 अगस्त, 1878 तारीख की एक परक्राम्य लिखत ऐसे रचित है कि वह उस तारीख के तीन मास पश्चात् देय है । लिखत 3 दिसम्बर, 1878 को परिपक्व हो जाती है ।

(ग) 31 अगस्त, 1878 तारीख का एक वचन-पत्र या विनिमय-पत्र ऐसे रचित है कि वह उस तारीख के तीन मास पश्चात् देय है । लिखत 3 दिसम्बर, 1878 को परिपक्व हो जाती है ।


To download this dhara / Section of Contract Act in pdf format use chrome web browser and use keys [Ctrl + P] and save as pdf.

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय संविधान से संबंधित 100 महत्वपूर्ण प्रश्न उतर

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

संविधान के अनुच्छेद 19 में मूल अधिकार | Fundamental Right of Freedom in Article 19 of Constitution