Section 223 Contract Act 1872

 


Section 223 Contract Act 1872 in Hindi and English 



Section 223 Contract Act 1872 :Agent to be indemnified against consequences of acts done in good faith - Where one person employs another to do an act, and the agent does the act in good faith, the employer is liable to indemnify the agent against the consequences of that act, though it may cause an injury to the rights of third persons.

illustrations

(a) A, a decree-holder and entitled to execution of B‟s goods, requires the officer of the Court to seize certain goods, representing them to be the goods of B. The officer seizes the goods, and issued by C, the true owner of the goods. A is liable to indemnify the officer for the sum which he is compelled to pay to C, in consequence of obeying A‟s directions.

(b) B, at the request of A, sells goods in the possession of A, but which A had no right to dispose of, B does not know this, and hands over the proceeds of the sale to A. Afterwards C, the true owner of the goods, sues B and recovers the value of the goods and costs. A is liable to indemnify B for what he has been compelled to pay to C, and for B‟s own expenses.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 223 of Contract Act 1872 :

Lalit Kumar Jain vs Union Of India on 21 May, 2021

Firm Of Pratapchand Nopaji vs Firm Of Kotrike Venkatta Setty & on 12 December, 1974



भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 223 का विवरण :  -  सद्भाव से किये गए कार्यों के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति की जाएगी -- जहाँ कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है। वहाँ वह नियोजक उस कार्य के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता है।

दृष्टान्त

(क) 'क', एक डिक्रीदार है, जो ‘ख’ के माल के विरुद्ध उस डिक्री का निष्पादन कराने का हकदार है. कुछ माल को 'ख' का माल व्यपदिष्ट करके न्यायालय के ऑफिसर से अपेक्षा करता है कि इह उस माल को अभिगृहीत कर ले। ऑफिसर उस माल का अभिग्रहण करता है और उस माल के वास्तविक स्वामी 'ग' द्वारा बाद लाया जाता है। ‘क’ उस राशि के लिए उस ऑफिसर की क्षतिपूर्ति करने का दायी है जिसे वह 'क' के निदेशों के पालन के परिणामस्वरूप 'ग' को देने के लिए विवश किया जाता है।

(ख) 'क' की प्रार्थना पर 'ख' उस माल को बेचता है जो क' के कब्जे में तो है किन्तु जिसके व्ययन का 'क' को कोई अधिकार नहीं था। ‘ख’ यह बात नहीं जानता और विक्रय के आगम'क' को दे देता है। तत्पश्चात् 'ख' पर उस माल का वास्तविक स्वामी 'ग' वाद लाता है और माल का मूल्य और खर्चा वसूल कर लेता है। 'ग' को जो कुछ देने के लिए 'ख' विवश किया गया है उसकी और 'ख' के अपने व्ययों की क्षतिपूर्ति करने के लिए 'ख' के प्रति ‘क’ दायी है

To download this dhara / Section of Contract Act in pdf format use chrome web browser and use keys [Ctrl + P] and save as pdf.

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय संविधान से संबंधित 100 महत्वपूर्ण प्रश्न उतर

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

संविधान के अनुच्छेद 19 में मूल अधिकार | Fundamental Right of Freedom in Article 19 of Constitution