Section 222 Contract Act 1872

 Section 222 Contract Act 1872 in Hindi and English 



Section 222 Contract Act 1872 :Agent to be indemnified against consequences of lawful acts — The employer of an agent is bound to indemnify him against the consequences of all lawful acts done by such agent in exercise of the authority conferred upon him.

Illustrations

(a) B, at Singapure, under instructions from A of Calcutta, contracts with C to deliver certain goods to him. A does not send the goods to B, and C sues B for breach of contract. B informs A of the suit, and A authorizes him to defend the suit. B defends the suit, and is compelled to pay damages and costs, and incurs expenses. A is liable to B for such damages, costs and expenses.

(b) B, a broker at Calcutta, by the orders of A, a merchant there, contracts with C for the purchase of 10 casks of oil for A. Afterwards A refuses to receive the oil, and C sues B. B informs A, who repudiates the contract altogether. B defends, but unsuccessfully, and has to pay damages and costs and incurs expenses. A is liable to B for such damages, costs and expenses.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 222 of Contract Act 1872 :

Firm Of Pratapchand Nopaji vs Firm Of Kotrike Venkatta Setty & on 12 December, 1974

Kishan Lal And Another vs Bhanwar Lal on 12 May, 1954

M/S. Alopi Parshad & Sons, Ltd vs The Union Of India on 20 January, 1960

Lalit Kumar Jain vs Union Of India on 21 May, 2021



भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 222 का विवरण :  -  विधिपूर्ण कार्यों के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति की जाएगी -- अभिकर्ता का नियोजन उन सब विधिपूर्ण कार्यों के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने के लिए आबद्ध है जो उस अभिकर्ता ने उसे प्रदत्त प्राधिकार के प्रयोग में किये हों।

दृष्टान्त

(क) कलकत्ते के ‘क’ के अनुदेशों के अधीन 'ग' को कुछ माल परिदान करने के लिए 'ग' से ‘ख’ सिंगापुर में संविदा करता है। ‘ख’ को ‘क’ माल नहीं भेजता और 'ग' संविदा भंग के लिए 'ख' पर वाद लाता। 'क' को 'ख' वाद की इत्तिला देता है और 'क' उसे वाद में प्रतिरक्षा करने के लिए प्राधिकृत करता है। ‘ख’ वाद में प्रतिरक्षा करता है और नुकसानी तथा खर्च देने के लिए विवश किया जाता है और वह व्यय उपगत करता है। 'क' ऐसी नुकसानी, खर्चे और व्ययों के लिए 'ख' के प्रति दायी है।

(ख) कलकत्ते का एक दलाल ‘ख’ वहाँ के एक वणिक क के आदेशों के अनुसार 'ग' से 'क' के लिए दस पीपे तेल खरीदने की संविदा करता है। तत्पश्चात् 'क' वह तेल लेने से इन्कार कर देता है और 'ख' पर 'ग' वादलाता है। ‘क’ को 'ख' इत्तिला देता है। 'क' संविदा का पूर्णत: निराकरण कर देता है। ‘ख’ प्रतिरक्षा करता है किन्तु असफल रहता है और उसे नुकसानी और खर्चे देने पड़ते हैं और व्यय उठाने पड़ते हैं; 'क' ऐसी नुकसानी, खर्चे और व्ययों के लिए 'ख' के प्रति दायी है


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