Section 208 Contract Act 1872

 Section 208 Contract Act 1872 in Hindi and English 



Section 208 Contract Act 1872 :When termination of agent's authority takes effect as to agent, and as to third persons — The termination of the authority of an agent does not, so far as regards the agent, take effect before it becomes known to him, or, so far as regards third persons, before it becomes known to them.

Illustrations

(a) A directs B to sell goods for him, and agrees to give B five percent. commission on the price fetched by the goods. A afterwards by letter, revokes B's authority. B after the letter is sent, but before he receives it, sells the goods for 100 rupees. The sale is binding on A, and B is entitled to five rupees as his commission.

(b) A, at Madras, by letter directs B to sell for him some cotton lying in a warehouse in Bombay, and afterwards, by letter revokes his authority to sell, and directs B to send the cotton to Madras. B after receiving the second letter, enters into a contract with C, who knows of the first letter, but not of the second for the sale to him of the cotton. C pays B the money, with which B absconds. C's payment is good as against A.

(c) A directs B, his agent, to pay certain money to C. A dies, and D takes out probate to his will. B, after A's death, but before hearing of it, pays the money to C. The payment is good as against D, the executor.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 208 of Contract Act 1872 :

Assistant General Manager State vs Radhey Shyam Pandey on 2 March, 2020

Lalit Kumar Jain vs Union Of India on 21 May, 2021



भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 208 का विवरण :  -  अभिकर्ता के प्राधिकार का पर्यवसान कब अभिकर्ता के सम्बन्ध में और वन पर-व्यक्तियों के सम्बन्ध में प्रभावी होता है -- अभिकर्ता के प्राधिकार का पर्यवसान, जहाँ तक अभिकर्ता से सम्बन्ध है, उसे उसका ज्ञान होने से पूर्व अथवा जहाँ तक पर-व्यक्तियों से सम्बन्ध है उन्हें उसका ज्ञान होने से पूर्व, प्रभावी नहीं होता।

दृष्टान्त

(क) ‘ख’ को ‘क’ अपनी ओर से माल बेचने का निर्देश देता है और माल की जो कीमत मिले उस पर 'ख' को पाँच प्रतिशत कमीशन देने का करार करता है। तत्पश्चात् 'क' पत्र द्वारा 'ख' के प्राधिकार का प्रतिसंहरण करता है। ‘ख’ उस पत्र के भेजे जाने के पश्चात् किन्तु उसकी प्राप्ति से पूर्व माल को 100 रुपये में बेच देता है। ‘क’ इस विक्रय से आबद्ध है और ‘ख’ पाँच रुपये कमीशन का हकदार है।

(ख) 'क', जो मद्रास में है, पत्र द्वारा अपनी ओर से ‘ख’ को मुम्बई में एक भाण्डागार में रखी हुई कुछ रूई बेचने का निर्देश देता है और तत्पश्चात् पत्र द्वारा उसके विक्रय प्राधिकार का प्रतिसंहरण करता है और 'ख' को उस रूई को मद्रास भेजने का निर्देश देता है। ख', दूसरा पत्र पाने के पश्चात् 'ग' के साथ, जिसे पहले पत्र का ज्ञान है किन्तु दुसरे का नहीं, उस रूई को उसे बेचने की संविदा करता है। ‘ख’ को ‘ग उसकी कीमत संदत्त कर देता है और 'ख' उसे लेकर फरार हो जाता है। 'क' के विरुद्ध 'ग' का संदाय प्रभावी है।

(ग) 'क' अपने अभिकर्ता 'ख' को अमुक धनराशि 'ग' को देने का निर्देश देता है। ‘क’ मर जाता है और 'ग' उसकी विल का प्रोबेट लेता है। ‘क’ की मृत्यु के पश्चात् किन्तु मृत्यु की खबर सुनने के पूर्व 'ग' को 'ख' रुपये संदत्त कर देता है। निष्पादक 'ग' के विरुद्ध यह संदाय प्रभावी है।


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