Section 194 Contract Act 1872

 

Section 194 Contract Act 1872 in Hindi and English 



Section 194 Contract Act 1872 :Relation between principal and person duly appointed by agent to act in business of agency - Where an agent, holding an express or implied authority to name another person to act for the principal in the business of the agency, has named another person accordingly, such person is not a sub-agent, but an agent of the principal for such part of the business of the agency as is entrusted to him.

Illustrations

(a) A directs B, his solicitor, to sell his estate by auction, and to employ an auctioneer for the purpose. B names C, an auctioneer, to conduct the sale. C is not a sub-agent, but is As agent for the conduct of the sale.

(b) A authorizes B, a merchant in Calcutta, to recover the moneys due to A from C & Co. В instructs D, a solicitor, to take legal proceedings against C & Co. for the recovery of the money. D is not a sub-agent, but is solicitor for A.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 194 of Contract Act 1872 :

Qamar Shaffi Tyabji vs The Commissioner, Excess Profits on 18 April, 1960

Union Of India vs Amar Singh on 28 October, 1959

The Aggarwal Chamber Of vs M/S Ganpat Rai Hira Lal on 11 November, 1957

Union Of India vs Mohd. Nizam on 18 October, 1979

Union Of India (Uoi) vs Mohd. Nazim on 18 October, 1979

Lalit Kumar Jain vs Union Of India on 21 May, 2021



भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 194 का विवरण :  -  अभिकर्ता द्वारा अभिकरण के कारबार में कार्य करने के लिए सम्यक् रूप से नियुक्त व्यक्ति और मालिक के बीच का सम्बन्ध -- जहाँ तक वह अभिकर्ता, जो अभिकरण के कारबार में मालिक की ओर से कार्य करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को नामित करने का अभिव्यक्त या विवक्षित प्राधिकार रखता है, किसी अन्य व्यक्ति को तद्नुसार नामित कर देता है वहाँ ऐसा व्यक्ति उपाभिकर्ता नहीं है वरन वह अभिकरण के कारबार के ऐसे भाग के लिए, जो उसे सौंपा गया हो, मालिक का अभिकर्ता है।

दृष्टान्त

(क) के अपने सालिसिटर ‘ख’ को अपनी सम्पदा नीलाम द्वारा बेचने और उस प्रयोजन के लिए एक नीलामकर्ता नियोजित करने का निर्देश देता है। ‘ख’ विक्रय-संचालन के लिए एक नीलामकर्ता 'ग' को नामित करता है। 'ग' उपाभिकर्ता नहीं है वरन् विक्रय-संचालन के लिए 'क' का अभिकर्ता है।

(ख) 'क' कलकत्ते के एक वणिक ‘ख’ को ‘ग' एण्ड कम्पनी द्वारा अपने को शोध्य धन वसूल करने के लिए प्राधिकृत करता है। सालिसिटर 'ग' को 'ख' उस धन की वसूली के लिए 'ग' एण्ड कम्पनी के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने का आदेश देता है। 'ग' उपाभिकर्ता नहीं है वरन् 'क' का सालिसिटर है।


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