Section 15 The Arms Act, 1959

 

Section 15 The Arms Act, 1959 in Hindi and English 



Section 15 The Arms Act, 1959:(1) A licence under section 3 shall, unless revoked earlier, continue in force for a period of three years from the date on which it is granted:

Provided that such a licence may be granted for a shorter period if the person by whom the licence is required so desires or if the licensing authority for reasons to be recorded in writing considers in any case that the licence should be granted for a shorter period.

(2) A licence under any other provision of Chapter II shall, unless revoked earlier, continue in force for such period from the date on which it is granted as the licensing authority may in each case determine.

(3) Every licence shall, unless the licensing authority for reasons to be recorded in writing otherwise decides in any case, be renewable for the same period for which the licence was originally granted and shall be so renewable from time to time, and the provisions of sections 13 and 14 shall apply to the renewal of a licence as they apply to the grant thereof.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 15 of The Arms Act, 1959 :

Mohmed Amin @ Amin C.R.M.Shaikh & vs C.B.I Tr.Its Director on 18 November, 2008

Ahmed Hussein Vali Mohammed  vs State Of Gujarat on 12 May, 2009

Ahmed Hussein Vali Mohammed vs State Of Gujarat on 12 May, 2009

State Of Rajasthan vs Ajit Singh & Ors on 12 October, 2007

Sanjay Dutt vs State Of Maharashtra on 21 March, 2013

Samir Chatterjee vs State Of West Bengal on 21 March, 1975

Mohd.Farooq A.G.Chipa Rangari & vs State Of Maharashtra on 6 August, 2009

Neel & Nirenjan Majumdar vs The State Of West Bengal on 23 May, 1972

Lachmandas Kewalram Ahujaand  vs The State Of Bombay on 20 May, 1952

Jia Lal vs The Delhi Administration on 3 May, 1962



आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 15 का विवरण :  -  (1) धारा 3 के अधीन की अनुज्ञप्ति यदि पहले ही प्रतिसंहृत न कर दी जाए तो वह उस तारीख से, जिसको वह अनुदत्त की जाए, तीन वर्ष की कालावधि के लिए प्रवृत्त बनी रहेगी :

परन्तु ऐसी अनुज्ञप्ति लघुतर कालावधि के लिए अनुदत्त की जा सकेगी यदि वह व्यक्ति जिसके द्वारा वह अनुज्ञप्ति अपेक्षित है वैसा चाहे या यदि अनुज्ञापन प्राधिकारी उन कारणों से जो लेखन द्वारा अभिलिखित किए जाएंगे किसी मामले में यह समझे कि अनुज्ञप्ति लघुतर कालावधि के लिए अनुदत की जानी चाहिए।

(2) अध्याय 2 के किसी अन्य उपबन्ध के अधीन की अनुज्ञप्ति यदि पहले ही प्रतिसंहृत न कर दी जाए तो उस तारीख से, जिसको वह अनुदत्त की जाए, ऐसी कालावधि के लिए प्रवृत्त बनी रहेगी जिससे अनुज्ञापन प्राधिकारी हर एक मामले में अवधारित करे ।

(3) हर अनुज्ञप्ति उस दशा के सिवाय जिसमें अनुज्ञप्ति प्राधिकारी उन कारणों से जो लेखन द्वारा अभिलिखित किए जाएंगे किसी मामले में अन्यथा विनिश्चित करे, उतनी ही कालावधि के लिए नवीकरणीय होगी, जितनी के लिए कि वह अनुज्ञप्ति मूलतः: अनुदत्त की गई थी और समय-समय पर इसी प्रकार नवीकरणीय होगी और धाराओं 13 और 14 के उपबन्ध अनुज्ञप्ति के नवीकरण को वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे उसके अनुदान को लागू होते हैं।


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