Section 144 Indian Evidence Act 1872


Section 144 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 

Section Section 143 Indian Evidence Act 1872 Evidence Act 1872 :Evidence as to matters in writing -- Any witness may be asked, whilst under examination, whether any contract, grant or other disposition of property, as to which he is giving evidence, was not contained in a document, and if he says that it was, or if he is about to make any statement as to the contents of any document, which, in the opinion of the Court, ought to be produced, the adverse party may object to such evidence being given until such document is produced, or until facts have been proved which entitle the party who called the witness to give secondary evidence of it.

Explanation -- A witness may give oral evidence of statements made by other persons about the contents of documents if such statements are in themselves relevant facts.


The question is, whether A assaulted B.

C deposes that he heard A say to D -- “B wrote a letter accusing me of theft, and I will be revenged on him”. This statement is relevant, as showing A's motive for the assault, and evidence may be given of it, though no other evidence is given about the letter.

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 144 Indian Evidence Act 1872:

Masood Alam Etc vs Union Of India & Ors on 11 January, 1973

Chuharmal S/O Takarmal Mohnani vs Commissioner Of Income-Tax, on 2 May, 1988

Kartar Singh vs State Of Punjab on 11 March, 1994

Satnarain Sao vs The State Of Bihar on 18 April, 1972

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 144  का विवरण :  -  लेखबद्ध विषयों के बारे में साक्ष्य -- किसी साक्षी से, जबकि वह परीक्षाधीन है, यह पूछा जा सकेगा कि क्या कोई संविदा, अनुदान या संपत्ति का अन्य व्ययन, जिसके बारे में वह साक्ष्य दे रहा है, किसी दस्तावेज में अन्तर्विष्ट नहीं था, और यदि वह कहता है कि वह था, या यदि वह किसी ऐसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु के बारे में कोई कथन करने ही वाला है, जिसे न्यायालय की राय में, पेश किया जाना चाहिए, तो प्रतिपक्षी आक्षेप कर सकेगा कि ऐसा साक्ष्य तब तक नहीं दिया जाए जब तक ऐसी दस्तावेज पेश नहीं कर दी जाती, या जब तक वे तथ्य साबित नहीं कर दिए जाते, जो उस पक्षकार को, जिसने साक्षी को बुलाया है, उसका द्वितीयक साक्ष्य देने का हक देते हैं।

स्पष्टीकरण -- कोई साक्षी उन कथनों का, जो दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में अन्य व्यक्तियों द्वारा किए गए थे, मौखिक साक्ष्य दे सकेगा, यदि ऐसे कथन स्वयंमेव सुसंगत तथ्य हैं।


प्रश्न यह है कि क्या क ने ख पर हमला किया।

'ग' अभिसाक्ष्य देता है कि उसने 'क' को 'घ' से यह कहते सुना है कि "ख ने मुझे एक पत्र लिखा था, जिसमें मुझ पर चोरी का अभियोग लगाया था और मैं उससे बदला लूंगा।" यह कथन हमले के लिए 'क' का आशय दर्शित करने वाला होने के नाते सुसंगत है और उसका साक्ष्य दिया जा सकेगा, चाहे पत्र के बारे में कोई अन्य साक्ष्य न भी दिया गया हो।

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