Section 14 The Arms Act, 1959


Section 14 The Arms Act, 1959 in Hindi and English 

Section 14 The Arms Act, 1959:(1) Notwithstanding anything in section 13, the licensing authority shall refuse to grant―

(a) a licence under section 3, section 4 or section 5 where such licence is required in respect of any prohibited arms or prohibited ammunition;

(b) a licence in any other case under Chapter II,―

(i) where such licence is required by a person whom the licensing authority has reason to believe—

(1) to be prohibited by this Act or by any other law for the time being in force from acquiring, having in his possession or carrying any arms or ammunition, or

(2) to be of unsound mind, or

(3) to be for any reason unfit for a licence under this Act; or

(ii) where the licensing authority deems it necessary for the security of the public peace or for public safety to refuse to grant such licence

(2) The licensing authority shall not refuse to grant any licence to any person merely on the ground that such person does not own or possess sufficient property.

(3) Where the licensing authority refuses to grant a licence to any person it shall record in writing the reasons for such refusal and furnish to that person on demand a brief statement of the same unless in any case the licensing authority is of the opinion that it will not be in the public interest to furnish such statement.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 14 of The Arms Act, 1959 :

Jia Lal vs The Delhi Administration on 3 May, 1962

Pabitar Singh vs State Of Bihar on 22 March, 1972

Usmanbhai Dawoodbhai Menon & Ors. vs State Of Gujarat on 14 March, 1988

Ranbir Yadav vs State Of Bihar on 21 March, 1995

Birju vs State Of M.P on 14 February, 2014

Birju vs State Of M.P on 14 February, 1947

Gunwantlal vs The State Of Madhya Pradesh on 3 May, 1972

The State Rep. By Inspector Of vs Mariya Anton Vijay on 1 July, 2015

Gunwantilal vs The State Of Madhya Pradesh on 3 May, 1972

आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 14 का विवरण :  -  (1) धारा 13 में किसी बात के होते हुए भी, अनुज्ञापन प्राधिकारी -

(क) धारा 3, धारा 4, धारा 5, के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से वहां इन्कार करेगा, जहां कि ऐसी अनुज्ञप्ति किन्हीं प्रतिषिद्ध आयुधों या प्रतिषिद्ध गोलाबारूद के बारे में अपेक्षित हो ;

(ख) अध्याय 2 के अधीन के किसी अन्य मामले में अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से वहां इन्कार करेगा,-

(i) जहां कि ऐसी अनुज्ञप्ति उस व्यक्ति द्वारा अपेक्षित है, जिसके बारे में अनुज्ञापन प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है, कि वह--

(1) किसी आयुध या गोलाबारूद को अजित करने, अपने कब्जे में रखने या वहन करने से इस अधिनियम या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा प्रतिषिद्ध है, अथवा

(2) विकृत-चित्त का है, अथवा

(3) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए किसी कारण से अयोग्य है, अथवा

(ii) जहां कि अनुज्ञापन प्राधिकारी लोक शान्ति की सुरक्षा के लिए या लोक क्षेम के लिए ऐसी अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इन्कार करना आवश्यक समझता है।

(2) अनुज्ञापन प्राधिकारी किसी भी व्यक्ति को कोई भी अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से केवल इस आधार पर इन्कार नहीं करेगा कि ऐसे व्यक्ति के स्वामित्व या कब्जे में पर्याप्त सम्पत्ति नहीं है ।

(3) जहां कि अनुज्ञापन प्राधिकारी किसी व्यक्ति को अनुज्ञप्ति देने से इन्कार करे वहां वह ऐसे इन्कार के लिए कारण लेखन द्वारा अभिलिखित करेगा और उनका संक्षिप्त कथन मांग किए जाने पर उस व्यक्ति को उस दशा के सिवाय देगा जिसमें अनुज्ञापन प्राधिकारी की यह राय हो कि ऐसा कथन देना लोकहित में नहीं होगा ।

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