Sction 90 The Army Act, 1950

 

Sction 90 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 90 The Army Act, 1950  :Deductions from pay and allowances of officers. The following penal deductions may be made from the pay and allowances of an officer, that is to say,-

(a) all pay and allowances due to an officer for every day he absents himself without leave, unless a satisfactory explanation has been given to his commanding officer and has been approved by the Central Government;

(b) all pay and allowances for every day while he is in custody or under suspension from duty on a charge for an offence for which he is afterwards convicted by a criminal court or a court- martial or by an officer exercising authority under section 83 or section 84; 

(c) any sum required to make good the pay of any person subject to this Act which he has unlawfully retained or unlawfully refused to pay;

(d) any sum required to make good such compensation for any expenses, loss, damage or destruction occasioned by the commission of an offence as may be determined by the court- martial by whom he is convicted of such offence, or by an officer exercising authority under section 83 or section 84

(e) all pay and allowances ordered by a court- martial 1[ to be forfeited or stopped;

(f) any sum required to pay a fine awarded by a criminal court or a court- martial exercising jurisdiction under section 69; 

1. Omitted by Act 37 of 1992, s. 7.

(g) any sum required to make good any loss, damage, or destruction of public or regimental property which, after due investigation, appears to the Central Government to have been occasioned by the wrongful act or negligence on the part of the officer;

(h) all pay and allowances forfeited by order of the Central Government if the officer is found by a court of inquiry constituted by 1[ the Chief of the Army Staff] in this behalf, to have deserted to the enemy, or while in enemy hands, to have served with, or under the orders of, the enemy, or in any manner to have aided the enemy, or to have allowed himself to be taken prisoner by the enemy through want of due precaution or through disobedience of orders or wilful neglect of duty, or having been taken prisoner by the enemy, to have failed to rejoin his service when it was possible to do so;

(i) any sum required by order of the Central Government 2[ or any prescribed officers] to be paid for the maintenance of his wife or his legitimate or illegitimate child or towards the cost of any relief given by the said Government to the said wife or child.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 90 of The Army Act, 1950  :

Jaideep Singh Sandhu vs Union Of India And Ors. on 8 May, 1995

Delhi High Court 

May Geraldine Duckworth vs George Francis Duckworth on 28 August, 1918

Bombay High Court 

Union Of India & Ors vs Major General Madan Lal Yadav  on 22 March, 1996

Supreme Court of India 

Sergeant Ajit Kumar Shukla vs Union Of India & Ors on 10 November, 2020

Delhi High Court 

Lt Col Mukul Chauhan vs Indian Army on 29 June, 2017

Central Information Commission 

T.S. Ramani vs The Superintendent Of Prisons, on 31 January, 1984

Madras High Court 

Sampurnanand Mishra vs Union Of India And 3 Others on 22 December, 2015

Allahabad High Court 

National Ex-Servicemen vs Union Of India And Anr. on 23 February, 1993

Delhi High Court 

Colonel D.D. Pawar, C-25415-A vs Commander Hq Andhra Sub-Area, on 3 July, 2001

Andhra High Court 

Ex-Espoy Rajbir Singh vs Union Of India And Ors. on 27 May, 1988

Delhi High Court 



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 90 का विवरण :  - आफ़िसरों के वेतन और भत्तों में से कटौतियां - किसी भी आफिसर के वेतन और भत्तों में से निम्नलिखित शास्तिक कटौतियां की जा सकेंगी, अर्थात् :

(क) उस हर दिन के लिए, जिस दिन वह छुट्टी के बिना अनुपस्थित रहता है आफिसर को शोध्य सभी वेतन और भत्ते तब के सिवाय जब कि उसके कमान आफिसर को समाधानप्रद स्पष्टीकरण दे दिया गया है और केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है,

(ख) ऐसे हर दिन के सभी वेतन और भत्ते जब वह किसी ऐसे अपराध के आरोप पर अभिरक्षाधीन या कर्तव्य से विलम्बित रहा है जिस अपराध के लिए वह तत्पश्चात् किसी दण्ड न्यायालय या सेना न्यायालय द्वारा या किसी ऐसे आफिसर द्वारा जो धारा 83 या धारा 84 के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है दोषसिद्ध किया जाता है,

(ग) इस अधिनियम के अध्यधीन के किसी व्यक्ति के उस वेतन की जो उसने विधिविरुद्ध रूप से प्रतिधृत कर रखा है या जिसे देने से उसने विधिविरुद्ध रूप से इन्कार कर दिया है, प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षित कोई राशि,

(घ) किसी अपराध के किए जाने से हुए किन्हीं व्ययों, हानि, नुकसान या नाश के लिए ऐसे प्रतिकर की, जो उस सेना - न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा वह ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठरराया जाता है, या किसी ऐसे आफिसर द्वारा, जो धारा 83 या धारा 84 के अधीन प्राधिकार का प्रयोग कर रहा है अवधारित किया जाए, प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षित कोई राशि,

(ङ) वे सब वेतन और भत्ते जिनके समपहरण या रोक दिए जाने का आदेश किसी सेना - न्यायालय द्वारा दिया गया हो,

(च) किसी दण्ड न्यायालय द्वारा या किसी ऐसे सेना - न्यायालय द्वारा जो धारा 69 के अधीन अधिकारिता का प्रयोग कर रहा है अधिनिर्णीत जुर्माने के संदाय के लिए अपेक्षित कोई राशि,

(छ) लोक - सम्पत्ति या रेजिमेन्ट - सम्पत्ति की किसी ऐसी हानि, नुकसान या नाश की जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार को सम्यक् अन्वेषण के पश्चात् यह प्रतीत होता है कि वह उस आफिसर के सदोष कार्य से या उपेक्षा से घटित हुआ है, प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षित कोई राशि,

(ज) केन्द्रीय - सरकार के आदेश से समपहृत सब वेतन और भत्ते, यदि [थल सेनाध्यक्ष] द्वारा उस निमित्त गठित जांच अधिकरण का यह निष्कर्ष हो कि वह आफिसर शत्रु से जा मिला था या जब वह शत्रु के हाथ में था तब उसने शत्रु की ओर से या शत्रु के आदेशों के अधीन सेवा की थी या उसने किसी रीति में शत्रु की सहायता की थी या सम्यक् पूर्वावधानी न बरत कर या आदेशों की अवज्ञा या कर्तव्य की जानबूझकर उपेक्षा करने द्वारा उसने स्वयं को शत्रु द्वारा कैदी बना लिया जाने दिया था या शत्रु द्वारा कैदी बना लिए जाने पर तब जब उसके लिए अपनी सेवा पर वापस आ जाना सम्भव था, वह ऐसा करने में असफल रहा था,

(झ) केन्द्रीय सरकार या किसी विहित आफिसर के आदेश द्वारा उसकी पत्नी या उसकी धर्मज या अर्धमज सन्तान के भरण - पोषण के लिए दिए जाने के लिए या उक्त सरकार द्वारा उक्त पत्नी या सन्तान को दी गई सहायता के खर्चे के निमित्त दिए जाने के लिए अपेक्षित कोई राशि।



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