भरण पोषण

 भरण पोषण

सीआरपीसी की धारा 125 के अनुसार नियम व्यक्ति भरण पोषण प्राप्त कर सकते हैं-

• ऐसी पत्नी जो अपना भरण पोषण न कर सकती हो। 

• कैसे व्यस्त संतान जो विवाहित हो या कुंवारी हो भरण पोषण प्राप्त कर सकती है। 

• शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर संतान भरण पोषण प्राप्त कर सकती है। 

• बूढ़े माता-पिता भरण पोषण की मांग कर सकते हैं जो अपना गुजारा न चला पा रहे हो। 

• ऐसी अवयस्क विवाहित पुत्री जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो। 

भाई ताहिरा बनाम अली हुसैन विशाली छोटिया 1979 के मामले में कोर्ट ने कहा कि तलाकशुदा पत्नी भी भरण पोषण प्राप्त कर सकती है। किंतु हिंदू पुरुष एक पत्नी के रहते दूसरा विवाह कर लेता है तो दूसरी पत्नी पति से भरण-पोषण लेने का दावा नहीं कर सकती क्योंकि उनका विवाह अवैध माना जाएगा। 

•यदि कोई पत्नी स्वयं धन कम आती है और अपना भरण-पोषण करने में समर्थ है तो वह पति से भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती।

• वह पत्नी भी अपने पति से गुजारा भत्ता नहीं ले सकती जो अपनी मर्जी से या आपसी सहमति से तलाक लेती है। 

कोर्ट में चल रहा हूं दोनों पक्षियों की स्थिति देखकर कोर्ट अंतरिम भरण पोषण की व्यवस्था करता है।  सन 1989 मैं इदरीश अली बनाम रमेश खातून और आने के मामले में गुवाहाटी कोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण की व्यवस्था की।  अंतरिम भरण-पोषण उस समय तक मिलता है जब तक मामला कोर्ट में चलता है। 

वे माता-पिता जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है और कोर्ट में साबित हो जाता है कि उनकी संतान उनके भरण-पोषण नहीं दे रही है तो न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग भरण पोषण देने का आदेश दिया।  भरण पोषण की मात्रा पक्षकारों की हैसियत के अनुसार होती है। 

कोई तलाकशुदा पत्नी अपने पति से उस समय तक भरण पोषण प्राप्त कर सकती है जब तक वह दूसरी शादी नहीं करती| यदि कोई व्यक्ति कोर्ट के आदेश के बाद भी भरण-पोषण नहीं देता है तो कोर्ट उसे 1 महीने के लिए जेल भेज सकता है। कोई रखैल भरण पोषण की मांग नहीं कर सकती।  आपसी सहमति से अलग रहने वाली पत्नी भी भरण पोषण की मांग नहीं कर सकती। 

1990 में ललित मोहन बनाम तृप्ता देवी की महत्वपूर्ण मामले में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि पति भी अपनी पत्नी से भरण-पोषण की मांग कर सकता है।  मम्मी ने पति घायलों में काली कमाई करने में अयोग्य था इस मामले में पत्नी भरण पोषण करने में समर्थ थी। 

सिराज मोहम्मद खान जान मोहम्मद खान बनाम हाफिजुनि्नसा यासीन खान और अन्य 1981 के मामले में माननीय कोर्ट ने कहा कि जब पति बच्चा पैदा करने में असमर्थ हो तो पत्नी पति से अलग रहते हुए भी भरण पोषण की मांग कर सकती है।  पति के अत्याचारों या दहेज के लिए पति द्वारा प्रताड़ित पत्नी अपने पति से अलग रहते हुए भी भरण पोषण का भत्ता प्राप्त करती है।  क्यों चढ़ा दिया लेकिन सीआरपीसी की धारा 125 (4)के अनुसार नियम परिस्थितियों में एक पत्नी अपने पति से भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकते-

किसी दूसरे मर्द के साथ सहवास करती हो। 

बिना किसी कारण के पति के साथ ना रहती हो। 

पति और पत्नी आपकी इच्छा से अलग रह रहे हो। 

मैं मूवी बीवी बनाना सिखाइए 1977 के मामले में और एक अन्य मामले में हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि जारत की दशा लगातार होनी चाहिए| केवल एक बार जारता के कारण कोई औरत अपने भरण-पोषण के अधिकार नहीं खोती। 

एक मामले में कोर्ट ने कहा कि पुलिस के साथ दोस्ती को जारता नहीं माना जाएगा| कोई पति इस कारण भरण पोषण देने से मना नहीं कर सकता कि उसकी पत्नी किसी पुरुष से दोस्ती रखती है। 

आईपीसी की धारा 497 के अनुसार यदि कोई औरत अपने पति की सहमति के बिना या छुपकर किसी दूसरे मर्द के साथ सहवास करती है तो उसको जारता कहा जाता है। 

मुस्लिम औरतों पर भरतपुर से संबंधी कानून मुस्लिम स्त्री अधिनियम 1986  है।  एक कानून के अनुसार कोई मुस्लिम औरत भरण पोषण निम्न परिस्थितियों में प्राप्त कर सकती है-

• मुस्लिम औरत केवल इद्दत की अवधि तक भरण पोषण की प्राप्ति अपने पति से कर सकती है।  सामान्य तत्व अपने पति से 4 माह 10 दिन तक भरण-पोषण ले सकती है। 

• इद्दत की अवधि के बाद कोई भी मुस्लिम औरत भरण-पोषण उन लोगों से प्राप्त कर सकती है जो उसके मरने के बाद उसकी संपत्ति के मालिक होंगे। 

• यदि उसके रिश्तेदार भरण पोषण नहीं दे सकते हैं तो वह राज्य के वक्त बोर्ड से भरण-पोषण ले सकती हैं। 

अब्दुल्ला और अन्य बनाम एबी मुन्ना सय्यद भाई और अन्य के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि दत्त की अवधि के बाद भरण पोषण का अधिकार 1986 का अधिनियम छीन नहीं सकता।  कोई भी मुस्लिम मिस्त्री धारा 125 के अनुसार भरण पोषण प्राप्त कर सकती है।

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