Section 28 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 28 The Trade Marks Act, 1999: 

Rights conferred by registration.—

(1) Subject to the other provisions of this Act, the registration of a trade mark shall, if valid, give to the registered proprietor of the trade mark the exclusive right to the use of the trade mark in relation to the goods or services in respect of which the trade mark is registered and to obtain relief in respect of infringement of the trade mark in the manner provided by this Act.

(2) The exclusive right to the use of a trade mark given under sub-section (1) shall be subject to any conditions and limitations to which the registration is subject.

(3) Where two or more persons are registered proprietors of trade marks, which are identical with or nearly resemble each other, the exclusive right to the use of any of those trade marks shall not (except so far as their respective rights are subject to any conditions or limitations entered on the register) be deemed to have been acquired by any one of those persons as against any other of those persons merely by registration of the trade marks but each of those persons has otherwise the same rights as against other persons (not being registered users using by way of permitted use) as he would have if he were the sole registered proprietor.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 28 The Trade Marks Act, 1999: 

Shakti Bhog Foods Limited vs Parle Products Private Limited on 23 December, 2014

Lupin Ltd vs Johnson And Johnson on 23 December, 2014

M/S Matrimony.Com Limited vs Kalyan Jewellers India Limited on 13 March, 2020

Orchid Chemicals & vs Wockhardt Limited on 12 April, 2013

M/S.Kaleesuwari Refinery Pvt vs M/S.S.N.R.Dhall Mill



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 28 का विवरण : 

रजिस्ट्रीकरण से प्रदत्त अधिकार-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण, यदि वह विधिमान्य हो, तो उस व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को, उस माल या उन सेवाओं के संबंध में, जिनकी बाबत वह व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, उस व्यापार चिह्न के उपयोग का और इस अधिनियम द्वारा उपबंधित रीति में उस व्यापार चिह्न के अतिलंघन की बाबत अनुतोष अभिप्राप्त करने का, अनन्य अधिकार प्रदान करेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रदत्त व्यापार चिह्न के उपयोग का अनन्य अधिकार उन्हीं शर्तों और मर्यादाओं के अधीन होगा जिनके अधीन रजिस्ट्रीकरण है ।

(3) जहां दो या अधिक व्यक्ति ऐसे व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी हैं, जो एक दूसरे के तद्रूप हैं या निकटतः सदृश हैं, वहां केवल व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण से यह नहीं समझा जाएगा कि उनमें से किसी एक व्यक्ति ने उनमें से किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध (जहां तक उनके पृथक् अधिकार रजिस्टर में प्रविष्ट शर्तों या मर्यादाओं के अधीन हैं, उनके सिवाय) उन व्यापार चिह्नों के उपयोग का अनन्य अधिकार अर्जित कर लिया है, किन्तु उनमें से हर एक व्यक्ति के अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध (जो अनुज्ञात उपयोग के रूप में उपयोग करने वाले रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता नहीं हैं) अन्यथा, वही अधिकार होंगे, जो उसके होते, यदि वह एकमात्र रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी होता ।

 


To download this dhara / Section of  The Trade Marks Act, 1999 in pdf format use chrome web browser and use keys [Ctrl + P] and save as pdf.

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय संविधान से संबंधित 100 महत्वपूर्ण प्रश्न उतर

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

संविधान के अनुच्छेद 19 में मूल अधिकार | Fundamental Right of Freedom in Article 19 of Constitution