Section 11 The Trade Marks Act, 1999

 

Section 11 The Trade Marks Act, 1999: 

Relative grounds for refusal of registration.—

(1) Save as provided in section 12, a trade mark shall not be registered if, because of—

(a) its identity with an earlier trade mark and similarity of goods or services covered by the trade mark; or

(b) its similarity to an earlier trade mark and the identity or similarity of the goods or services covered by the trade mark, there exists a likelihood of confusion on the part of the public, which includes the likelihood of association with the earlier trade mark.

(2) A trade mark which—

(a) is identical with or similar to an earlier trade mark; and

(b) is to be registered for goods or services which are not similar to those for which the earlier trade mark is registered in the name of a different proprietor, shall not be registered, if or to the extent, the earlier trade mark is a well-known trade mark in India and the use of the later mark without due cause would take unfair advantage of or be detrimental to the distinctive character or repute of the earlier trade mark.

(3) A trade mark shall not be registered if, or to the extent that, its use in India is liable to be prevented—

(a) by virtue of any law in particular the law of passing off protecting an unregistered trade mark used in the course of trade; or

(b) by virtue of law of copyright.

(4) Nothing in this section shall prevent the registration of a trade mark where the proprietor of the earlier trade mark or other earlier right consents to the registration, and in such case the Registrar may register the mark under special circumstances under section 12. Explanation.—For the purposes of this section, earlier trade mark means—

(a) a registered trade mark or convention application referred to in section 154 which has a date of application earlier than that of the trade mark in question, taking account, where appropriate, of the priorities claimed in respect of the trade marks;

(b) a trade mark which, on the date of the application for registration of the trade mark in question, or where appropriate, of the priority claimed in respect of the application, was entitled to protection as a well-known trade mark.

(5) A trade mark shall not be refused registration on the grounds specified in sub-sections (2) and (3), unless objection on any one or more of those grounds is raised in opposition proceedings by the proprietor of the earlier trade mark.

(6) The Registrar shall, while determining whether a trade mark is a well-known trade mark, take into account any fact which he considers relevant for determining a trade mark as a well-known trade mark including—

(i) the knowledge or recognition of that trade mark in the relevant section of the public including knowledge in India obtained as a result of promotion of the trade mark;

(ii) the duration, extent and geographical area of any use of that trade mark;

(iii) the duration, extent and geographical area of any promotion of the trade mark, including advertising or publicity and presentation, at fairs or exhibition of the goods or services to which the trade mark applies;

(iv) the duration and geographical area of any registration of or any application for registration of that trade mark under this Act to the extent they reflect the use or recognition of the trade mark;

(v) the record of successful enforcement of the rights in that trade mark; in particular, the extent to which the trade mark has been recognised as a well-known trade mark by any court or Registrar under that record.

(7) The Registrar shall, while determining as to whether a trade mark is known or recognised in a relevant section of the public for the purposes of sub-section (6), take into account—

(i) the number of actual or potential consumers of the goods or services;

(ii) the number of persons involved in the channels of distribution of the goods or services;

(iii) the business circles dealing with the goods or services, to which that trade mark applies.

(8) Where a trade mark has been determined to be well-known in at least one relevant section of the public in India by any court or Registrar, the Registrar shall consider that trade mark as a well-known trade mark for registration under this Act.

(9) The Registrar shall not require as a condition, for determining whether a trade mark is a well-known trade mark, any of the following, namely:—

(i) that the trade mark has been used in India;

(ii) that the trade mark has been registered;

(iii) that the application for registration of the trade mark has been filed in India;

(iv) that the trade mark—

(a) is well known in; or

(b) has been registered in; or

(c) in respect of which an application for registration has been filed in, any jurisdiction other than India; or

(v) that the trade mark is well-known to the public at large in India.

(10) While considering an application for registration of a trade mark and opposition filed in respect thereof, the Registrar shall—

(i) protect a well-known trade mark against the identical or similar trade marks;

(ii) take into consideration the bad faith involved either of the applicant or the opponent affecting the right relating to the trade mark.

(11) Where a trade mark has been registered in good faith disclosing the material informations to the Registrar or where right to a trade mark has been acquired through use in good faith before the commencement of this Act, then, nothing in this Act shall prejudice the validity of the registration of that trade mark or right to use that trade mark on the ground that such trade mark is identical with or similar to a well-known trade mark.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 11 The Trade Marks Act, 1999: 

Tata Communications Ltd vs Telecom Regulatory Authority Of  on 11 November, 2016

Tata Communications Ltd vs Telecom Regulatory Authority Of  on 11 November, 2016

Tata Communications Ltd vs Telecom Regulatory Authority Of 

Star India Private Limited vs Department Of Industrial Policy

Kalyanpuri Flour Mills Private vs Jugal Kishore Harbanslal on 13 March, 2002



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 11 का विवरण : 

रजिस्ट्रीकरण से इंकार करने के सापेक्ष आधार-(1) धारा 12 में यथा उपबन्धित के सिवाय, किसी व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण नहीं किया जाएगा यदि, -

(क) किसी पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के साथ उसकी पहचान और उस व्यापार चिह्न के अन्तर्गत आने वाले माल या सेवाओं की समरूपता; या

(ख) किसी पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के साथ उसकी समरूपता और उस व्यापार चिह्न के अन्तर्गत आने वाले माल या सेवाओं के साथ पहचान या समरूपता,के कारण जनसाधारण में भ्रम पैदा होने की संभावना है, जिनके अन्तर्गत पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के साथ उसके सहयुक्त किए जाने की संभावना है ।

(2) कोई ऐसा व्यापार चिह्न जो, -

(क) किसी पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के तद्रूप है या उसके समरूप है; और

(ख) ऐसे माल या ऐसी सेवाओं के लिए रजिस्ट्रीकृत किया जाना है जो उनके समरूप नहीं है जिनके लिए पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न किसी भिन्न स्वत्वधारी के नाम रजिस्ट्रीकृत किया गया है,

रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा यदि या उस सीमा तक जिस तक कि पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न भारत में एक सुविख्यात व्यापार चिह्न है और पश्चात्वर्ती चिह्न का उपयोग किसी सम्यक् हेतुक के बिना, पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के सुभिन्न स्वरूप या ख्याति का अनुचित लाभ लेगा या उसके विरुद्ध होगा ।

(3) कोई व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा यदि या उस सीमा तक जिस तक उसके भारत में उपयोग को-

(क) किसी विधि, विशिष्टतया व्यापार के अनुक्रम में प्रयुक्त अरजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का संरक्षण करने के लिए चला देने वाली विधि के आधार पर; या

(ख) प्रतिलिप्यधिकार की विधि के आधार पर,

निवारित किया जा सकता है ।

(4) इस धारा की कोई बात, उस दशा में व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का निवारण नहीं करेगी जहां पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न या अन्य पूर्ववर्ती अधिकार के स्वत्वधारी ने रजिस्ट्रीकरण की सहमति दे दी है और ऐसी दशा में, रजिस्ट्रार धारा 12 के अधीन, विशेष परिस्थितियों के अधीन चिह्न का रजिस्ट्रीकरण कर सकेगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-

(क) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न या धारा 18 के अधीन कोई ऐसा आवेदन, जिस पर फाइल किए जाने की कोई पूर्वतर तारीख पड़ी है या धारा 36ङ में निर्दिष्ट अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण या धारा 154 में निर्दिष्ट अभिसमय आवेदन, जिस पर प्रश्नगत व्यापार चिह्न के पूर्व की आवेदन की तारीख है, जहां समुचित हो, वहां व्यापार चिह्न के बारे में दावाकृत पूर्विकताओं का ध्यान रखते हुए,]

(ख) कोई व्यापार चिह्न, जो प्रश्नगत व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन की तारीख को या जहां समुचित हो, वहां आवेदन के बारे में दावाकृत पूर्विकता की तारीख को, सुविख्यात व्यापार चिह्न के रूप में संरक्षण का हकदार था ।

(5) किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण से उपधारा (2) और उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट आधारों पर इंकार नहीं किया जाएगा, जब तक कि उन आधारों में से किसी एक या अधिक आधार पर पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी द्वारा विरोधी कार्यवाहियों में आक्षेप न किया गया हो ।

(6) रजिस्ट्रार यह अवधारित करते हुए कि कोई व्यापार चिह्न सुविख्यात व्यापार चिह्न है या नहीं, ऐसे किसी तथ्य को गणना में लेगा जो वह किसी व्यापार चिह्न को सुविख्यात व्यापार चिह्न के रूप में अवधारित करते समय सुसंगत समझता है, इसमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं: -

(i) जनता के सुसंगत भाग में उक्त व्यापार चिह्न का ज्ञान या मान्यता जिसके अन्तर्गत उक्त व्यापार चिह्न के संप्रवर्तन के परिणामस्वरूप अभिप्राप्त भारत में ज्ञान भी है;

(ii) उक्त व्यापार चिह्न के किसी उपयोग की अवधि, सीमा और भौगोलिक क्षेत्र;

(iii) उक्त व्यापार चिह्न के किसी संप्रवर्तन की अवधि, सीमा और भौगोलिक क्षेत्र जिसमें उक्त माल या सेवाओं के मेलों या प्रदर्शनियों में विज्ञापन या प्रचार और प्रस्तुति भी सम्मिलित है जिन्हें उक्त व्यापार चिह्न लागू होता है;(iv) इस अधिनियम के अधीन उक्त व्यापार चिह्न के किसी रजिस्ट्रीकरण की अवधि और भौगोलिक क्षेत्र या रजिस्ट्रीकरण के लिए कोई आवेदन उस सीमा तक जहां तक वह उक्त व्यापार चिह्न के उपयोग या मान्यता को प्रतिबिम्बित करता है;

(v) उक्त व्यापार चिह्न में अधिकारों के सफलतापूर्वक प्रवर्तन का अभिलेख, विशिष्टतया वह सीमा, जहां तक उक्त अभिलेख के अधीन किसी न्यायालय या रजिस्ट्रार द्वारा उक्त व्यापार चिह्न को सुविख्यात व्यापार चिह्न के रूप में मान्यता दी गई है ।

(7) रजिस्ट्रार, उपधारा (6) के प्रयोजनार्थ यह अवधारित करते समय कि कोई व्यापार चिह्न जनता के किसी सुसंगत भाग में ज्ञात या मान्यताप्राप्त है या नहीं, निम्नलिखित को ध्यान में रखेगा-

(i) माल या सेवाओं के वास्तविक या संभावित उपभोक्ताओं की संख्या;(ii) माल या सेवाओं की वितरण प्रणालियों में अंतर्वलित व्यक्तियों की संख्या;

(iii) माल या सेवाओं में व्यवहार करने वाले कारोबारी सर्किल,

जिनको वह व्यापार चिह्न लागू होता है ।

(8) जहां किसी न्यायालय या रजिस्ट्रार द्वारा भारत में जनता के कम से कम एक सुसंगत भाग में किसी व्यापार चिह्न को सुविख्यात अवधारित किया गया हो वहां रजिस्ट्रार उक्त व्यापार चिह्न को इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए सुविख्यात व्यापार चिह्न समझेगा ।

(9) रजिस्ट्रार यह अवधारित करने के लिए कि कोई व्यापार चिह्न सुविख्यात व्यापार चिह्न है या नहीं निम्नलिखित में से किसी की शर्त के रूप में अपेक्षा नहीं करेगा, अर्थात्: -

(i) व्यापार चिह्न का भारत में उपयोग किया गया है;

(ii) व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत किया गया है;

(iii) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन भारत में दाखिल किया गया है;

(iv) व्यापार चिह्न भारत से भिन्न किसी अधिकारिता में: -

(क) सुविख्यात है; या

(ख) रजिस्ट्रीकृत किया गया है; या

(ग) उसके संबंध में रजिस्ट्रीकरण का आवेदन दाखिल किया गया है; या

(v) उक्त व्यापार चिह्न भारत में साधारणतया जनता में सुविख्यात है ।

(10) रजिस्ट्रार, किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन और उसके संबंध में दाखिल किए गए विरोधों पर विचार करते समय, -

(i) किसी सुविख्यात व्यापार चिह्न का, तद्रूप या समरूप व्यापार चिह्नों से संरक्षण करेगा;(ii) आवेदक या विरोधी के, व्यापार चिह्न से संबंधित अधिकारों को प्रभावित करने वाले असद्भाव पर विचार करेगा

(11) जहां कोई व्यापार चिह्न रजिस्ट्रार को तात्त्विक सूचना प्रकट करते हुए, सद्भावपूर्वक रजिस्ट्रीकृत किया गया है या किसी व्यापार चिह्न का अधिकार इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व सद्भावपूर्वक उपयोग से अर्जित किया गया है वहां इस अधिनियम की किसी बात से उक्त व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता या उक्त व्यापार चिह्न के उपयोग के अधिकार पर, इस आधार पर कि उक्त व्यापार चिह्न किसी अन्य सुविख्यात, व्यापार चिह्न के तद्रूप या समरूप है, कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।



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