Section 20 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 20 The Trade Marks Act, 1999: 

Advertisement of application.—

(1) When an application for registration of a trade mark has been accepted whether absolutely or subject to conditions or limitations, the Registrar shall, as soon as may be after acceptance, cause the application as accepted together with the conditions or limitations, if any, subject to which it has been accepted, to be advertised in the prescribed manner: Provided that the Registrar may cause the application to be advertised before acceptance if it relates to a trade mark to which sub-section (1) of section 9 and sub-sections (1) and (2) of section 11 apply, or in any other case where it appears to him that it is expedient by reason of any exceptional circumstances so to do.

(2) Where—

(a) an application has been advertised before acceptance under sub-section (1); or

(b) after advertisement of an application,—

(i) an error in the application has been corrected; or

(ii) the application has been permitted to be amended under section 22, the Registrar may in his discretion cause the application to be advertised again or in any case falling under clause (b) may, instead of causing the application to be advertised again, notify in the prescribed manner the correction or amendment made in the application.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 20 The Trade Marks Act, 1999: 

Nv Distilleries Pvt. Ltd. vs Frost Falcon Distilleries Ltd. on 15 November, 2018

Tak Chand Fillumal vs Western India Match Co. Ltd. on 6 January, 1955

Vareed S/O. Kunnan Ouseph vs Mary, Daughter Of Adattukaran  on 29 May, 1968

S.V. Sivalinga Nadar And Sons vs Joint Registrar Of Trade Marks And on 3 September, 2004

Bharat Sanchar Nigam Limited vs Telecom Regulatory Authority Of on 3 March, 2003



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 20 का विवरण : 

 आवेदन का विज्ञापन-(1) जहां व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का आवेदन चाहे आत्यंतिकतः या शर्तों और मर्यादाओं के अधीन स्वीकार किया गया है वहां रजिस्ट्रार स्वीकृति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, यथास्वीकृत आवेदन को उन शर्तों और मर्यादाओं सहित, यदि कोई हों, जिनके अधीन वह स्वीकार किया गया है, विहित रीति में विज्ञापित कराएगा:

 परन्तु यदि आवेदन ऐसे व्यापार चिह्न से संबंधित है, जिसको धारा 9 की उपधारा (1) और धारा 11 की उपधारा (1) और उपधारा (2) लागू होती है या किसी अन्य दशा में, जहां उसे यह प्रतीत होता है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण ऐसा करना समीचीन है वहां, रजिस्ट्रार आवेदन को स्वीकार करने के पूर्व विज्ञापित करा सकेगा ।

(2) जह-

(क) आवेदन को उपधारा 

(1) के अधीन स्वीकृति के पूर्व विज्ञापित किया गया है; या  

(ख) आवेदन के विज्ञापन के पश्चात्-

(i) आवेदन में कोई गलती शुद्ध की गई है; या

(ii) आवेदन को धारा 22 के अधीन संशोधित करने की अनुज्ञा दी गई है,

वहां रजिस्ट्रार, स्वविवेकानुसार आवेदन को पुनः विज्ञापित करा सकेगा या खण्ड (ख) में आने वाले किसी मामले में, आवेदन में, आवेदन को पुनः विज्ञापित कराने के स्थान पर, आवेदन में की गई शुद्धि या संशोधन को विहित रीति में अधिसूचित कर सकेगा ।



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