Section 46 The Trade Marks Act, 1999

 

Section 46 The Trade Marks Act, 1999: 

Proposed use of trade mark by company to be formed, etc.—

(1) No application for the registration of a trade mark in respect of any goods or services shall be refused nor shall permission for such registration be withheld, on the ground only that it appears that the applicant does not use or propose to use the trade mark if the Registrar is satisfied that—

(a) a company is about to be formed and registered under the Companies Act, 1956 (1 of 1956) and that the applicant intends to assign the trade mark to that company with a view to the use thereof in relation to those goods or services by the company, or

(b) the proprietor intends it to be used by a person, as a registered user after the registration of the trade mark.

(2) The provisions of section 47 shall have effect, in relation to a trade mark registered under the powers conferred by this sub-section, as if for the reference, in clause (a) of sub-section (1) of that section, to the intention on the part of an applicant for registration that a trade mark should be used by him there were substituted a reference to the intention on his part that it should be used by the company or registered user concerned.

(3) The tribunal may, in a case to which sub-section (1) applies, require the applicant to give security for the costs of any proceedings relating to any opposition or appeal, and in default of such security being duly given, may treat the application as abandoned.

(4) Where in a case to which sub-section (1) applies, a trade mark in respect of any goods or services is registered in the name of an applicant who, relies on intention to assign the trade mark to a company, then, unless within such period as may be prescribed or within such further period not exceeding six months as the Registrar may, on application being made to him in the prescribed manner, allow, the company has been registered as the proprietor of the trade mark in respect of those goods or services, the registration shall cease to have effect in respect thereof at the expiration of that period and the Registrar shall amend the register accordingly.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 46 The Trade Marks Act, 1999: 

Patel Field Marshal Agencies And vs P.M Diesels Ltd. And Ors. on 29 November, 2017

Infosys Technologies Ltd vs Jupiter Infosys Ltd. & Anr on 9 November, 2010

American Home Products vs Mac Laboratories Private Limited on 30 September, 1985

M/S. Thukral Mechanical Works vs P.M. Diesels Pvt. Ltd. & Anr on 18 December, 2008

Vishnudas Trading As Vishnudas vs The Vazir Sultan Tobaccoco. td.  on 9 July, 1996

Whirlpool Corporation vs Registrar Of Trade Marks, Mumbai &  on 26 October, 1998

Whirlpool Corporation vs Registrar Of Trade Marks, Mumbai & on 26 October, 1998

Kabushiki Kaisha Toshiba vs Tosiba Appliances Co. & Ors on 16 May, 2008

Kaviraj Pandit Durga Dutt Sharma vs Navaratna Pharmaceutical on 20 October, 1964

Lakha Ram Sharma vs Balar Marketing P.Ltd.& Ors on 27 November, 2013




व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 46 का विवरण : 

निर्माण, आदि की जाने वाली कंपनी द्वारा व्यापार चिह्न का प्रस्तावित उपयोग-(1) केवल इस आधार पर यह प्रतीत होता है कि आवेदक व्यापार चिह्न का उपयोग नहीं करता है या उपयोग करने की प्रस्थापना नहीं करता है, किसी भी माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन को नामंजूर और ऐसे रजिस्ट्रीकरण की अनुज्ञा को विधारित नहीं किया जाएगा, यदि रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि-

(क) कोई कंपनी, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन निर्मित और रजिस्ट्रीकृत होने ही वाली है और आवेदक का आशय कंपनी द्वारा उन माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के उपयोग के उद्देश्य से उस कंपनी को उस व्यापार चिह्न का समनुदेशन करना है, या

(ख) स्वत्वधारी का व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् किसी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में उसका उपयोग किए जाने का आशय है ।

(2) इस उपधारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के संबंध में धारा 47 के उपबंध वैसे ही प्रभावी होंगे मानो उस धारा की उपधारा (1) के खण्ड (क) में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदक के इस आशय के प्रति निर्देश के स्थान पर कि व्यापार चिह्न उसके द्वारा उपयोग किया जाना चाहिए उसके इस आशय के प्रति निर्देश प्रतिस्थापित किया गया है कि उसका उपयोग सम्बद्ध कंपनी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता द्वारा किया जाना चाहिए ।

(3) अधिकरण उस मामले में, जिसमें उपधारा (1) लागू होती है, आवेदक से, विरोध या अपील से संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों के खर्चे की प्रतिभूति देने की अपेक्षा कर सकेगा और सम्यक्तः ऐसी प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम होने पर आवेदन को परित्यक्त मान सकेगा ।

(4) जहां उस मामले में, जिसको उपधारा (1) लागू होती है, किसी माल या सेवाओं की बाबत कोई व्यापार चिह्न किसी ऐसे आवेदक के नाम रजिस्ट्रीकृत है, जो किसी कंपनी को व्यापार चिह्न का समनुदेशन करने के आशय का अवलंब लेता है, वहां यदि ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, या छह मास से अनधिक ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो रजिस्ट्रार विहित रीति में उसे आवेदन करने पर अनुज्ञात करे, कंपनी उस माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्टर नहीं की जाती है, तो रजिस्ट्रीकरण उनकी बाबत उस अवधि के अवसान पर प्रभावशील नहीं होगा और रजिस्ट्रार तद्नुसार रजिस्टर को संशोधित करेगा ।

 


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