Section 59 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 59 The Trade Marks Act, 1999: 

Alteration of registered trade marks.—

(1) The registered proprietor of a trade mark may apply in the prescribed manner to the Registrar for leave to add to or alter the trade mark in any manner not substantially affecting the identity thereof, and the Registrar may refuse leave or may grant it on such terms and subject to such limitations as he may think fit.

(2) The Registrar may cause an application under this section to be advertised in the prescribed manner in any case where it appears to him that it is expedient so to do, and where he does so, if within the prescribed time from the date of advertisement any person gives notice to the Registrar in the prescribed manner of opposition to the application, the Registrar shall, after hearing the parties if so required, decide the matter.

(3) Where leave is granted under this section, the trade mark as altered shall be advertised in the prescribed manner, unless the application has already been advertised under sub-section (2).



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 59 The Trade Marks Act, 1999: 

Maharashtra Hybrid Seeds Co Ltd vs Uoi And Ors on 22 March, 2013

In The High Court Of Judicature At vs Union Of India on 5 November, 2015

Mac. Laboratories Private Ltd. vs American Home Products on 14 May, 1968

Ram Rakhpal vs Amrit Dhara Pharmacy And Ors. on 14 December, 1956

Creative Tours And Travels  vs Intellectual Property Appellate  on 4 May, 2016



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 59 का विवरण : 

रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का परिवर्तन-(1) व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी व्यापार चिह्न की अनन्यता को सारतः प्रभावित न करने वाली रीति में उस व्यापार चिह्न में परिवर्धन या परिवर्तन करने की इजाजत के लिए रजिस्ट्रार को विहित रीति में आवेदन कर सकेगा और रजिस्ट्रार इजाजत देना अस्वीकार कर सकेगा या ऐसी शर्तों पर और ऐसी मर्यादाओं के अधीन दे सकेगा, जो वह ठीक समझे ।

(2) रजिस्ट्रार इस धारा के अधीन किए गए आवेदन को ऐसी किसी दशा में विहित रीति में विज्ञापित करा सकेगा, जहां उसे यह प्रतीत होता हो कि ऐसा करना समीचीन है और जहां वह ऐसा करता है वहां यदि विज्ञापन की तारीख से विहित समय के भीतर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रार को विहित रीति में आवेदन के विरोध की सूचना देता है तो रजिस्ट्रार, यदि आवश्यक हो तो, पक्षकारों को सुनने के पश्चात् मामले का विनिश्चय करेगा ।

(3) जहां इस धारा के अधीन इजाजत दी जाती है वहां यथा परिवर्तित व्यापार चिह्न तब तक विहित रीति में विज्ञापित नहीं किया जाएगा जब तक कि धारा 2 के अधीन आवेदन पहले ही विज्ञापित नहीं कर दिया गया हो ।

 


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