Section 18 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 18 The Trade Marks Act, 1999: 

Application for registration.—

(1) Any person claiming to be the proprietor of a trade mark used or proposed to be used by him, who is desirous of registering it, shall apply in writing to the Registrar in the prescribed manner for the registration of his trade mark.

(2) A single application may be made for registration of a trade mark for different classes of goods and services and fee payable therefor shall be in respect of each such class of goods or services.

(3) Every application under sub-section (1) shall be filed in the office of the Trade Marks Registry within whose territorial limits the principal place of business in India of the applicant or in the case of joint applicants the principal place of business in India of the applicant whose name is first mentioned in the application as having a place of business in India, is situate: Provided that where the applicant or any of the joint applicants does not carry on business in India, the application shall be filed in the office of the Trade Marks Registry within whose territorial limits the place mentioned in the address for service in India as disclosed in the application, is situate.

(4) Subject to the provisions of this Act, the Registrar may refuse the application or may accept it absolutely or subject to such amendments, modifications, conditions or limitations, if any, as he may think fit.

(5) In the case of a refusal or conditional acceptance of an application, the Registrar shall record in writing the grounds for such refusal or conditional acceptance and the materials used by him in arriving at his decision.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 18 The Trade Marks Act, 1999: 

Plus Systems, Inc. And Visa vs Plus Computer Systems Ltd., on 29 January, 2008

Consolidated Foods Corporation vs Brandon And Company Private Ltd. on 26 April, 1961

Bhaskar Cable Network vs Zee Turner Ltd. on 3 September, 2007

M/S. Neon Laboratories Limited vs M/S. Medical Technologies Ltd on 31 March, 2012

Kores (India) Limited vs Khoday Eshwarsa And Son, And Anr. on 3 March, 1984



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 18 का विवरण :  रजिस्ट्रीकरण के लिए ओवदन-

(1) अपने द्वारा उपयोग किए गए या उपयोग के लिए प्रस्थापित किसी व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी होने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति, जो उसका रजिस्ट्रीकरण कराना चाहता है, रजिस्ट्रार को अपने व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए विहित रीति में लिखित रूप में आवेदन करेगा ।

(2) माल और सेवाओं के विभिन्न वर्गों के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए एक ही आवेदन किया जा सकेगा और उसके लिए संदेय फीस माल या सेवाओं के प्रत्येक ऐसे वर्ग की बाबत संदेय होगी ।

(3) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन उस व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के कार्यालय में फाइल किया जाएगा जिसकी राज्यक्षेत्रीय सीमाओं के भीतर आवेदक का भारत में कारबार का प्रधान स्थान स्थित है या संयुक्त आवेदकों की दशा में, उस आवेदक का भारत में कारबार का प्रधान स्थान स्थित है, जिसका नाम भारत में कारबार का स्थान रखने वाले के रूप में आवेदन में प्रथमतः उल्लिखित है :

परन्तु जहां आवेदक या संयुक्त आवेदकों में से कोई भारत में कारबार नहीं करता है वहां आवेदन उस व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के कार्यालय में फाइल किया जाएगा जिसकी राज्यक्षेत्रीय सीमाओं के भीतर वह स्थान स्थित है जो आवेदन में यथाप्रकटित भारत में तामील के लिए पते में उल्लिखित है ।

(4) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रार आवेदन को अस्वीकार कर सकेगा या उसे आत्यंतिकतः अथवा ऐसे संशोधनों, उपांतरणों, शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो वह ठीक समझे, स्वीकार कर सकेगा ।

(5) किसी आवेदन के अस्वीकार किए या सशर्त स्वीकार किए जाने की दशा में, रजिस्ट्रार ऐसी अस्वीकृति या सशर्त स्वीकृति के आधार और अपने विनिश्चय पर पहुंचने के लिए स्वयं द्वारा उपयोग की गई समग्री, लेखबद्ध करेगा ।



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