Section 23 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 23 The Trade Marks Act, 1999: 

 Registration.—

(1) Subject to the provisions of section 19, when an application for registration of a trade mark has been accepted and either—

(a) the application has not been opposed and the time for notice of opposition has expired; or

(b) the application has been opposed and the opposition has been decided in favour of the applicant, the Registrar shall, unless the Central Government otherwise directs, register the said trade mark and the trade mark when registered shall be registered as of the date of the making of the said application and that date shall, subject to the provisions of section 154, be deemed to be the date of registration.

(2) On the registration of a trade mark, the Registrar shall issue to the applicant a certificate in the prescribed form of the registration thereof, sealed with the seal of the Trade Marks Registry.

(3) Where registration of a trade mark is not completed within twelve months from the date of the application by reason of default on the part of the applicant, the Registrar may, after giving notice to the applicant in the prescribed manner, treat the application as abandoned unless it is completed within the time specified in that behalf in the notice.

(4) The Registrar may amend the register or a certificate of registration for the purpose of correcting a clerical error or an obvious mistake.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 23 The Trade Marks Act, 1999: 

M/S. Madura Coats Ltd. & Another vs Shri S.L. Mehendle & Another on 13 August, 1997

Madura Coats Ltd. & Anr. vs S.L. Mehendle, Member, on 13 August, 1997

Sivanesan And Co. vs Deputy Registrar Of Trade Marks  on 4 February, 2004

M/S.Thalappakatti Naidu Ananda vs Thalapakattu Biriyani And Fast on 23 June, 2011

Ram Rakhpal vs Amrit Dhara Pharmacy And Ors. on 14 December, 1956



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 23 का विवरण : 

 रजिस्ट्रीकरण-(1) धारा 19 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जब किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन स्वीकार किया गया है और या तो-

(क) आवेदन का विरोध नहीं किया गया है और विरोध की सूचना का समय समाप्त हो गया है; या

(ख) आवेदन का विरोध किया गया है और विरोध आवेदक के पक्ष में विनिश्चित हुआ है,तब रजिस्ट्रार, जब तक कि केन्द्रीय सरकार अन्यथा निदेश न दे, उक्त व्यापार चिह्न को [आवेदन फाइल करने के अठारह मास के भीतर] रजिस्टर करेगा और व्यापार चिह्न रजिस्टर किए जाने पर उक्त आवेदन के किए जाने की तारीख से रजिस्टर होगा, और वह तारीख धारा 154 के उपबंधों के अधीन, रजिस्ट्रीकरण की तारीख समझी जाएगी ।

(2) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण पर, रजिस्ट्रार, आवेदक को व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की मुद्रा से मुद्रांकित विहित प्रारूप में उसके रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र जारी करेगा ।

(3) जहां आवेदक के व्यतिक्रम के कारण, आवेदन की तारीख से बारह मास के भीतर व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण पूर्ण नहीं हो जाता है वहां रजिस्ट्रार आवेदक को विहित रीति में सूचना देकर आवेदन को परित्यक्त मान सकेगा जब तक कि वह सूचना में इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर पूर्ण न कर दिया जाए ।

(4) रजिस्ट्रार लेखन गलती या स्पष्ट भूल की शुद्धि के प्रयोजनार्थ, रजिस्टर को या रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र को संशोधित कर सकेगा ।


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