Section 16 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 16 The Trade Marks Act, 1999: 

Registration of trade marks as associated trade marks.—

(1) Where a trade mark which is registered, or is the subject of an application for registration, in respect of any goods or services is identical with another trade mark which is registered, or is the subject of an application for registration, in the name of the same proprietor in respect of the same goods or description of goods or same services or description of services or so nearly resembles it as to be likely to deceive or cause confusion if used by a person other than the proprietor, the Registrar may, at any time, require that the trade marks shall be entered on the register as associated trade marks.

(2) Where there is an identity or near resemblance of marks that are registered, or are the subject of applications for registration in the name of the same proprietor, in respect of goods and in respect of services which are associated with those goods or goods of that description and with those services or services of that description, sub-section (1) shall apply as it applies as where there is an identity or near resemblance of marks that are registered, or are the subject of applications for registration, in the name of the same proprietor in respect of the same goods or description of goods or same services or description of services.

(3) Where a trade mark and any part thereof are, in accordance with the provisions of sub-section (1) of section 15, registered as separate trade marks in the name of the same proprietor, they shall be deemed to be, and shall be registered as, associated trade marks.

(4) All trade marks registered in accordance with the provisions of sub-section (3) of section 15 as a series in one registration shall be deemed to be, and shall be registered as, associated trade marks.

(5) On application made in the prescribed manner by the registered proprietor of two or more trade marks registered as associated trade marks, the Registrar may dissolve the association as respects any of them if he is satisfied that there would be no likelihood of deception or confusion being caused if that trade mark were used by any other person in relation to any of the goods or services or both in respect of which it is registered, and may amend the register accordingly.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 16 The Trade Marks Act, 1999: 

Bharat Bhogilal Patel vs Leitz Tooling Systems India Pvt. on 1 June, 2019

Leitz Tooling Systems India Pvt. vs Bharat Bhogilal Patel on 1 June, 2019

Bharti Cellular Limited vs Department Of  on 14 September, 2012

Asso.Of Unified  vs Union Of India & Ors on 17 April, 2014

Asso.Of Unified Tele.Serv.Prov. vs Union Of India . on 17 April, 2014



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 16 का विवरण : 

सहयुक्त व्यापार चिह्नों के रूप में व्यापार चिह्नों का रजिस्ट्रीकरण-

(1) जहां कोई व्यापार चिह्न, जो किसी माल या सेवा की बाबत रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का विषय है उसी स्वत्वधारी के नाम उसी माल या उसी विवरण के माल या उसी सेवा या उसी विवरण की सेवा की बाबत रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का विषय है किसी अन्य व्यापार चिह्न के तद्रूप है या इतना निकटतः सदृश है कि यदि स्वत्वधारी के अतिरिक्त, कोई व्यक्ति उसका उपयोग करे तो धोखा या भ्रम होने की संभाव्यता है, वहां रजिस्ट्रार किसी भी समय, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे व्यापार चिह्न रजिस्टर में सहयुक्त व्यापार चिह्न के रूप में प्रविष्ट किए जाएंगे । 

(2) जहां व्यापार चिह्न की, जो रजिस्टर किए जाते हैं, पहचान है या वे उनके निकट सदृश हैं अथवा उसी स्वत्वधारी के नाम में रजिस्ट्रीकरण के आवेदनों की ऐसे माल और ऐसी सेवाओं के बारे में विषय वस्तु है जो उस माल या उस विवरण के माल और उन सेवाओं या उस विवरण की सेवाओं से सहयुक्त हैं, वहां उपधारा (1) उसी प्रकार लागू होगी जिस प्रकार वह वहां लागू होती जहां उन चिह्नों की, जो रजिस्टर किए गए हैं, पहचान है या वे उनसे निकट सदृश हैं या वे उसी माल या वर्णन के माल या उन्हीं सेवाओं या वर्णन की सेवाओं के बारे में उसी स्वत्वधारी के नाम में रजिस्ट्रीकरण के आवेदनों की विषयवस्तु हैं

(3) जहां धारा 15 की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार, कोई व्यापार चिह्न और उसका भाग उसी स्वत्वधारी के नाम में पृथक् व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकृत है वहां वह सहयुक्त व्यापार चिह्न समझे जाएंगे और उसी रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जाएंगे ।

(4) धारा 15 की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार, एक रजिस्ट्रीकरण में आवलि के रूप में रजिस्ट्रीकृत सभी व्यापार चिह्न सहयुक्त व्यापार चिह्न समझे जाएंगे और उसी रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जाएंगे ।

(5) सहयुक्त व्यापार चिह्नों के रूप में रजिस्ट्रीकृत दो या अधिक व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा विहित रीति में आवेदन करने पर यदि रजिस्ट्रार का समाधान हो जाता है कि यदि वह व्यापार चिह्न उस माल या उन सेवाओं या दोनों में से किसी के संबंध में, जिसकी बाबत यह रजिस्ट्रीकृत है, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग किया जाए तो धोखा या भ्रम होने की संभाव्यता नहीं है, तो वह उनमें से किसी की बाबत सहयोजन समाप्त कर सकेगा और तद्नुसार रजिस्टर संशोधित कर सकेगा ।


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