Section 15 The Trade Marks Act, 1999

 

Section 15 The Trade Marks Act, 1999: 

Registration of parts of trade marks and of trade marks as a series.—

(1) Where the proprietor of a trade mark claims to be entitled to the exclusive use of any part thereof separately, he may apply to register the whole and the part as separate trade marks.

(2) Each such separate trade mark shall satisfy all the conditions applying to and have all the incidents of, an independent trade mark.

(3) Where a person claiming to be the proprietor of several trade marks in respect of the same or similar goods or services or description of goods or description of services, which, while resembling each other in the material particulars thereof, yet differ in respect of—

(a) statement of the goods or services in relation to which they are respectively used or proposed to be used; or

(b) statement of number, price, quality or names of places; or

(c) other matter of a non-distinctive character which does not substantially affect the identity of the trade mark; or

(d) colour, seeks to register those trade marks, they may be registered as a series in one registration.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 15 The Trade Marks Act, 1999: 

M/S.Aravind Laboratories vs Modicare on 5 July, 2011

M/S. Jak Communications Pvt. Ltd vs M/S. Sun Tv Network Limited Rep. By on 27 April, 2010

M/S.Pathanjali Ayurved Limited vs Arudra Engineers Private Limited on 6 August, 2020

Scientific Soap Works And Anr. vs Dalsukhbhai Mangaldas Shah And  on 18 March, 1957

Msm Discovery Private Limited vs Viacom 18 Media Private Limited on 11 August, 2010



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 15 का विवरण : 

व्यापार चिह्नों के भागों का और आवलि के रूप में व्यापार चिह्नों का रजिस्ट्रीकरण-

(1) जहां किसी व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी उस व्यापार चिह्न के किसी भाग के पृथक्तः अनन्य उपयोग का हकदार होने का दावा करता है वहां वह समग्र व्यापार चिह्न और उसके भाग को पृथक् व्यापार चिह्नों के रूप में रजिस्टर करने के लिए आवेदन कर सकेगा ।

(2) ऐसा प्रत्येक पृथक् व्यापार चिह्न स्वतंत्र व्यापार चिह्न को लागू होने वाली सभी शर्तों को पूरी करेगा और उसमें स्वतंत्र व्यापार चिह्न की सभी अनुषंगी बातें होंगी ।

(3) जहां कोई व्यक्ति, जो उसी या समरूप माल या सेवाओं या उसी विवरण के माल या उसी विवरण की सेवाओं की बाबत ऐसे अनेक व्यापार चिह्नों का स्वत्वधारी होने का दावा करता है, जो अपनी तात्त्विक विशिष्टियों में एक दूसरे के सदृश होते हुए भी, निम्नलिखित के संबंध में भिन्न हैं-

(क) जिस माल या सेवा के संबंध में वे क्रमशः उपयोग किए जाते हैं या जिनका उपयोग प्रस्थापित है उनके कथन के संबंध में; या                

(ख) संख्या, कीमत, क्वालिटी या स्थानों के नामों के कथन के संबंध में; या

(ग) अन्य बातों के संबंध में जो सुभिन्नकारी प्रकृति की नहीं हैं और जो उस व्यापार चिह्न की पहचान को सारतः प्रभावित नहीं करती हैं; या

(घ) रंग के संबंध में,उन व्यापार चिह्नों को रजिस्टर करना चाहता है वहां वे एक रजिस्ट्रीकरण में आवलि के रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जा सकेंगे ।



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