Section 77 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 77 The Trade Marks Act, 1999: 

Cancellation or varying of registration of certification trade marks.—The Registrar may, on the application in the prescribed manner of any person aggrieved and after giving the proprietor an opportunity of opposing the application, make such order as he thinks fit for expunging or varying any entry in the register to a certification trade mark, or for varying the regulations, on any of the following grounds, namely:—

(a) that the proprietor is no longer competent, in the case of any of the goods or services in respect of which the mark is registered, to certify those goods or services;

(b) that the proprietor has failed to observe any provisions of the regulations to be observed on his part;

(c) that it is no longer to the public advantage that the mark should remain registered;

(d) that it is requisite for the public advantage that if the mark remains registered, the regulations should be varied.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 77 The Trade Marks Act, 1999: 

National Sewing Thread Co. Ltd vs James Chadwick & Bros. Ltd.(J.& P on 7 May, 1953

Fuerst Day Lawson Ltd vs Jindal Exports Ltd on 8 July, 2011

Municipal Corporation Of Greater  vs Pratibha Industries Limited on 4 December, 2018



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 77 का विवरण : 

प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का रद्द किया जाना या उसमें फेरफार करना-रजिस्ट्रार किसी व्यथित व्यक्ति के विहित रीति में आवेदन पर और स्वत्वधारी को उस आवेदन का विरोध करने का अवसर देने के पश्चात् किसी प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न से संबंधित रजिस्टर में किसी प्रविष्टि को हटाने या उसमें फेरफार करने के लिए या विनियमों में फेरफार करने के लिए निम्नलिखित आधारों में से किसी पर ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे, अर्थात्: -

(क) स्वत्वधारी उस माल या उन सेवाओं में से किसी की दशा में, जिसकी बाबत चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, उस माल या सेवओं को प्रमाणित करने के लिए अब सक्षम नहीं है;

(ख) स्वत्वधारी विनियमों के किसी उपबंध का, जिनका उसे अनुपालन करना था, अनुपालन करने में असफल रहा है;

(ग) चिह्न का रजिस्ट्रीकृत बना रहना अब सार्वजनिक हित में नहीं है;

(घ) सार्वजनिक हित के लिए यह अपेक्षित है कि यदि चिह्न रजिस्ट्रीकृत बना रहे तो विनियमों में फेरफार किया जाए ।

 


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