Section 57 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 57 The Trade Marks Act, 1999: 

Power to cancel or vary registration and to rectify the register.—

(1) On application made in the prescribed manner to the Appellate Board or to the Registrar by any person aggrieved, the tribunal may make such order as it may think fit for cancelling or varying the registration of a trade mark on the ground of any contravention, or failure to observe a condition entered on the register in relation thereto.

(2) Any person aggrieved by the absence or omission from the register of any entry, or by any entry made in the register without sufficient cause, or by any entry wrongly remaining on the register, or by any error or defect in any entry in the register, may apply in the prescribed manner to the Appellate Board or to the Registrar, and the tribunal may make such order for making, expunging or varying the entry as it may think fit.

(3) The tribunal may in any proceeding under this section decide any question that may be necessary or expedient to decide in connection with the rectification of the register.

(4) The tribunal, of its own motion, may, after giving notice in the prescribed manner to the parties concerned and after giving them an opportunity of being heard, make any order referred to in sub-section (1) or sub-section (2).

(5) Any order of the Appellate Board rectifying the register shall direct that notice of the rectification shall be served upon the Registrar in the prescribed manner who shall upon receipt of such notice rectify the register accordingly.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 57 The Trade Marks Act, 1999: 

Jagatjit Industries Limited vs The Intelectual Prop Appellate on 20 January, 2016

Patel Field Marshal Agencies And  vs P.M Diesels Ltd. And Ors. on 29 November, 2017

Cellular Operators Association vs Telecom Regulatory Authority Of on 11 May, 2016

Competition Commission Of India vs Bharti Airtel Ltd on 5 December, 2018



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 57 का विवरण : 

रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने या उसमें फेरफार करने और रजिस्टर को परिशोधित करने की शक्ति-(1) किसी व्यथित व्यक्ति द्वारा विहित रीति में अपील बोर्ड या रजिस्ट्रार को आवेदन करने पर अधिकरण किसी उल्लंघन या उसके संबंध में रजिस्टर में प्रविष्ट शर्त का पालन करने में असफलता के आधार पर व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के रद्द करने या इसमें फेरफार करने का ऐसा आदेश दे सकेगा, जो वह ठीक समझे ।

(2) रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के अभाव या लोप से या रजिस्टर में बिना पर्याप्त कारण से की गई किसी प्रविष्टि से या रजिस्टर में गलती से रह गई किसी प्रविष्टि से या रजिस्टर में किसी प्रविष्टि में किसी गलती या त्रुटि से व्यथित व्यक्ति विहित रीति में अपील बोर्ड या रजिस्ट्रार को आवेदन कर सकेगा, और अधिकरण उसकी प्रविष्टि करने, उसे निकाल देने या उसमें फेरफार करने के लिए ऐसा आदेश दे सकेगा, जो वह ठीक समझे ।

(3) इस धारा के अधीन किसी कार्यवाही में अधिकरण किसी ऐसे प्रश्न को विनिश्चित कर सकेगा जिसका रजिस्टर के परिशोधन के संबंध में विनिश्चय करना आवश्यक या समीचीन हो ।

(4) अधिकरण, स्वप्रेरणा से, संपृक्त पक्षकारों को विहित रीति में सूचना देने के पश्चात् और उन्हें सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट आदेश दे सकता है ।

(5) अपील बोर्ड के रजिस्टर को परिशोधित करने वाले आदेश में यह निदेश होगा कि परिशोधन की सूचना रजिस्ट्रार को विहित रीति में तामील की जाएगी और रजिस्ट्रार ऐसी सूचना की प्राप्ति पर रजिस्टर को तद्नुसार परिशोधित करेगा ।

 


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