Section 24 The Trade Marks Act, 1999


Section 24 The Trade Marks Act, 1999: 

Jointly owned trade marks.—

(1) Save as provided in sub-section (2), nothing in this Act shall authorise the registration of two or more persons who use a trade mark independently, or propose so to use it, as joint proprietors thereof.

(2) Where the relations between two or more persons interested in a trade mark are such that no one of them is entitled as between himself and the other or others of them to use it except—

(a) on behalf of both or all of them; or

(b) in relation to an article or service with which both or all of them are connected in the course of trade, those persons may be registered as joint proprietors of the trade mark, and this Act shall have effect in relation to any rights to the use of the trade mark vested in those persons as if those rights had been vested in a single person.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 24 The Trade Marks Act, 1999: 

Ram Rakhpal vs Amrit Dhara Pharmacy And Ors. on 14 December, 1956

Zenith Colour Trading Co. vs Taherally Esufally Rangwala on 25 July, 1955

Sona Ana Pana Baulraj And Anr. vs S.P. Vadiveu Nadar And Sons And on 13 September, 1963

M/S Cupid Condomss Limited And  vs M/S Health Care Products And 2 Ors. on 26 September, 2014

Pt. Ram Avtar Sharma And Ors. vs Pt. Chakradhar Saran Sharma And  on 21 October, 1970



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 20 का विवरण :

संयुक्त स्वामित्व के व्यापार चिह्न-(1) उपधारा (2) में यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम की कोई बात ऐसे दो या अधिक व्यक्तियों का जो किसी व्यापार चिह्न का स्वतंत्र रूप से उपयोग करते हैं या ऐसे उपयोग की प्रस्थापना करते हैं, उसके संयुक्त स्वत्वधारियों के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्राधिकृत नहीं करेगी

(2) जहां व्यापार चिह्न में हितबद्ध दो या अधिक व्यक्तियों के संबंध ऐसे हैं कि उनमें से कोई भी एक अपने और उनमें से दूसरे या दूसरों के बीच इस बात का हकदार नहीं है कि वह उसका उपयोग-

 (क) दोनों की या सभी की ओर से; या

(ख) जिस वस्तु या सेवा से व्यापार के अनुक्रम में दोनों या सभी संसक्त हैं, उस वस्तु या सेवा के संबंध में,उपयोग करने के सिवाय करे, वहां वे व्यक्ति उस व्यापार चिह्न के संयुक्त स्वत्वधारियों के रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जा सकेंगे और यह अधिनियम उस व्यापार चिह्न के उपयोग के उन व्यक्तियों में निहित अधिकारों के संबंध में इस प्रकार प्रभावी होगा मानो वे अधिकार एक ही व्यक्ति में निहित हों ।


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