Section 35 The Industrial Disputes Act, 1947


Section 35 The Industrial Disputes Act, 1947: 

Protection of persons.-

(1) No person refusing to take part or to continue to take part in any strike or lock- out which is illegal under this Act shall, by reason of such refusal or by reason of any action taken by him under this section, be subject to expulsion from any trade union or society, or to any fine or penalty, or to deprivation of any right or benefit to which he or his legal representatives would otherwise be entitled, or be liable to be placed in any respect, either directly or indirectly, under any disability or at any disadvantage as compared with other members of the union or society, anything to the contrary in the rules of a trade union or society notwithstanding.

(2) Nothing in the rules of a trade union or society requiring the settlement of disputes in any manner shall apply to any proceeding for enforcing any right or exemption secured by this section, and in any such proceeding the Civil Court may, in lieu of ordering a person who has been expelled from membership of a trade union or society to be restored to membership, order that he be paid out of the funds of the trade union or society such sum by way of compensation or damages as that Court thinks just.

Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 35 The Industrial Disputes Act, 1947: 

Punjab National Bank Ltd vs Sri Ram Kanwar, Industrial on 20 December, 1956

Gujarat Electricity vs Hind Mazdoor Sabha & Ors on 9 May, 1995

The Rashtriya Mill Mazdoor vs The Apollo Mills Limited And  on 10 March, 1960

The Automobile Products Of India vs Rukmaji Bala And Others(And on 3 February, 1955

D. N. Banerji vs P. R. Mukherjee And Others on 5 December, 1952

Jalan Trading Co. (Private Ltd.) vs Mill Mazdoor Union(With on 5 August, 1966

Amrit Banaspati Co. Ltd vs S. Taki Bilgrami & Ors on 12 August, 1971

औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 35 का विवरण - 

व्यक्तियों का संरक्षण-(1) किसी ऐसा हड़ताल या तालाबन्दी में, जो इस अधिनियम के अनुसार अवैध है, भाग लेने से या भाग लेते रहने से इंकार करने वाला कोई भी व्यक्ति, ऐसे इंकार के कारण या इस धारा के अधीन उसके द्वारा की गई किसी कार्रवाई के कारण, व्यवसाय संघ या सोसाइटी के नियमों में किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किसी व्यवसाय संघ या सोसाइटी से, निष्कासित किए गए जाने का, या किसी जुर्माने या शास्ति का, या किसी ऐसे अधिकार या प्रसुविधा से, जिसके लिए वह या उसके विधिक प्रतिनिधि अन्यथा हकदार हों, वंचित किए जाने का भागी नहीं होगा और न उस संघ या सोसाइटी के अन्य सदस्यों की तुलना में, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः, किसी भी विषय में किसी निर्योग्यता के अधीन या किसी अहितकर स्थिति में रखे जाने का भागी होगा ।

(2) किसी व्यवसाय संघ या सोसाइटी के नियमों में की कोई भी बात, जो विवादों का किसी भी रीति से समझौता करने की अपेक्षा करती है, इस धारा द्वारा सुनिश्चित किए गए अधिकार या छूट को प्रवर्तित कराने के लिए की गई कार्यवाही को लागू नहीं होगी और ऐसी किसी कार्यवाही में सिविल न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसे किसी व्यवसाय संघ या सोसाइटी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है, यह आदेश देने के बदले कि उसे फिर से सदस्य बना लिया जाए यह आदेश दे सकेगा कि उस व्यवसाय संघ या सोसाइटी की निधियों में से प्रतिकर या नुकसानी के तौर पर ऐसी राशि दी जाए जिसे वह न्यायालय न्यायसंगत समझे ।

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